पटना, रमण शुक्‍ला। बिहार में दबंगई के लिए बदनाम थानेदारों की छवि बदलने की पहल की जा रही है। अच्छे आचार-व्यवहार वाले थानेदार सम्मानित होंगे और भ्रष्ट-बदनाम थानेदारों की काउंसिलिंग होगी। एक मौका दिया जाएगा। नहीं सुधरे तो हटा दिया जाएगा। पुलिस मुख्‍यालय की मानें तो एक-एक थानेदार की कुंडली खंगाली जाएगी।

थानेदारों की छवि का कराया जाएगा मूल्यांकन

पुलिस मुख्यालय ने बिहार के 1100 थानेदारों की कुंडली खंगालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। खास यह है कि एक-दो नहीं, बल्कि तीन माध्यम से थानेदारों की छवि का मूल्यांकन कराया जाएगा। इसके आधार पर प्रत्येक जिले से पांच उम्दा और पांच लचर काम करने वाले थानेदारों को चिह्नित किया जाएगा। पांच पैमाने पर मॉनीटरिंग रिपोर्ट बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें पुलिस महकमे के अलावा दो अन्य माध्यमों को जिम्मेदारी दी गई है। मूल्यांकन में मुख्य रूप से कोरोना संकट के दौरान पुलिस की सामाजिक सरोकार से संबंधित छवि पर विशेष फोकस रहेगा।

1500 से अधिक थाने और ओपी हैं बिहार में

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के न्याय के साथ विकास कार्यक्रम के तहत पुलिस यह नवाचार कर रही है। बिहार में 1500 से अधिक थाने और ओपी हैं। इनमें थानों की संख्या करीब 1100 है। कोशिश है कि पुलिस के खिलाफ बढ़ती नकारात्मक धारणा में सुधार किया जाए। जनता के बीच पुलिस के मानवीय चेहरे को उभारा जाए। खासकर महिलाओं, बच्चों और अन्य कमजोर वर्गों में जागरूकता पैदा की जाए। इसके विशेषज्ञों को लगाया गया है।

डीजी टीम करेगी मूल्यांकन

जिलों से आई रिपोर्ट के मूल्यांकन की जिम्मेवारी पुलिस मुख्यालय स्तर पर डीजी टीम को दी जाएगी। उम्दा काम करने वाले थानेदारों को जहां प्रदेश स्तर पर सम्मानित किया जाएगा, वहीं लचर थानेदारों को पुलिस मुख्यालय बुलाकर काउंसिलिंग का प्रावधान किया गया है।

पांच बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट

1. कर्तव्यनिष्ठा, 2. छवि, 3. सेवाभाव, 4. आम जनता खासकर कमजोर, शोषित दलित और अकलियतों के बीच संदेश, 5. जनप्रतिनिधियों के प्रति व्यवहार। 

Posted By: Rajesh Thakur

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