पीएम किसान सम्मान निधि: बिहार के 13 लाख किसान पहले ही सूची से बाहर, अब 18 लाख पर मंडरा रहा खतरा
बिहार में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 13 लाख किसान पहले ही पात्रता खो चुके हैं, और अब ...और पढ़ें

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से बाहर हो सकते हैं 18 लाख किसान। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
बिहार में 13 लाख किसान पीएम किसान सम्मान निधि से बाहर।
18 लाख अतिरिक्त किसानों पर पात्रता सूची से बाहर होने का खतरा।
फार्मर रजिस्ट्री, ई-केवाईसी, भूमि अभिलेख सत्यापन मुख्य चुनौतियां।
रमण शुक्ला, पटना। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ लेने के लिए तय की गई पात्रता संबंधित शर्तें किसानों के लिए लगातार चुनौती बनती जा रही है।
बिहार में पात्रता की कसौटी पर खरे नहीं उतरने के कारण पिछले सात वर्ष 13 लाख अन्नदाता लाभार्थी सूची से बाहर हो चुके हैं।
पहली दिसंबर 2018 से योजना प्रभावी है। जबकि पहली किस्त की राशि किसानों फरवरी 2019 में मिली थी। पहली बार बिहार के 86 लाख किसानों को योजना का लाभ मिला था।
सात वर्ष में 13 लाख से अधिक किसान हुए पात्रता सूची से बाहर
फार्मर रजिस्ट्री, ई-केवाइसी, आधार प्रमाणीकरण, बैंक खाते की गड़बड़ी और भूमि संबंधी अभिलेखों के सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं करने के कारण अब 18 लाख से अधिक किसानों की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से वंचित होने की आशंका बढ़ गई है।
केंद्र सरकार की ओर से योजना का लाभ उन्हीं किसानों को दिया जाता है, जो निर्धारित पात्रता पूरी करते हैं। इसमें फार्मर आइडी यानि (फार्मर रजिस्ट्री) प्रमुख पात्रता है।
फार्मर आइडी (फार्मर रजिस्ट्री) बन रही बड़ी बाधा
इसके लिए समय-समय पर लाभार्थियों के डाटा का सत्यापन भी कराया जाता है। इस प्रक्रिया में ऐसे किसानों के नाम हटाए जा रहे हैं, जिनके दस्तावेजों में विसंगति मिल रही है या जिनकी पात्रता का सत्यापन नहीं हो पा रहा है।
किसानों के सामने केवल सम्मान निधि से वंचित होने का खतरा नहीं बल्कि खाद के अतिरिक्त अन्य अनुदान एवं सुविधाएं बंद करने की तैयारी है। इसे लेकर कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा स्वयं चिंतित हैं। मंत्री ने इस संबंध में केंद्र सरकार से गुहार लगाई है।
55 लाख किसानों का ही बना फार्मर आइडी
बिहार में केंद्र सरकार की तमाम चेतावनी एवं कई चरणों के अभियान के बावजूद मात्र 55 लाख किसानों का ही फार्मर आइडी (फार्मर रजिस्ट्री) बनी है।
इससे जहां सैकड़ों करोड़ रुपये की सहायता राशि से राज्य सरकार के सामने वंचित होेने का खतरा है। वहीं, सीधे तौर 18 लाख अन्नदाता भी किसान सम्मान निधि के अतिरिक्त अन्य कई लाभ से वंचित हो सकते हैं।
केंद्र सरकार की ओर से योजना का लाभ उन्हीं किसानों को दिया जाता है, जो निर्धारित पात्रता पूरी करते हैं। समय-समय पर लाभार्थियों के डाटा का सत्यापन भी कराया जाता है।
शर्तें कठिन होने से सूची से बाहर हो रहे किसान
इस प्रक्रिया में ऐसे किसानों के नाम हटाए जा रहे हैं, जिनके दस्तावेजों में विसंगति मिल रही है या जिनकी पात्रता का सत्यापन नहीं हो पा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक समस्या भूमि अभिलेख और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी के मिलान को लेकर सामने आ रही है।
कई किसानों के नाम राजस्व अभिलेख में दर्ज भूमि से संबंधित जानकारी आधार या आवेदन में दर्ज विवरण से मेल नहीं खाती।
वहीं, कुछ किसानों का बैंक खाता आधार से लिंक नहीं होने या खाता संख्या में त्रुटि के कारण भुगतान अटक जाता है।
ई-केवाइसी पूरा नहीं होने पर भी किसान योजना की अगली किस्त से वंचित हो सकते हैं। ऐसे में किसानों को प्रखंड और कृषि कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
कृषि विभाग की ओर से किसानों को समय रहते अपने दस्तावेज, बैंक खाता, आधार और भूमि संबंधी विवरण दुरुस्त कराने की सलाह दी जा रही है।
