10 रुपये में खुलता है खाता, एक रुपये न्यूनतम जमा राशि

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2009 में बाल भवन किलकारी के सौजन्य से हुई 'गुल्लक बच्चा बैंक' की शुरुआत

500 रुपये से अधिक की निकासी पर बैंक प्रबंधन को देना होता है आवेदन

75 रुपये का प्रोत्साहन मिलता है 500 से अधिक जमा करने पर

16 वर्ष से अधिक उम्र होने पर सरकारी बैंक में स्थानांतरित हो जाता है खाता

3598 खाते खुल चुके हैं 'गुल्लक बच्चा बैंक' में 2017 तक

200 से अधिक खातों का राष्ट्रीयकृत बैंकों में हुआ है स्थानांतरण

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सुपर इंट्रो

कहते हैं, बचत एक आदत है और ये आदत जितनी जल्दी पड़ जाए अच्छी। बच्चों में बचत की इसी आदत को मजबूत करने के लिए किलकारी बाल भवन में आठ साल पहले 'गुल्लक बच्चा बैंक' की नींव रखी गई। ये बैंक बच्चे ही चलाते हैं और पैसे भी वही जमा करते हैं। विश्व बचत दिवस पर प्रभात रंजन की खास रिपोर्ट।

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राजधानी में एक बैंक ऐसा भी हैं, जहां ग्राहक भी बच्चे हैं और प्रबंधक भी। बिहार बाल भवन किलकारी की ओर से बच्चों में पैसे की बचत करने की आदत डालने के लिए 'गुल्लक बच्चा बैंक' की स्थापना 14 नवंबर, 2009 में की गई। बाल दिवस के दिन गुल्लक बैंक का उद्घाटन सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। 'गुल्लक बच्चा बैंक' बैंक का ही छोटा स्वरूप है, जिसका संचालन पूर्ण रूप से बच्चे ही करते हैं। समुचित संचालन के लिए बच्चों की एक समिति बनाई गई है, जो बैंक संचालन एवं प्रबंधन पर नजर रखती है। किलकारी में नामांकित बच्चे गुल्लक के सदस्य बनते हैं।

जमा करने के लिए एक रुपये न्यूनतम राशि

बच्चे न्यूनतम 10 रुपये की राशि से खाता खोल सकते हैं। बैंक में जमा करने के लिए न्यूनतम राशि एक रुपये है। 500 रुपये से अधिक पैसे निकालने के लिए आवेदन के साथ अभिभावक का हस्ताक्षर फॉर्म पर होना जरूरी है। साथ ही पैसे निकासी का कारण भी बैंक को बताना होता है। दो हजार रुपये से अधिक निकालाने के लिए बैंक को सूचना तीन दिन पहले देनी होती है।

जमा राशि पर मिलता है ब्याज

वित्तीय वर्ष के अंत में जमा राशि पर गुल्लक बैंक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देता है। साथ ही वित्तीय वर्ष के अंत में बच्चों के खाते में 500 रुपये या उससे अधिक जमा राशि पर किलकारी 75 रुपये प्रोत्साहन के रूप में देता है। बच्चे की उम्र 16 वर्ष से अधिक होने पर बच्चे का खाता किलकारी गुल्लक बैंक से सरकारी बैंक में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

60 लाख रुपये से अधिक का कारोबार

आठ साल पहले एक झोपड़ी से शुरु होने वाला 'गुल्लक बच्चा बैंक' वर्ष 2017 में 60 लाख रुपये से अधिक का कारोबार कर चुका है। एक-एक रुपये बैंक में जमा करने वाले बच्चों के खाते में हजार रुपये जमा हो चुके हैं। बच्चे बैंक से पैसे निकालकर उसका प्रयोग अपनी पढ़ाई, मां के इलाज या घर के जरूरी कामों में अपना सहयोग देते हैं। गुल्लक बच्चा बैंक में 63,11,981 रुपये का लेनदेन हो चुका है। वर्ष 2009 से वर्ष 2017 के सिंतबर माह तक 3598 बैंक खाता खुल चुके हैं। बैंक की स्थापना पर 447 बच्चों को बैंक में खाता खुला था जो आगे चलकर तीन हजार से अधिक हो गए हैं। इसमें से दौ से अधिक खाते का राष्ट्रीयकृत बैंकों में स्थानांतरण कर दिया गया है।

एक माह प्रशिक्षण के बाद बैंक चलाने का दायित्व

किलाकारी के कैशियर मनोज बताते हैं कि गुल्लक प्रबंधन समिति के गठन के लिए बच्चों की टीम तैयार की जाती है। इच्छुक बच्चों की सूची तैयार कर एक माह तक प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद संचालन समिति में जगह खाली होने पर नये बच्चों को जिम्मेदारी दी जाती है। उप-प्रबंधक में बेहतर काम करने वाले को प्रबंधक पद की जिम्मेवारी दी जाती है। प्रति माह गुल्लक प्रबंधन बच्चों के साथ बैठक आयोजित करता है, जिसमें ग्राहकों के सुझावों एवं शिकायतों पर बात की जाती है। बैंक का संचालन मंगलवार से रविवार सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक होता है।

पढ़ाई के लिए सबसे अधिक निकाले गए पैसे - वर्ष 2009 से वर्ष 2016 के बीच बच्चों द्वारा 500 रुपये से अधिक की निकासी पढ़ाई के लिए की गई। किलकारी के मनोज बताते हैं बच्चों द्वारा पैसे निकासी के कारण को भी बताना पड़ता है। आंतरिक अध्ययन के आधार पर 60 फीसद बच्चे पढ़ाई के लिए पैसे निकालते हैं, जिसमें पुस्तक खरीदने, स्कूल और ट्यूशन फी प्रमुख है।

बचत और बैकिंग कार्य से अवगत हो रहे बच्चे - किलकारी की निदेशक ज्योति परिहार ने कहा कि गुल्लक बच्चा बैंक के बहाने बच्चों में पैसे का महत्व समझाने के साथ बचत की आदत डालने की नींव डाली गई है। साथ ही बैंकिंग प्रणाली को समझने और काम करने को लेकर बच्चों को जानकारी दी जाती है। जिसके माध्यम से आने वाले दिनों में बच्चे किसी भी सरकारी या अ‌र्द्धसरकारी बैंकों में जाकर अपना काम आसानी से कर सकते हैं। व्यक्तित्व विकास के साथ बच्चों को सही दिशा में ले जाने के लिए गुल्लक बैंक अपनी भूमिका निभा रहा है।

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गुल्लक बैंक से लाभ बच्चों को मिलता है। बैंक से मिलने वाला प्रत्यक्ष लाभ जरूरतों को पूरा करने में काम आता है। बच्चों के लिए एक-एक रुपये काफी महत्व रखता है। बैंक के बहाने पैसे बचाने की प्रवृति बच्चों में होने से पैसे की उपयोगिता को भली-भांति समझा जा सकता है।

ज्योति परिहार, निदेशक, बिहार बाल भवन किलकारी

वर्ष 2016 में गुल्लक बैंक में मेरा खाता खुला था। अभी 400 रुपये जमा हैं। अभी तक पैसे नहीं निकाले हैं जरूरत होने पर पैसे निकालेंगे। बैंक पैसा जमा करने की आदत और उपयोगिता को बताता है।

एकलव्य कुमार, वर्ग पांच

साल 2016 में गुल्लक बैंक में 10 रुपये से खाता खोला था। पॉकेट मनी बचाकर बैंक में पैसे जमा करती हूं। पढ़ाई या फिर घर में जरूरी काम होने पर इसे निकाला जाएगा। यहां हर साल जमा की गई राशि पर ब्याज मिलता है।

कुमकुम कुमारी, वर्ग सात

वर्ष 2014 में गुल्लक बैंक में खाता खोला था। अभी बैंक में 1400 रुपया जमा हैं। पाकेट मनी से मिलने वाले पैसे को बचाकर जमा कर रही हूं। आगे बोर्ड की परीक्षा देनी है, जिसके लिए पैसे जमा कर रही हूं। फार्म और ट्यूशन फी भरने में मदद करेगी।

नंदनी सिन्हा, वर्ग सात

अभी गुल्लक बैंक में 600 रुपये जमा हैं। घर से जो भी पैसा मिलता उसमें कुछ बचाकर बैंक में जमा कर देती हूं। मां के जन्मदिन पर पैसे निकालकर उसके लिए साड़ी खरीद कर दूंगी। उपहार पाकर वह खुश हो जाएगी।

चांदनी कुमारी , वर्ग आठ

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