पटना सिटी [अनिल कुमार]। सड़कों पर बेखौफ घूम रहे बंदरों की दहशत इस कदर बढ़ गई है कि लोगों के अपने घर ही पिंजड़े बन गए हैं। दिनचर्या लोहे के ग्रिल के अंदर कैद होकर रह गई है। खिड़की से लेकर दरवाजे और छत तक पर जाली, ग्रिल लगवाने को दो से पांच लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। उसपर भी थोड़ी चूक होने, दरवाजा या खिड़की खुली होने पर बंदर भीतर घुसकर उत्पात मचाते हैं। भगाने की कोशिश करने पर बंदर घुड़की की दहशत मचा काटने को दौड़ते हैं। नागरिकों की इस परेशानी को नगर निगम व वन विभाग नजर अंदाज किए है।

एक दशक में तीन की मौत व 500 हुए हैं जख्मी 

बंदरों की झुंड और इनकी घुड़की से भगदड़ मचने की संभावना बनी रहती है। लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व 350वें प्रकाशपर्व को लेकर वन विभाग द्वारा बंदरों को पकडऩे का अभियान तीन दिनों तक चलाया गया था।

विशेष बंदूक से बंदरों पर हमला कर उन्हें बेहोश करने के बाद लगभग एक दर्जन बंदरों को पिंजरे में कैद कर चिड़यिाघर की टीम ले गई थी। एक दशक के अंदर दो महिलाओं तथा एक चिकित्सक की मौत बंदर के कारण हुई है। वहीं 500 से अधिक लोगों को बंदरों ने काटकर घायल किया है। 

छतों पर लगा लोहे का जाल

बंदरों के खौफ से तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब के आसपास के अधिकतर भवनों की छतों पर लोगों ने लोहे की जाल लगवा कर खुद को सुरक्षित किया है। खिड़कियों में तार का घना जाल लगा है। लोगों ने बताया कि ग्रिल या जाल लगवाने का खर्च घर के बाहरी खुले भाग के क्षेत्रफल पर निर्भर करता है। लोहे के ग्रिल से बंद कराने में दो से पांच लाख रुपये खर्च आता है।

स्थानीय लोगों की माने तो यहां बंदरों की संख्या डेढ़ से दो सौ के बीच है। 10 से 15 की टोली बना कर घूमते बंदर कब किसे शिकार बना ले कहना मुश्किल है। 

- देश-विदेश से आनेवाले श्रद्धालु भी होते हैं शिकार 

देश-विदेश से आने वाले सिख-श्रद्धालुओं को तख्त श्री हरिमंदिर, बाल लीला गुरुद्वारा तथा कंगन घाट मार्ग में बंदरों के आतंक से सामना करना पड़ता है। संगतों के हाथ से खाने का सामान बंदर छीन लेते हैं। विरोध करने पर संगत पर हमला कर घायल कर देते हैं। 

- कपड़ा लेकर भागते हैं तो नोट की गड्डी भी उड़ाते हैं

गुरुद्वारों के आसपास बंदर घुड़की की दहशत इतनी कि महिलाओं ने छत पर जाना ही छोड़ दिया है। बच्चों के छत पर जाने तथा अकेले बाहर खेलने पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है।उधम मचाता बंदर हाथ से खाने-पीने का सामान छीन लेता है।

महिलाओं ने बताया कि दरवाजा खुला पाकर रसोई तक बंदरों का झुंड आ जाता है। खाना लेकर चला जाता है। फ्रीज तक खोल कर सामान ले भागता है। एक मोहल्ले के घर का कपड़ा दूसरे मोहल्ले में मिलता है। मच्छरहट्टा गली में एक बंदर ने व्यवसायी के हाथ से एक लाख की गड्डी उड़ा लोगों की भीड़ इक_ा कर दी थी। 

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