पटना जू के पर्यटकों के लिए बड़ी खुशखबरी, 'वंदे भारत' की तर्ज पर नए कलेवर में लौटेगी टॉय ट्रेन
पटना जू में 17 अगस्त 2015 से बंद टॉय ट्रेन अगले वर्ष फिर से पटरियों पर दौड़ेगी।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
टॉय ट्रेन अगले वर्ष पटना जू में फिर से शुरू होगी।
बैटरी से चलने वाली चार डिब्बों की ट्रेन पर्यावरण अनुकूल होगी।
9.88 करोड़ की लागत से 3.77 किमी नया ट्रैक बनेगा।
जागरण संवाददाता, पटना। राजधानी के संजय गांधी जैविक उद्यान पटना जू में टॉय ट्रेन पटरियों पर जल्द ही सरपट दौड़ेगी। 17 अगस्त 2015 से बंद टॉय ट्रेन अगले वर्ष जू परिसर में दौड़ते नजर आएगी।
दानापुर रेल मंडल के साथ बीते वर्ष दिसंबर 2024 में एमओयू समझौता हुआ था। जू प्रबंधन के अनुसार ट्रेन के डिब्बे का डिजाइन अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुआ है।
दानापुर रेल मंडल की ओर से जनवरी के अंत तक कार्य पूरा करने की संभावना है। कार्य पूरा होने के बाद ही जू परिसर में टॉय ट्रेन चलने के आसार है।
ट्रेन के डिब्बे को समस्तीपुर रेल कारखाना में तैयार किया जाएगा। इसमें चार डिब्बे वाली ट्रेन वंदे भारत की तरह दिखाई देगी। इसके जरिए जू की सैर कर रहे पर्यटक पेड़-पौधे की हरियाली को करीब से देख पाएंगे।
9 करोड़ 88 लाख रुपये से नया ट्रैक
9 करोड़ 88 लाख रुपये से नया ट्रैक बनेगा। डीजल इंजन की जगह पर पर्यावरण का संतुलित बनाए रखने को लेकर टॉय ट्रेन बैटरी से चलेगी। ट्रेन के रास्ते में गुफा दर्शकों को रोमांचित करेगी।
40 मिनट की सैर कर लोग वन्य प्राणियों के करतब का आनंद उठा पाएंगे। फिलहाल ट्रैक की लंबाई 3.77 किमी है। प्रत्येक डिब्बे में 20 लोगों की बैठने की क्षमता होगी।
टॉय ट्रेन विभिन्न वन्य जीवों के केज होते हुए गैंडा हाल्ट, मछली घर हाल्ट आदि से गुजरेगी। जिस रास्ते से होकर ट्रेन गुजरेगी उसके लिए विशेषज्ञ डिजायन तैयार किया जाएगा। इसके जरिए लोगों को पर्यावरण व वन्य जीवों के संरक्षण का भी संदेश दिया जाएगा।
शिशु रेल का हुआ था परिचालन
पटना जू में सर्वप्रथम शिशु रेल का परिचालन 1977 में आरंभ किया गया था। जू के निदेशक हेमंत पाटिल ने बताया कि राज्य सरकार के अनुरोध पर भारतीय रेलवे द्वारा बच्चों की रेलगाड़ी एक इंजन एवं दो डिब्बे उपहार के रूप में पटना जू का प्राप्त हुई थी।
उस दौरान शिशु रेल पर्यटकों, विशेषकर बच्चों में काफी लोकप्रिय हुई थी। पटरी की लंबाई महज 1.59 किमी थी। कालांतर में शिशु रेल काफी पुरानी हो जाने के कारण इसका रख रखाव में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था।
2004 में राज्य सरकार के अनुरोध पर रेल मंत्रालय द्वारा चार डिब्बे वाली एक नई शिशु रेल को उपहार स्वरूप पटना जू को दिया गया था। अगस्त 2015 में दर्शकों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से 17 अगस्त 2015 से शिशु रेल क परिचालन बंद जू परिसर में बंद है।
