विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पटना जू में चलेगी वंदे भारत जैसी ट्रेन! 9.88 करोड़ रुपये से बनेगा ट्रैक; जल्‍द खत्‍म होगी इंतजार की घड़ी

Published: Tue, 13 Oct 2026 06:31 PM (IST)

पटना जू में 11 साल बाद बैटरी से चलने वाली नई टॉय ट्रेन की वापसी हो रही है, जिसका बाहरी ...और पढ़ें

पटना जू में चलेगी वंदे भारत के लुक की टॉय ट्रेन। एआई इमेज

पटना जू में चलेगी वंदे भारत के लुक की टॉय ट्रेन। एआई इमेज

HighLights

  1. पटना जू में 11 साल बाद लौटेगी बैटरी वाली टॉय ट्रेन।

  2. ट्रेन का बाहरी लुक वंदे भारत एक्सप्रेस जैसा होगा, 2027 से चलेगी।

  3. 9.88 करोड़ रुपये से नया ट्रैक बनेगा, पेड़ों को बचाया जाएगा।

जागरण संवाददाता, पटना। संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना जू) में करीब 11 साल बाद एक बार फिर टॉय ट्रेन की सीटी गूंजने की तैयारी है।

सबकुछ योजना के अनुसार रहा तो जनवरी 2027 से पर्यटक चिड़ियाघर में बैटरी से चलने वाली नई टॉय ट्रेन की सवारी कर सकेंगे। ट्रेन का बाहरी लुक वंदे भारत एक्सप्रेस जैसा होगा।

इसके एक इंजन के साथ चार डिब्बे जोड़े जाएंगे। इससे पर्यटक वन्यजीवों के विभिन्न बाड़ों और उद्यान के प्रमुख आकर्षणों को देखते हुए सफर का आनंद ले सकेंगे।

टॉय ट्रेन के परिचालन को दोबारा शुरू करने की दिशा में रेलवे ने सर्वे पूरा कर लिया है। ट्रैक बिछाने के लिए रास्ते की मार्किंग भी कर दी गई है।

पुरानी रेल पटरी हटाने और रास्ते में आने वाली झाड़ियों की सफाई का काम पूरा हो चुका है। अब नए सिरे से पटरी बिछाने की तैयारी है। इसके लिए एक सप्ताह के भीतर काम शुरू होने की उम्मीद है।

पेड़ों को बचाने के लिए बदला गया ट्रैक का रास्ता

पटना जू में टॉय ट्रेन का ट्रैक तैयार करने के दौरान उद्यान की हरियाली को सुरक्षित रखना प्रमुख प्राथमिकता है। ट्रैक के रास्ते में कई पेड़ आने के कारण जू प्रबंधन ने दोबारा सर्वे कराया।

इसके बाद मार्ग में बदलाव किया गया, ताकि पेड़ों को काटने या हटाने की जरूरत न पड़े। नए रूट में पटरी पेड़ों के बगल से गुजरेगी। इससे कुसुम सहित अन्य पेड़ों को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

जू प्रबंधन की कोशिश है कि टॉय ट्रेन के परिचालन से पर्यटकों को नई सुविधा मिले और उद्यान के प्राकृतिक स्वरूप को भी नुकसान न पहुंचे।

जू के निदेशक हेमंत पाटिल के अनुसार, ट्रैक तैयार करने में सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती चार स्थानों पर ट्रेन के लिए पर्याप्त घुमाव देने की थी।

ट्रेन को मोड़ने के लिए करीब 60 डिग्री का घुमाव जरूरी था, लेकिन इन स्थानों पर पर्याप्त जगह उपलब्ध कराने में कठिनाई आ रही थी।

इसके बाद दोबारा सर्वे कर ट्रैक की दिशा और घुमाव के विकल्प तलाशे गए। तकनीकी बाधाओं का समाधान होने के बाद नए मार्ग को अंतिम रूप देकर मार्किंग पूरी कर ली गई।

Patna Zoo 1

(पहले चलती थी ये टॉय ट्रेन।)

9.88 करोड़ रुपये से बनेगा नया ट्रैक

पटना जू में टॉय ट्रेन को दोबारा शुरू करने के लिए दानापुर रेल मंडल के साथ दिसंबर 2024 में समझौता हुआ था। योजना के तहत करीब 9.88 करोड़ रुपये की लागत से नया ट्रैक तैयार किया जाएगा।

ट्रेन का निर्माण समस्तीपुर रेल कारखाने में किया जाएगा। पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए पुरानी डीजल आधारित व्यवस्था की जगह बैटरी से चलने वाली ट्रेन लाने की योजना है।

इसमें एक इंजन के साथ चार डिब्बे होंगे। ट्रेन के लिए विशेष डिजाइन तैयार किया जाएगा, ताकि इसका परिचालन उद्यान के निर्धारित मार्ग पर सुरक्षित तरीके से हो सके।

टॉय ट्रेन विभिन्न वन्यजीवों के बाड़ों के पास से गुजरेगी। इसके निर्धारित मार्ग में गैंडा हाल्ट और मछली घर हाल्ट जैसे पड़ाव भी शामिल होंगे। इस दौरान पर्यटक वन्यजीवों को देखने के साथ पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे।

1977 में शुरू हुआ था शिशु रेल का परिचालन

पटना जू में शिशु रेल का परिचालन पहली बार वर्ष 1977 में शुरू किया गया था। जू के निदेशक हेमंत पाटिल के अनुसार, राज्य सरकार के अनुरोध पर भारतीय रेलवे ने एक इंजन और दो डिब्बों वाली बच्चों की रेलगाड़ी उपहार स्वरूप दी थी।

यह ट्रेन खासकर बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हुई थी। उस समय इसकी पटरी की लंबाई करीब 1.59 किलोमीटर थी।बाद में पुरानी ट्रेन के रखरखाव में परेशानी होने लगी।

इसके बाद वर्ष 2004 में रेल मंत्रालय ने चार डिब्बों वाली नई शिशु रेल पटना जू को उपहार में दी। हालांकि, समय के साथ ट्रेन पुरानी होने और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण इसका परिचालन 17 अगस्त 2015 से बंद कर दिया गया।

टॉय ट्रेन बंद होने के बाद चिड़ियाघर घूमने आने वाले बच्चों को इसकी सवारी का अवसर नहीं मिल पा रहा था। अब नई ट्रेन शुरू करने की योजना से पर्यटकों को एक बार फिर उद्यान की सैर के दौरान रेल यात्रा का आनंद मिलने की उम्मीद है।

ऐतिहासिक भाप इंजन आज भी जू की धरोहर

पटना जू परिसर में पुरानी शिशु रेल का भाप इंजन आज भी ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संरक्षित है। इंजन संख्या 73 जेडबी का संबंध पश्चिम रेलवे के बड़ौदा मंडल के डभोई स्थित नैरो गेज स्टीम लोको शेड से रहा है।

भारतीय रेलवे ने इस इंजन को पटना जू को उपहार स्वरूप दिया था। अगस्त 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने इसका अनावरण किया था। आज यह इंजन जू आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

नई बैटरी चालित टॉय ट्रेन शुरू होने से पटना जू में बच्चों और परिवारों के लिए मनोरंजन का एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होने की उम्मीद है।

इसके साथ ही रेलवे और जू प्रबंधन के सामने तय समय में ट्रैक निर्माण पूरा करने तथा सुरक्षित परिचालन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की चुनौती भी होगी।