पटना में डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसी छात्रा की मौत, 4 दिन बाद रेलवे ट्रैक पर मिला शव
पटना में डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसी 24 वर्षीय छात्रा का शव राजेंद्र नगर टर्मिनल के पास रेलवे ट्रैक पर मिला।

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
छात्रा का शव राजेंद्र नगर टर्मिनल रेलवे ट्रैक पर मिला।
परिजनों ने डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी का आरोप लगाया।
पुलिस पर समय पर कार्रवाई न करने का आरोप।
जागरण संवाददाता, पटना। कंकड़बाग थाना क्षेत्र की 24 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पांच अक्टूबर को घर से लापता छात्रा का शव शुक्रवार की सुबह राजेंद्र नगर टर्मिनल के पास रेलवे ट्रैक पर मिला। उसके शव के पास ही एक युवक का शव भी बरामद हुआ है।
युवक की पहचान नहीं हो सकी है। छात्रा के स्वजन ने शव की पहचान करने के बाद साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाकर रुपये ऐंठने का आरोप लगाया है।
स्वजन के मुताबिक, छात्रा साइबर अपराधियों के संपर्क में थी। शातिर उसे बार-बार फोन कर रुपये की मांग कर रहे थे।
इसकी जानकारी परिवार को तब हुई, जब अलग-अलग नंबरों से स्वजन के पास फोन आने लगे। कभी दुबई तो कभी दूसरे राज्यों से फोन कर कहा जाता था कि उसने लोन लिया है, लेकिन अब तक रकम नहीं चुकाई है।
रुपये नहीं देने पर घर पहुंचकर रिकवरी करने की धमकी भी दी जा रही थी। इसको लेकर स्वजन के सदस्यों की फोन करने वालों से कई बार बहस भी हुई।
पिता के खाते से डेढ़ लाख से अधिक का ट्रांजेक्शन
स्वजन ने बताया कि बाद में जानकारी मिली कि छात्रा ने पिता के बैंक खाते से डेढ़ लाख रुपये से अधिक की राशि अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की थी। परिवार को आशंका है कि साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर दबाव बनाकर उससे रुपये ट्रांसफर कराए।
हालांकि, रुपये के लेनदेन और युवती की मौत के बीच संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। राजेंद्र नगर टर्मिनल जीआरपी के थानाध्यक्ष ने बताया कि छात्रा के शव की पहचान हो गई है। स्वजन के अनुसार, वह लापता थी।
मामले में यूडी केस दर्ज कर जांच की जा रही है। कंकड़बाग थाने की पुलिस से भी संपर्क किया गया है। छात्रा के शव के पास मिले युवक की पहचान और दोनों की मौत के कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। छात्रा का मोबाइल, बैग व अन्य सामान मिले हैं।
तीन दिन पहले शिकायत के बाद भी पुलिस नहीं हुई सचेत
छात्रा के भाई के अनुसार, उनकी बहन पांच अक्टूबर की सुबह 10:00 से 11:00 बजे घर से निकली थी। उसने बताया था कि वह एनआइटी के पास कोई फार्म भरने जा रही है।
उसके पास एक छोटा बैग भी था। इसके बाद वह घर नहीं लौटी। छह अक्टूबर को स्वजन ने कंकड़बाग थाने में गुमशुदगी की शिकायत दी।
परिवार का कहना है कि इसके बाद वे लगातार थाने में फोन करते रहे और जानकारी लेने पहुंचते रहे, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
स्वजन का आरोप है कि छात्रा के मोबाइल नंबर पर फोन करने पर वह चालू बता रहा था। इसकी जानकारी पुलिस को भी दी गई, लेकिन परिवार के मुताबिक, नंबर को ट्रेस करने या उससे जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
भाई ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर समय रहते तकनीकी जांच की जाती तो शायद उनकी बहन को बचाया जा सकता था।
स्वजन का यह भी आरोप है कि पुलिस बार-बार प्रेम प्रसंग की आशंका जताती रही, जबकि साइबर ठगी से जुड़े पहलुओं की गंभीरता से जांच नहीं की गई।
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