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शारदीय नवरात्र इस बार 10 दिन का, दो दिन होगी महागौरी की पूजा; एक तिथि बढ़ने से ऐसे बदला पूरा क्रम

Published: Wed, 07 Oct 2026 08:36 PM (IST)

शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 अक्टूबर से शुभ संयोगों के साथ शुरू होगा और अष्टमी तिथि दो दिन होने के ...और पढ़ें

11 अक्‍टूबर को होगी नवरात्र की शुरुआत।

11 अक्‍टूबर को होगी नवरात्र की शुरुआत।

HighLights

  1. शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से 10 दिनों तक चलेगा।

  2. मां दुर्गा का आगमन और विदाई इस बार हाथी पर होगी।

  3. अष्टमी तिथि दो दिन होने से महागौरी की पूजा भी दो दिन।

जागरण संवाददाता, पटना। Navratra 2026:शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र इस वर्ष शुभ संयोगों के साथ 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू होगा।

इस दिन चित्रा नक्षत्र, वैधृति योग, द्विपुष्कर योग, बव करण और तुला लग्न में कलश स्थापना के साथ नवरात्र का शुभारंभ होगा। अष्टमी तिथि दो दिन होने के कारण इस बार शारदीय नवरात्र 10 दिनों का होगा।

ज्योतिष शास्त्र में नवरात्र के दौरान तिथि का बढ़ना शुभ माना गया है। घरों से लेकर पूजा पंडालों तक दस दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना होगी और वेदमंत्रों की गूंज सुनाई देगी।

ज्योतिषाचार्य पंडित राजनाथ झा ने बताया कि 20 अक्टूबर को सूर्योदय के समय नवमी तिथि विद्यमान रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि का प्रवेश होगा।

उदया तिथि की मान्यता के अनुसार 21 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। धर्मशास्त्रीय परंपरा में तिथि का निर्णय केवल कैलेंडर की तारीख देखकर नहीं किया जाता, बल्कि सूर्योदय के समय तिथि की व्याप्ति और शास्त्रीय विधान को भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

हाथी पर होगा मां दुर्गा का आगमन और विदाई

मां दुर्गा का आगमन और विदाई इस बार हाथी पर होगी। देवी भागवत पुराण के अनुसार हाथी पर देवी का आगमन और गमन शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे सुख-समृद्धि, आर्थिक उन्नति और अच्छी वर्षा के आसार बनते हैं।

श्रद्धालु कलश स्थापना के बाद दुर्गा सप्तशती, रामचरितमानस, सुंदरकांड, रामरक्षा स्तोत्र, दुर्गा सहस्रनाम, अर्गला स्तोत्र, कवच, कीलक और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करेंगे।

श्रद्धापूर्वक सप्तशती पाठ को रोग-शोक से मुक्ति तथा सुख, समृद्धि, ज्ञान, वैभव और पारिवारिक सौहार्द की प्राप्ति का माध्यम माना गया है।

दिन से तय होता है देवी का वाहन

आचार्य राकेश झा ने बताया कि देवी भागवत पुराण के अनुसार नवरात्र के पहले दिन के वार से देवी के आगमन और अंतिम दिन के वार से विदाई के वाहन का निर्धारण होता है।

आगमन का वाहन: रविवार और सोमवार को गज, मंगलवार और शनिवार को घोड़ा, गुरुवार और शुक्रवार को डोला तथा बुधवार को नौका माना जाता है।

विदाई का वाहन: रविवार और सोमवार को महिष, मंगलवार और शनिवार को चरणायुध, बुधवार और शुक्रवार को गज तथा गुरुवार को नर वाहन का विधान बताया गया है।

18 और 19 को अष्‍टमी त‍िथ‍ि

अष्टमी तिथि दो दिन रहने के कारण इस बार मां महागौरी की पूजा भी दो दिन होगी। अष्टमी 18 और 19 अक्टूबर को रहेगी। अष्टमी व्रत और माता का शृंगार-पूजन 18 अक्टूबर को होगा।

सप्तमी का व्रत 17 अक्टूबर को और महानवमी का व्रत एवं पूजन 20 अक्टूबर, मंगलवार को होगा। इस तरह शारदीय नवरात्र 10 दिनों का होगा।

नवरात्र में इन स्वरूपों की होगी पूजा

तिथि पर्व/तिथि मां का स्वरूप
11 अक्टूबर प्रतिपदा शैलपुत्री
12 अक्टूबर द्वितीया ब्रह्मचारिणी
13 अक्टूबर तृतीया चंद्रघंटा
14 अक्टूबर चतुर्थी कूष्मांडा
15 अक्टूबर पंचमी स्कंदमाता
16 अक्टूबर षष्ठी कात्यायनी
17 अक्टूबर सप्तमी कालरात्रि
18 अक्टूबर अष्टमी महागौरी
19 अक्टूबर अष्टमी महागौरी
20 अक्टूबर नवमी सिद्धिदात्री
21 अक्टूबर दशमी विजयादशमी