पटना नगर निगम बोर्ड की बैठक संपन्न, 19 एजेंडों को मिली स्वीकृति; सफाई से लेकर शहर के कारोबार तक बदलने वाला है
पटना नगर निगम ने 19 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी है, जिसमें सफाई व्यवस्था के नए मॉडल और 200 करोड़ ...और पढ़ें

200 करोड़ रुपये से पटना में 15 जगह बनेंगे वेंडिंग जोन
HighLights
सफाई व्यवस्था के लिए नया मॉडल, 9600 कर्मियों को मिलेगा लाभ।
200 करोड़ से 15 वेंडिंग जोन, फुटपाथी दुकानदारों को व्यवस्थित जगह।
श्रीकृष्णापुरी, राजेंद्र नगर में G+3 निर्माण की बंदिश हटी।
जागरण संवाददाता, पटना। पटना की सफाई व्यवस्था से लेकर फुटपाथी दुकानदारों के कारोबार तक, आने वाले दिनों में शहर की तस्वीर बदलने की तैयारी है। पटना नगर निगम अब सफाई व्यवस्था का संचालन नए मॉडल से करने जा रहा है। इसके तहत करीब 9600 सफाईकर्मियों को चयनित एजेंसियों के पे-रोल पर रखा जाएगा।
इस नई व्यवस्था से निगम को हर साल 30 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होने का अनुमान है। वहीं, म्यूनिसिपल बॉन्ड से जुटाए गए 200 करोड़ रुपये से शहर के 15 स्थलों पर वेंडिंग जोन और वाणिज्यिक परिसर विकसित किए जाएंगे।
शनिवार को महापौर सीता साहू की अध्यक्षता में हुई पटना नगर निगम पर्षद की 13वीं साधारण बैठक में इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों समेत कुल 19 एजेंडों को स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में उप महापौर रेशमी कुमारी, नगर आयुक्त यशपाल मीणा और निगम पर्षद के सदस्य मौजूद रहे।
9600 सफाईकर्मियों का बदलेगा कार्य मॉडल, दो एजेंसियों को मिलेगी जिम्मेदारी
नगर निगम की सफाई व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए दो एजेंसियों के चयन की रूपरेखा को मंजूरी दी गई है। प्रत्येक एजेंसी को तीन-तीन अंचलों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। यानी शहर के छह अंचलों में सफाई व्यवस्था का संचालन इन एजेंसियों के माध्यम से किया जाएगा।
नई व्यवस्था में वर्तमान में सफाई कार्यों में लगे लगभग 9600 मानवबल को चयनित एजेंसियों के पे-रोल पर रखना अनिवार्य होगा। वहीं, निगम के स्थायी सफाईकर्मियों को अन्य निर्धारित जिम्मेदारियों में लगाया जाएगा।
घर से कचरा उठाने से लेकर शिकायतों तक एजेंसियों की होगी जवाबदेही
नई व्यवस्था में एजेंसियों को केवल डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की जिम्मेदारी नहीं मिलेगी, बल्कि कचरे का पृथक्करण, प्रोसेसिंग प्लांट तक परिवहन और सड़कों व गलियों की सफाई भी करनी होगी।
इसके अलावा गार्बेज वल्नरेबल प्वाइंट यानी कचरा जमा होने वाले संवेदनशील स्थानों की सफाई और कंट्रोल रूम में मिलने वाली शिकायतों का निष्पादन भी एजेंसियों की जिम्मेदारी होगी।
निगम का मानना है कि इससे सफाई कार्यों की निगरानी आसान होगी। साथ ही सफाईकर्मियों को श्रम कानूनों के अनुरूप वेतन और सेवा संबंधी लाभ सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इस मॉडल से सालाना 30 करोड़ रुपये से अधिक की बचत का अनुमान लगाया गया है।
200 करोड़ रुपये से पटना में 15 जगह बनेंगे वेंडिंग जोन
फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले विक्रेताओं के लिए भी नगर निगम ने बड़ा फैसला लिया है। म्यूनिसिपल बॉन्ड से जुटाई गई करीब 200 करोड़ रुपये की राशि से शहर के 15 स्थलों पर वेंडिंग जोन और वाणिज्यिक परिसरों का निर्माण कराया जाएगा।
इसके निर्माण के लिए निगम पर्षद ने एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड के साथ एकरारनामा करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। परियोजना पूरी होने के बाद फुटपाथी दुकानदारों को व्यवस्थित जगह मिल सकेगी।
इससे उनके रोजगार और आजीविका को बढ़ावा मिलने के साथ शहर में अव्यवस्थित तरीके से लगने वाली दुकानों की समस्या को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
श्रीकृष्णापुरी और राजेंद्र नगर में G+3 की बंदिश हटेगी
नगर निगम ने अपनी लीज होल्ड संपत्तियों के निर्माण नियमों में भी बदलाव को मंजूरी दी है। श्रीकृष्णापुरी और राजेंद्र नगर में निगम की ओर से लीज पर आवंटित संपत्तियों पर लागू अधिकतम G+3 निर्माण की शर्त हटाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है।
बिहार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026 और वर्तमान शहरी जरूरतों को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया गया है। इससे संबंधित संपत्तियों के विकास और निर्माण की प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक हो सकेगी। हालांकि, निर्माण के लिए अन्य लागू भवन उपविधियों और वैधानिक प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा।
बोरिंग से लेकर छठ की तैयारियों तक कई प्रस्तावों को हरी झंडी
बैठक में शहर की आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बोरिंग अधिष्ठापन से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इसके अलावा म्यूनिसिपल बॉन्ड की कूपन दर और छठ महापर्व के सफल आयोजन से संबंधित परियोजनाओं को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
19 फैसलों से सफाई, कारोबार और शहरी विकास को मिलेगी नई दिशा
नगर निगम की इस बैठक में लिए गए फैसलों का असर शहर की सफाई व्यवस्था, फुटपाथी कारोबार, निगम की संपत्तियों के विकास और आधारभूत सुविधाओं पर पड़ने की उम्मीद है।
एक तरफ सफाई व्यवस्था के लिए एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ वेंडिंग जोन के माध्यम से छोटे कारोबारियों को व्यवस्थित जगह देने की योजना है। निगम का लक्ष्य संसाधनों का बेहतर उपयोग, खर्च में बचत और शहर की सुविधाओं को मजबूत करना है।
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