मौत के बाद भी 3 को नया जीवन दे गया पटना का मोनू, बिहार सरकार ने भी खोले हाथ, अनुदान से पहली बार खास काम
सड़क हादसे में ब्रेन डेड हुए 16 वर्षीय मोनू कुमार के परिवार ने अंगदान कर तीन मरीजों को नया जीवन ...और पढ़ें

IGIMS में पहला सफल लिवर प्रत्यारोपण करने के बाद चिकित्सकों की टीम। सौ: स्वास्थ्य विभाग
जागरण संवाददाता, पटना। सड़क हादसे में 16 वर्षीय बेटे को खोने के असहनीय दुख के बीच पुनाईचक निवासी सुभाष कुमार के परिवार ने मानवता की मिसाल पेश की।
बेटे मोनू कुमार को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद स्वजन ने उसका लिवर और दोनों किडनी दान करने का निर्णय लिया। इससे तीन मरीजों को नया जीवन मिला।
IGIMS में एक युवती का लिवर और एक मरीज की किडनी प्रत्यारोपित की गई, जबकि दूसरी किडनी ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एम्स पटना पहुंचाई गई, जहां एक अन्य मरीज का प्रत्यारोपण हुआ।
इस बीच बिहार में पहली बार राज्य सरकार की आर्थिक सहायता से लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की पहल पर इसके लिए 15 लाख रुपये का अनुदान तीन दिनों में उपलब्ध कराया गया।
सरकार की योजना के तहत अब आइजीआइएमएस में लिवर ट्रांसप्लांट के लिए मरीज को आर्थिक सहायता मिलेगी।
हादसे के 16 दिन बाद अंगदान से तीन मरीजों को जीवन
हनुमान नगर, पुनाईचक निवासी सुभाष कुमार के 16 वर्षीय पुत्र मोनू कुमार 19 अक्टूबर को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
सिर में गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। दो दिन उपचार के बाद 21 अक्टूबर को आइजीआइएमएस के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में डाॅ. संजीव कुमार की यूनिट में भर्ती कराया गया।
जांच में मस्तिष्क में गंभीर चोट और फेफड़े के काम नहीं करने की बात सामने आई। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। तीन नवंबर को संस्थान की ब्रेन डेथ कमेटी ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच कर ब्रेन डेथ की पुष्टि की।
कमेटी के अध्यक्ष डाॅ. मनीष मंडल और सदस्य डाॅ. संजीव कुमार, डाॅ. प्रदीप जायसवाल व डाॅ. अभय रंजन ने प्रक्रिया पूरी की।
बेटे के बचने की उम्मीद नहीं होने की जानकारी मिलने पर स्वजन ने बड़ा फैसला लिया। लिवर और दोनों किडनी दान करने की सहमति दी।
स्वास्थ्य मंत्री की पहल पर तीन दिन में मिला अनुदान
मोनू के अंगदान की जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने आईजीआईएमएस के निदेशक डाॅ. बिंदे कुमार और गैस्ट्रो सर्जरी एवं लिवर ट्रांसप्लांट विभागाध्यक्ष डाॅ. मनीष मंडल से बात की।
उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्यारोपण में आर्थिक या संसाधन संबंधी बाधा नहीं आनी चाहिए। लिवर ट्रांसप्लांट के लिए सरकार की ओर से प्रति मरीज 15 लाख रुपये का अनुदान देने के पूर्व घोषित निर्णय के तहत सहायता उपलब्ध कराई गई।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आर्थिक कठिनाई के कारण किसी जरूरतमंद को जीवनरक्षक उपचार से वंचित नहीं होना पड़े, यह सरकार का संकल्प है।
सोटो-नोटो के समन्वय से तीन मरीजों को मिले अंग
मोनू के अंगदान की सूचना स्टेट आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (सोटो) ने नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (नोटो), दिल्ली और रीजनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन (रोटो), कोलकाता को दी।
इसके बाद आईजीआईएमएस और एम्स पटना की प्रत्यारोपण टीमों के बीच समन्वय से अंगों का आवंटन किया गया।
लिवर प्रत्यारोपण: पांच नवंबर को आइजीआइएमएस में अनीसाबाद निवासी 19 वर्षीय युवती का सफल लिवर ट्रांसप्लांट किया गया।
डाॅ. मनीष मंडल के नेतृत्व में डाॅ. संजय कुमार, डाॅ. साकेत कुमार, डाॅ. राकेश कुमार सिंह सहित चिकित्सकों की टीम ने प्रत्यारोपण किया।
पहली किडनी: इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) में एक मरीज का किडनी प्रत्यारोपण किया गया। यूरोलाॅजी विभागाध्यक्ष डाॅ. रोहित उपाध्याय के नेतृत्व में डाॅ. एहसान अहमद और डाॅ. निखिल रंजन ने यह प्रक्रिया पूरी की।
दूसरी किडनी: एम्स पटना में फुलवारीशरीफ निवासी मरीज का प्रत्यारोपण किया गया। किडनी एम्स पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। ट्रैफिक पुलिस और एस्कार्ट की मदद से एंबुलेंस महज 16 मिनट में एम्स पहुंची।
दस साल पहले पिता ने दी थी किडनी, अब मिला दूसरा जीवन
एम्स में जिस मरीज का दोबारा किडनी प्रत्यारोपण किया गया, उसका पहला ट्रांसप्लांट आठ जनवरी 2016 को हुआ था। तब उसके पिता ने किडनी दान की थी।
करीब दस साल बाद प्रत्यारोपित किडनी ने काम करना बंद कर दिया, जिसके बाद उसे दोबारा प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ी। मोनू की किडनी मिलने से उसे जीवन का एक और अवसर मिला।
एम्स पटना में अब तक 19 सफल किडनी प्रत्यारोपण हो चुके हैं। इनमें ब्रेन स्टेम डेथ के बाद अंगदान से मिली किडनी से किए गए दो प्रत्यारोपण भी शामिल हैं।
IGIMS में अब मुफ्त होगा लिवर ट्रांसप्लांट
आईजीआईएमएस के उप निदेशक (प्रशासन) डाॅ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने बताया कि बिहार सरकार ने लिवर ट्रांसप्लांट के लिए प्रति मरीज 15 लाख रुपये का अनुदान देने का आदेश जारी किया है।
इससे लिवर प्रत्यारोपण अब मरीजों के लिए मुफ्त होगा। गुरुवार को हुआ प्रत्यारोपण इस सरकारी अनुदान योजना के तहत बिहार का पहला लिवर ट्रांसप्लांट था। इस उपलब्धि पर अस्पताल की पूरी टीम को बधाई दी गई।
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