60 करोड़ का पुल बना पटना मसौढ़ी के लोगों के लिए मुसीबत, दो साल से निर्माण अधूरा; रोज जाम में फंस रहे हजारों लोग
पटना के मसौढ़ी में 60 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा रेल ओवर ब्रिज (आरओबी) दो साल से अधिक ...और पढ़ें

डेडलाइन बीती लेकिन निर्माण अधूरा
डिजिटल हेडिंग, पटना। राजधानी पटना से सटे मसौढ़ी में लोगों को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए जिस रेल ओवर ब्रिज (ROB) का निर्माण शुरू किया गया था, वही अब उनके लिए परेशानी का सबब बन गया है। करीब 60 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला तरेगना दक्षिणी गुमटी एलसी-21ए का आरओबी दो साल से अधिक समय बीतने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है।
हालात ऐसे हैं कि पुल निर्माण के नाम पर सड़कें खुदी पड़ी हैं, जगह-जगह मलबा जमा है और बारिश होने पर कीचड़ व जलजमाव लोगों की परेशानी बढ़ा देते हैं।
जिस परियोजना से मसौढ़ी के लोगों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद थी, उसकी अधूरी निर्माण प्रक्रिया ने पूरे इलाके की रफ्तार रोक दी है।
स्कूली बच्चों से लेकर मरीजों और नौकरीपेशा लोगों तक को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर 60 करोड़ रुपये की इस परियोजना को पूरा होने में और कितना समय लगेगा?
एक साल में पूरा होना था पुल, डेडलाइन बीती लेकिन निर्माण अधूरा
मसौढ़ी के तरेगना दक्षिणी गुमटी पर बनने वाले इस आरओबी की परियोजना काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसकी कुल लंबाई 522 मीटर है, जबकि इसके साथ 747 मीटर लंबा एप्रोच रोड भी बनाया जाना है। परियोजना की लागत 60 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
इस परियोजना का शिलान्यास 9 दिसंबर 2023 को किया गया था। इसके बाद 18 जनवरी 2024 से निर्माण कार्य शुरू हुआ। इसे एक साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
इस हिसाब से निर्माण कार्य 17 जनवरी 2025 तक पूरा हो जाना चाहिए था। हालांकि, निर्धारित समय पर काम पूरा नहीं हो सका। परियोजना की संशोधित समय-सीमा 17 जनवरी 2026 भी बीत चुकी है, लेकिन अब तक पुल तैयार नहीं हो पाया है।
कहीं पुल का ढांचा तैयार तो कहीं नींव का काम भी बाकी
निर्माण कार्य की स्थिति देखें तो परियोजना के अलग-अलग हिस्सों में काफी अंतर नजर आता है। रेलवे लाइन के पूर्वी छोर पर आरओबी का मुख्य ढांचा लगभग तैयार हो चुका है, लेकिन एप्रोच रोड का काम अभी अधूरा है। वहीं पश्चिमी हिस्से में पाइलिंग और फाउंडेशन से जुड़े कई काम बाकी बताए जा रहे हैं।
ऐसे में सिर्फ पुल का ढांचा खड़ा कर देने से लोगों को राहत मिलने वाली नहीं है। जब तक दोनों तरफ पहुंच पथ का निर्माण पूरा नहीं होगा, तब तक इस पर वाहनों का परिचालन शुरू करना संभव नहीं होगा। यही वजह है कि स्थानीय लोगों को फिलहाल इस परियोजना के जल्द चालू होने की उम्मीद कम नजर आ रही है।
रेलवे फाटक बंद होते ही लग जाता है वाहनों का लंबा काफिला
तरेगना दक्षिणी गुमटी पर रेलवे फाटक बंद होते ही दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। दोपहिया और चारपहिया वाहनों के साथ भारी वाहनों की आवाजाही भी जाम को और गंभीर बना देती है। कई बार लोगों को थोड़ी दूरी तय करने में भी काफी समय लग जाता है।
इस जाम का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और मरीजों पर पड़ता है। एंबुलेंस तक को रास्ता मिलने में परेशानी होती है।
रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों के लिए समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचना बड़ी चुनौती बन गया है। बारिश के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है।
सड़क पर कीचड़, जलजमाव और मलबा; बाजार की रौनक भी गायब
आरओबी निर्माण के कारण आसपास की सड़कों की स्थिति भी खराब हो गई है। निर्माण स्थल के पास जलजमाव और कीचड़ जमा रहने से पैदल चलने वालों को काफी परेशानी होती है। जगह-जगह बिखरे निर्माण सामग्री और मलबे के कारण वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होती है।
इसका असर स्थानीय कारोबार पर भी पड़ रहा है। दुकानदार अशोक यादव और स्थानीय निवासी नवल भारती के मुताबिक, मसौढ़ी के पश्चिमी इलाके के लोगों को शहर पहुंचने के लिए दो से तीन किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। जाम और धूल-गर्द के कारण ग्राहक बाजार आने से बच रहे हैं। इससे दुकानदारों की आमदनी पर भी असर पड़ा है।
स्थानीय लोगों का सवाल- आखिर कब मिलेगी जाम से मुक्ति?
स्थानीय विनोद केसरी, डॉ. राम जयपाल सिंह यादव समेत कई लोगों का कहना है कि आरओबी जल्द पूरा होने के आश्वासन के बीच वे लंबे समय से परेशानियां झेल रहे हैं। निर्माण स्थल पर सड़क और मलबे की समस्या के कारण आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि निर्माण कार्य पूरा होने की निश्चित तारीख चाहिए। लोगों के मुताबिक, परियोजना में देरी का खामियाजा आम जनता भुगत रही है, जबकि रोजाना जाम में फंसने और खराब रास्तों से गुजरने की मजबूरी बनी हुई है।
रेलवे और निर्माण एजेंसी के बीच समन्वय की कमी बनी देरी की वजह?
परियोजना में देरी के पीछे रेलवे और निर्माण एजेंसी के बीच समन्वय की कमी, बिजली और पाइपलाइन शिफ्टिंग के साथ कुछ तकनीकी अड़चनें भी जिम्मेदार बताई जा रही हैं। इन समस्याओं के कारण निर्माण कार्य की गति प्रभावित हुई है।
विधायक अरुण मांझी का कहना है कि निर्माण के दौरान कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आई हैं, लेकिन परियोजना का काम समय पर पूरा हो जाएगा।
हालांकि, स्थानीय लोग अब इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है कि संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी मिलकर समस्याओं का समाधान करें और काम में तेजी लाएं।
60 करोड़ रुपये की इस परियोजना से मसौढ़ी के लोगों को जाम से राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन फिलहाल अधूरा पुल, बदहाल सड़क और रोजाना का महाजाम उनकी परेशानी बढ़ा रहा है।
अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर यह बहुप्रतीक्षित आरओबी कब बनकर तैयार होगा और उन्हें कब इस मुसीबत से छुटकारा मिलेगा।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।