पटना, अहमद रजा हाशमी। खुद पर विश्वास हो और अपनों का साथ हो तो कोई भी जंग लड़ी ही नहीं जीती भी जा सकती है, जीवन की हर परीक्षा पास की जाती है। लगातार ऐसे उदाहरण सामने आ रहे हैं, जो आत्मविश्वास और सावधानी से कोरोना को हरा रहे हैं। आज कहानी पटना के राहुल की, जिन्होंने डॉक्टरों की सलाह और सकारात्मक ऊर्जा से कोरोना को हराया। खुद बता रहे हैं कि इस जंग में उन्होंने जीवन को कैसे जिताया।

अस्पताल में खुद को रखा व्यस्त : अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान मैंने मोबाइल की मदद से खुद को व्यस्त रखा। घर वालों के साथ पटना से लेकर स्कॉटलैंड तक के दोस्तों के संपर्क में रहा। सबने मेरा हौसला बढ़ाया। दोस्त फोन पर बने रहे तो परिवार प्रेरणा के लिए मददगार साबित हुआ।

चिकित्सकों के निर्देशों का पूरी तरह किया पालन : स्कॉटलैंड से लौटने के बाद बीस मार्च को पटना एम्स पहुंचा था। 21 मार्च को जांच हुई। 22 मार्च को कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उसी दिन मुझे एनएमसीएच के संक्रामक रोग अस्पताल (आइडीएच) में भर्ती किया गया। पहले डर लगा पर धीरे-धीरे सब ठीक लगने लगा। डॉक्टरों की पूरी टीम ने बहुत मेहनत की, मनोबल भी बढ़ाया। अस्पताल में एक ही काम किया कि जो चिकित्सकों ने कहा, मैंने सब कुछ फॉलो किया।

अभी और सावधानी रखूंगा : दस दिन बाद नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल की एंबुलेंस से सीधे फुलवारीशरीफ के बभनपुरा स्थित घर लौटा। पिता कुमार मृत्युंजय, मां पूनम देवी, भाई दीपक व निशांत को देखकर अच्छा लगा। कुछ दिन और लोगों से मुलाकात नहीं करूंगा और आराम करूंगा। स्थिति सुधरने के बाद स्कॉटलैंड लौटकर कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की दो साल की शेष पढ़ाई पूरी करूंगा।

घर पर रहें, स्वस्थ रहें : अभी कई लोग कोरोना से जंग लड़ रहे हैं। मैं उनसे कहना चाहूंगा कि वे हिम्मत नहीं हारें बल्कि कोरोना को हराने के लिए मजबूत बनें। खाने-पीने पर ध्यान दें ताकि रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो। डब्लूएचओ की गाइडलाइन का पालन करें। डॉक्टर की बात मानें। लॉकडाउन का पालन करते हुए खुद को घर में ही सुरक्षित रखें।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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