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नीला ड्रम; बोरी, कचरा और फूल... पटना की सड़कों पर कुछ इस हाल में दिखे 'गांधीजी'

Published: Fri, 02 Oct 2026 10:31 AM (IST)

गांधी जयंती से ठीक पहले पटना सिटी में महात्मा गांधी की प्रतिमाओं की दयनीय स्थिति सामने आई है। कचरे, चारे ...और पढ़ें

बापू के सामने पत्ता गोभी का कचरा और ड्रम

बापू के सामने पत्ता गोभी का कचरा और ड्रम

HighLights

  1. गांधी प्रतिमाओं के सामने कचरा, चारा और नीले ड्रम मिले।

  2. फूलों की दुकानों से ढकी मिलीं, माला तक नहीं चढ़ी।

  3. एक प्रतिमा ढाई साल से टूटी, मरम्मत का इंतजार।

अनिल कुमार, पटना सिटी। गांधी जयंती से एक दिन पहले पटना सिटी की सड़कों पर बापू को खोजने निकले तो तस्वीरें चौंकाने वाली थीं। कहीं गांधीजी की प्रतिमा के सामने कचरे की टोकरी मिली, कहीं चारे की बोरियां रखी थीं। गुरहट्टा मोड़ पर नीला ड्रम प्रतिमा के सामने पड़ा था तो बौली मोड़ पर फूलों की दुकान के बीच बापू की प्रतिमा ही ओझल हो गई थी। फूल बिक रहे थे, मगर गांधीजी की गर्दन एक माला को तरसती मिली।

खाजेकलां में बापू के सामने पत्ता गोभी का कचरा

खाजेकलां थाना से महज 50 फीट की दूरी पर लिंक पथ पर लगी गांधीजी की प्रतिमा के सामने टोकरी में पत्ता गोभी के छिलके पड़े मिले।

आसपास मौजूद लोगों ने बताया कि प्रतिमा के आगे अक्सर कूड़ा फेंका जाता है। हैरानी यह कि इसी रास्ते से पुलिस और आम नागरिक रोज गुजरते हैं, लेकिन किसी का ध्यान इस ओर नहीं जाता।

प्रतिमा के पीछे एक महिला फूल-माला बेचती मिली। आसपास से लोग फूल खरीदकर ले जा रहे थे, लेकिन बापू की प्रतिमा पर एक भी माला नजर नहीं आई। जिस जगह से स्वच्छता और सादगी का संदेश मिलना चाहिए, वहां कूड़े की तस्वीर सामने थी।

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खाजेकलां में बापू के सामने पत्ता गोभी का कचरा

गांधी चौक पर बोरी में भरा चारा

दीवान मोहल्ला हमाम स्थित गांधी चौक पर प्रतिमा के सामने जानवरों का चारा रखने वाली बोरियां रखी मिलीं। आसपास गोबर भी जमा था।

स्थानीय लोगों ने बताया कि जनप्रतिनिधियों और नगर निगम अधिकारियों की नियमित देखरेख नहीं होने के कारण प्रतिमा पर धूल जमती रहती है।

लोगों के अनुसार बारिश होने पर ही प्रतिमा की धूल कुछ हद तक साफ हो पाती है। बाकी दिनों में बापू की प्रतिमा और उसका आसपास का हिस्सा उपेक्षा की कहानी कहता नजर आता है।

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दीवान मोहल्ला हमाम स्थित गांधी चौक पर प्रतिमा के सामने जानवरों का चारा

गुरहट्टा मोड़ पर प्रतिमा के सामने रखा नीला ड्रम

गुरहट्टा मोड़ पर स्थिति और भी अलग दिखी। गांधीजी की प्रतिमा के सामने चबूतरे पर सड़क पर बिछाए जाने वाले कोलतार का ड्रम रखा था। रात ढलने के बाद इससे निकलने वाले काले धुएं से आसपास का हिस्सा ढक जाता है।

जिस चबूतरे पर बापू की प्रतिमा सम्मान के साथ दिखनी चाहिए, वहां निर्माण सामग्री का ड्रम उसकी मौजूदगी को ही ढकता नजर आया। राहगीर आते-जाते रहे, लेकिन प्रतिमा की तरफ किसी का ध्यान जाता नहीं दिखा।

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गुरहट्टा मोड़ पर प्रतिमा के सामने रखा नीला ड्रम

फूलों की दुकान लगी बापू के सामने

बौली मोड़ पर गांधी प्रतिमा के सामने माली की दुकान लगी मिली। दुकान के कारण प्रतिमा का बड़ा हिस्सा ढक गया है। सड़क से गुजरने वालों को प्रतिमा को खोजने के लिए भी नजरें घुमानी पड़ती हैं।

विडंबना यह रही कि उसी दुकान से दर्जनों लोग फूल-मालाएं खरीदकर जाते दिखे। फूल बिकते रहे, मगर बापू की प्रतिमा पर एक माला तक नहीं थी। गांधीजी की गर्दन पर माला का इंतजार मानो पूरे दृश्य का सबसे चुभता हुआ सवाल बन गया।

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बौली मोड़ पर गांधी प्रतिमा के सामने माली की दुकान

ढाई साल से टूटी प्रतिमा, सिर-धड़ भी नहीं

मंगल तालाब स्थित मनोज कमलिया स्टेडियम में गांधी प्रतिमा की हालत सबसे खराब मिली। करीब ढाई वर्ष पहले नशेड़ियों ने प्रतिमा का सिर और धड़ तोड़कर क्षतिग्रस्त कर दिया था।

इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता संजीव यादव ने प्रतिमा के क्षतिग्रस्त सिर और धड़ के हिस्से को पाटलिपुत्र परिषद में रखवा दिया।

ढाई वर्ष बीतने के बाद भी प्रतिमा की मरम्मत नहीं हो सकी। गांधी जयंती के मौके पर जब शहर बापू को याद करने की तैयारी कर रहा है, तब यह टूटी प्रतिमा सालभर की उपेक्षा की कहानी खुद बयां कर रही है।

जयंती पर माला, फिर पूरे साल भुला दिए जाते हैं बापू

पटना सिटी में अलग-अलग स्थानों पर गांधी प्रतिमाओं की यह स्थिति एक सवाल छोड़ती है। क्या बापू को सिर्फ गांधी जयंती और पुण्यतिथि पर ही याद किया जाना है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि इन दिनों नेताओं और सामाजिक संगठनों की ओर से माल्यार्पण और फोटो खिंचवाने के कार्यक्रम होते हैं, लेकिन इसके बाद प्रतिमा स्थलों की नियमित देखभाल नहीं होती।

लोगों की मांग है कि चौक-चौराहों पर लगी गांधी प्रतिमाओं की नियमित साफ-सफाई हो, क्षतिग्रस्त प्रतिमाओं की मरम्मत कराई जाए और प्रतिमा स्थलों को अतिक्रमण व कचरे से मुक्त रखा जाए।

बापू की प्रतिमाएं पूछ रही हैं, याद सिर्फ एक दिन क्यों?

पटना सिटी की इन तस्वीरों में एक तरफ फूलों की दुकानें हैं, दूसरी तरफ कचरा और बोरियां; कहीं नीला ड्रम है तो कहीं टूटी हुई प्रतिमा।

गांधी जयंती पर माल्यार्पण के बीच ये दृश्य यह सवाल जरूर खड़ा करते हैं कि बापू का सम्मान सिर्फ एक दिन का आयोजन है या पूरे साल निभाई जाने वाली जिम्मेदारी?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कम से कम इतना जरूर हो कि गांधीजी की प्रतिमाओं के आसपास गंदगी न हो, उन्हें ढका न जाए और हर दिन उनकी प्रतिमा सम्मान के साथ दिखाई दे।

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