93 साल के रामवृक्ष से कुंभिया तक... गांधी जयंती पर बिहार की जेलों से 44 रिहा, कैदियों की कमाई से 1820 परिवारों को मरहम
बिहार की जेलों में बंद कैदियों की कमाई का एक तिहाई हिस्सा पीड़ित परिवारों को दिया जा रहा है, जिसके ...और पढ़ें

गांधी जयंती पर बिहार की जेलों से 44 बंदियों की रिहाई
HighLights
कैदियों की कमाई से 1820 पीड़ित परिवारों को 3.86 करोड़ रुपये।
गांधी जयंती पर बिहार की जेलों से 44 कैदियों की रिहाई।
मुजफ्फरपुर जेल ने पीड़ितों के लिए सर्वाधिक राशि जुटाई।
कुमार रजत, पटना। जेल में बंद सजायाफ्ता कैदी पीड़ित परिवारों का दुख तो नहीं बांट सकते, मगर अपनी कमाई का एक हिस्सा जरूर बांट रहे हैं। बिहार के 1820 पीड़ित परिवारों के बीच कैदियों की एक तिहाई कमाई से जमा तीन करोड़ 86 लाख रुपये शुक्रवार को गांधी जयंती के मौके पर वितरित किए जाएंगे।
बिहार की जेलों में कैदियों की मेहनत, पीड़ितों के खातों में राहत
हर कैदी अपनी कमाई का एक तिहाई हिस्सा उस पीड़ित परिवार को दे रहा है, जिसके स्वजन की हत्या, अपहरण, दहेज उत्पीड़न या अन्य अपराध में वह जेल की सजा काट रहा है। संबंधित जिलाधिकारी के माध्यम से यह राशि सीधे पीड़ित परिवारों के बैंक खाते में भेजी जाएगी।
मुजफ्फरपुर ने जुटाए सबसे ज्यादा 59.41 लाख
सबसे अधिक राशि जमा करने वाले केंद्रीय कारागारों में मुजफ्फरपुर 59.41 लाख रुपये के साथ सबसे आगे है। बक्सर सेंट्रल जेल से 44.87 लाख और पूर्णिया से 36.49 लाख रुपये जमा किए गए हैं।
चनिया देवी को 1.69 लाख, पांच पीड़ितों को सबसे ज्यादा राहत
अपने स्वजन की हत्या का दंश झेल रहीं चनिया देवी को सर्वाधिक एक लाख 69 हजार रुपये मिलेंगे। सरस्वती देवी को एक लाख 64 हजार, कुढ़न देवी को एक लाख 48 हजार, मीना देवी को एक लाख 32 हजार और सोना बान खातून को एक लाख पांच हजार रुपये दिए जाएंगे।
बिहार की जेलों में बन रहा फर्नीचर, तैयार हो रहा मसाला
कैदी जेलों में फर्नीचर बनाने, बागवानी और खाना बनाने के साथ मसाला, तेल और सत्तू जैसे उत्पाद तैयार करते हैं। कई जेलों में प्रिंटिंग प्रेस का काम भी कैदी संभालते हैं। इसके बदले उन्हें श्रम संसाधन विभाग की तय दर के अनुसार पारिश्रमिक मिलता है।
कमाई का तिहाई हिस्सा पीड़ितों के नाम
कैदियों के पारिश्रमिक का एक तिहाई हिस्सा अपराध पीड़ित कल्याण न्यास में जमा होता है। इसी न्यास में जमा तीन करोड़ 86 लाख रुपये अब बिहार के 1820 पीड़ित परिवारों के बीच बांटे जा रहे हैं।
गांधी जयंती पर बिहार की जेलों से 44 बंदियों की रिहाई
गांधी जयंती के अवसर पर राज्य की जेलों में वर्षों से बंद 44 कैदियों को मुक्त किया जाएगा। 65 वर्ष से अधिक उम्र के वृद्ध, बीमार और न्यूनतम 14 वर्ष की सजा पूरी कर चुके कैदियों को मानवीय दृष्टिकोण के आधार पर रिहाई दी जा रही है।
93 साल के रामवृक्ष से 21 साल से बंद कुंभिया तक
रिहा होने वालों में सबसे बुजुर्ग 93 वर्षीय रामवृक्ष कोइरी हैं, जो बक्सर सेंट्रल जेल में बंद हैं। करीब साढ़े 17 वर्ष की सजा काट चुके रामवृक्ष के अलावा 19 वर्षों से बंद योगेश्वर यादव व हरिवंश राम (84), 18 वर्ष नौ माह से बंद सत्यनारायण राम (83) और 16 वर्षों से बंद सत्यनारायण सिंह (83) भी मुक्त होंगे। 21 साल से जेल में बंद महिला कैदी कुंभिया देवी भी रिहा होंगी।
सबसे अधिक राशि बांटने वाले जेल
| सेंट्रल जेल | कैदियों से जमा राशि |
| मुजफ्फरपुर | 59.41 लाख |
| बक्सर | 44.87 लाख |
| पूर्णिया | 36.49 लाख |
सबसे अधिक राशि पानी वाली पीडि़ता
| चनिया देवी | 1.69 लाख |
| सरस्वती देवी | 1.64 लाख |
| कुढ़न देवी | 1.48 लाख |
| मीना देवी | 1.32 लाख |
| सोना बान खातून | 1.05 लाख |
