पटना [जेएनएन]। दानापुर मंडल के प्रमुख स्टेशन पटना जंक्शन एवं पाटलिपुत्र स्टेशन को अब नए लुक में विकसित करने की योजना है। दोनों स्टेशनों के स्ट्रक्चर में बहुत छेड़छाड़ किए बगैर सामने के लुक को पूरी तरह बदलते हुए इसे नया लुक देने की कोशिश की जाएगी।

दोनों स्टेशनों को विकसित करने में 'पीस थ्रू स्ट्रेंथ की थीम को ध्यान में रखा जाएगा। शांति के साथ शक्ति के प्रतीक को दर्शाने की कोशिश की जाएगी। दोनों स्टेशनों को विकसित कर नए लुक देने के लिए डिजाइनिंग की पूरी जिम्मेदारी पटना के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना (एनआइटी) के शिक्षकों व छात्रों की टीम को सौंपी गयी है। 31 दिसंबर तक नए लुक देने का काम पूरा कर लेना है। इसके लिए तिथि निर्धारित कर दी गई है।

बौद्ध स्तूप का दिखेगा रूप 

बिहार को बौद्ध व जैन धर्म की धरती के रूप में भी जाना जाता है। पाटलिपुत्र स्टेशन व पटना जंक्शन को बौद्ध स्तूप के साथ ही वैशाली के वियतनामी मंदिर की शक्ल देने की कोशिश की जाएगी। बोधगया, राजगीर व वैशाली के साथ ही पावापुरी के मंदिरों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।

जिस तरह शांति के प्रतीक स्तूप का निर्माण किया जाता था उसी तरह पाटलिपुत्र स्टेशन को सामने से स्तूप की शक्ल देने की कोशिश की जाएगी। शक्ति के प्रतीक के रूप में सिंह के साथ स्तंभ को भी ध्यान में रखा जाएगा। 

पटना जंक्शन के अग्रिम भाग को स्तूप की शक्ल देते हुए वैशाली के लिच्छवी गणराज्य के समय के वियतनामी मंदिर की शक्ल भी देने की कोशिश की जाएगी। यहां की आंतरिक दीवारों पर पहले से ही मधुबनी पेंटिंग कर बिहार की कला को जीवित रखने की कोशिश की गई है।

जंक्शन के सारे प्लेटफार्म को इसी तर्ज पर विशेष रूप से विकसित किया जाएगा। पाटलिपुत्र स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर बौद्धकाल के छोटे-छोटे डिजाइन को बनाया जाएगा। उसी को शेड का रूप भी दिया जाएगा। 

पटना जंक्शन व पाटलिपुत्र स्टेशन को 'पीस थ्रू स्ट्रेंथ की थीम पर नए लुक देने की कोशिश की जा रही है। दोनों स्टेशनों के सामने के हिस्से को बौद्ध कालीन कला के साथ ही आधुनिक भारत की कला से विकसित करने की कोशिश की जा रही है। इसके डिजाइन बनाने की जवाबदेही एनआइटी को दी गई है। इस माह के अंत तक डिजाइन बनाने का काम पूरा कर लिया जाएगा। 

- रंजन प्रकाश ठाकुर, डीआरएम, दानापुर।  

Posted By: Kajal Kumari

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