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'कम उम्र की गलती का दाग जिंदगी भर नहीं', पटना हाई कोर्ट ने 40 पौधे लगाने वाले अभ्यर्थी को दी राहत

Published: Tue, 13 Oct 2026 07:18 PM (IST)

पटना हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किशोरावस्था में हुई गलती के लिए किसी व्यक्ति को जीवन भर अपराधी का ठप्पा लगाकर नहीं रखा जा सकता।

पटना हाई कोर्ट का अहम फैसला: किशोरावस्था की गलती पर नहीं लगेगा जिंदगी भर अपराधी का ठप्पा (AI Generated Image)

पटना हाई कोर्ट का अहम फैसला: किशोरावस्था की गलती पर नहीं लगेगा जिंदगी भर अपराधी का ठप्पा (AI Generated Image)

HighLights

  1. किशोरावस्था की गलती पर जीवन भर अपराधी नहीं।

  2. सिपाही का चयन रद्द करने का आदेश निरस्त।

  3. अधिकारियों को मामले पर पुनर्विचार का निर्देश।

विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि कम उम्र में हुई गलती के लिए किसी व्यक्ति को जिंदगी भर अपराधी का ठप्पा लगाकर नहीं रखा जाना चाहिए।

अदालत ने बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस में सिपाही के पद पर चयन रद करने के आदेश को निरस्त करते हुए अधिकारियों को पूरे मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है।

न्यायाधीश पार्थ सारथी की एकलपीठ ने गोपालगंज निवासी राहुल कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।

अदालत ने कमांडेंट, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-6, मुजफ्फरपुर द्वारा एक अगस्त 2025 को पारित आदेश को रद कर दिया। अधिकारियों को हाई कोर्ट की टिप्पणियों के आलोक में चार महीने के भीतर नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया है।

मामले के अनुसार, राहुल कुमार ने बिहार पुलिस में सिपाही भर्ती के लिए आयोजित लिखित और शारीरिक परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके बाद एक जून 2025 को उसने बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-6 में योगदान दिया।

हालांकि, चरित्र सत्यापन के दौरान वर्ष 2016 के एक आपराधिक मामले का खुलासा हुआ। आवेदन और सत्यापन प्रपत्र में आपराधिक मामले की जानकारी नहीं देने के आधार पर उसका चयन रद कर दिया गया था।

हाई कोर्ट ने पाया कि संबंधित घटना के समय याचिकाकर्ता किशोर था। किशोर न्याय बोर्ड ने 17 अक्टूबर 2025 को मामले का निपटारा करते हुए उसे 40 पौधे लगाने और एक महीने तक उनकी देखभाल करने का निर्देश दिया था। बोर्ड ने उसके परिवार की पृष्ठभूमि और आचरण पर भी विचार किया था।

सुप्रीम कोर्ट के अवतार सिंह बनाम भारत संघ और रवींद्र कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के फैसलों का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने के हर मामले को स्वतः अयोग्यता का आधार नहीं बनाया जा सकता।

नियुक्ति रद करने से पहले मामले के तथ्यों, आरोपों की गंभीरता और अभ्यर्थी की उम्र सहित सभी पहलुओं पर वस्तुनिष्ठ विचार आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले के विशेष तथ्यों को देखते हुए चयन रद करने के आदेश पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए।

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