बिहार टेंडर घोटाले में असली सूत्रधार कौन? हाईकोर्ट ने ED-SVU से मांगा जवाब, 6 बड़े अफसरों की भूमिका पर सवाल
पटना हाईकोर्ट ने बिहार में सरकारी टेंडर घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल ...और पढ़ें

पटना हाईकोर्ट ने जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर उठाए सवाल।
HighLights
हाईकोर्ट ने जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
ईडी से 6 वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट करने को कहा।
अदालत ने कहा, याचिकाकर्ता महज एक मोहरा है।
विधि संवाददाता, पटना। बिहार में सरकारी टेंडरों में कथित हेराफेरी और करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पटना हाईकोर्ट ने जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
न्यायाधीश सत्यव्रत वर्मा की एकलपीठ ने कहा कि ईडी की ओर से दी गई जानकारी के बावजूद छह वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की भूमिका की जांच और उन्हें आरोपित बनाने के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ लोगों को बचाने और कुछ को फंसाने की कोशिश की जा रही है, जबकि कानून सबके लिए समान है।
'याचिकाकर्ता महज एक मोहरा'
ऋषु श्री की अग्रिम ज़मानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि ईडी याचिकाकर्ता को सरकारी टेंडरों में हेराफेरी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का मुख्य सूत्रधार बता रही है।
लेकिन उपलब्ध तथ्यों से अदालत को ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता महज एक मोहरा है और असली सूत्रधार पर्दे के पीछे हैं।
अदालत के अनुसार, ईडी ने अपने जवाब में बताया है कि उसने 6 वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के खिलाफ विश्वसनीय जानकारी साझा की थी, जिसके बाद तीन अधिकारियों, मुमुक्षु चौधरी, तरणी दास और उमेश कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई।
SVU के एडीजी को पक्षकार बनाने का निर्देश
हालांकि, अन्य अधिकारियों की भूमिका और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होने के कारण स्पष्ट नहीं हैं। हाईकोर्ट ने विशेष निगरानी इकाई (SVU) के अपर पुलिस महानिदेशक को मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है।
अदालत ने उनसे शपथपत्र दाखिल कर स्पष्ट करने को कहा है कि ईडी द्वारा छह वरिष्ठ अधिकारियों के नाम साझा किए जाने के बावजूद सभी को संबंधित प्राथमिकी में आरोपित क्यों नहीं बनाया गया और जांच के दौरान उनकी भूमिका को लेकर क्या तथ्य सामने आए।
'अन्य अधिकारियों को समन क्यों नहीं'
अदालत ने ईडी के जवाब को कुछ महत्वपूर्ण सवालों पर टालमटोल वाला माना। साथ ही, यह भी सवाल उठाया कि यदि जांच के दौरान अन्य अधिकारियों के नाम सामने आए थे, तो उनसे पूछताछ के लिए समन जारी क्यों नहीं किए गए।
मामले में याचिकाकर्ता न्यायिक हिरासत में है। अदालत ने एसवीयू को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को दोपहर तीन बजे निर्धारित की है।
