32 साल बाद रेगुलर करने पर घटा दिया वेतन, पटना हाईकोर्ट ने जल संसाधन विभाग के आदेश को किया रद
पटना हाईकोर्ट ने जल संसाधन विभाग के एक कर्मचारी को चार दशक की सेवा के बाद भी नया नियुक्त मानने के आदेश को रद्द कर दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर
HighLights
कर्मचारी को चार दशक सेवा के बाद भी नया नियुक्त माना गया।
पटना हाईकोर्ट ने विभागीय आदेश को रद्द करने का निर्देश दिया।
वेतन संरक्षण और पेंशन लाभों पर तीन माह में निर्णय होगा।
विधि संवाददाता, पटना। चार दशक तक सरकारी विभाग में सेवा देने के बावजूद एक कर्मचारी को नियमितीकरण के समय नया नियुक्त कर्मचारी मानना राज्य सरकार को भारी पड़ा।
पटना हाईकोर्ट ने दैनिक वेतन पर वर्ष 1980 से काम कर रहे बिपिन कुमार वर्मा के मामले में विभागीय आदेशों को रद करते हुए उनके वेतन संरक्षण और पेंशन समेत सेवानिवृत्ति लाभ पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया है।
न्यायाधीश कुमार मनीष की एकलपीठ ने विभाग को तीन माह के भीतर कारणयुक्त निर्णय लेने को कहा है। मामला जल संसाधन विभाग, समस्तीपुर में टाइपिस्ट के पद पर दैनिक वेतन पर नियुक्त बिपिन कुमार वर्मा से जुड़ा है। उन्होंने वर्ष 1980 से लगातार विभाग में काम किया।
करीब 32 वर्ष की सेवा के बाद वर्ष 2012 में उन्हें निम्नवर्गीय लिपिक के पद पर नियमित किया गया। लेकिन विभाग ने नियमितीकरण के बावजूद उन्हें नया नियुक्त कर्मचारी मान लिया। इसका सीधा असर उनके वेतन पर पड़ा और उनका वेतन 9840 रुपये से घटकर 7730 रुपये हो गया।
नवंबर 2019 में सेवानिवृत्त होने के बाद वर्मा ने अपने वेतन संरक्षण और पेंशन सहित अन्य सेवानिवृत्ति लाभ की मांग की। उनका कहना था कि लंबे समय तक की गई सेवा को नजरअंदाज कर उन्हें नए कर्मचारी के रूप में नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि उसी विभाग में वर्मा से कनिष्ठ कई कर्मचारियों को वर्ष 1988 से काल्पनिक नियमितीकरण का लाभ दिया गया था। ऐसे में उनके मामले में अलग व्यवस्था किए जाने पर अदालत ने सवाल उठाया।
अदालत ने संबंधित आदेशों को निरस्त करते हुए विभाग को वर्मा के वेतन संरक्षण, पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ के दावे पर तीन माह के भीतर नया और कारणयुक्त निर्णय लेने का निर्देश दिया।
