'सरकारी ड्यूटी' के दौरान लगे आरोपों पर एक्शन नहीं, पटना HC ने कहा- बिना अनुमति नहीं चलेगा क्रिमिनल केस
पटना हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि सरकारी अधिकारियों के आधिकारिक कर्तव्य से जुड़े कथित अपराधों के लिए मुकदमा चलाने हेतु पूर्व अनुमति आवश्यक है।

'सरकारी ड्यूटी' के दौरान लगे आरोपों पर एक्शन नहीं, पटना HC ने कहा- बिना अनुमति नहीं चलेगा क्रिमिनल केस
HighLights
सरकारी अधिकारी के खिलाफ मुकदमे को पूर्व मंजूरी आवश्यक।
पटना हाई कोर्ट ने संज्ञान आदेश को रद्द किया।
आरोप आधिकारिक कर्तव्य से जुड़े थे, व्यक्तिगत नहीं।
विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट (Patna High Court News) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सरकारी अधिकारी के आधिकारिक कर्तव्य के निर्वहन से जुड़े कथित अपराध के मामले में कानून के तहत आवश्यक पूर्व मंजूरी के बिना आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
न्यायाधीश राणा विक्रम सिंह की एकलपीठ ने बिहार राज्य खाद्य निगम के तत्कालीन जिला प्रबंधक हरेंद्र नाथ दुबे के खिलाफ जारी संज्ञान आदेश को रद कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि अधिकारी के विरुद्ध लगाए गए आरोप उनके आधिकारिक कार्यों से जुड़े थे और शिकायत में उनकी व्यक्तिगत आपराधिक भूमिका का कोई स्पष्ट आरोप नहीं था।
मामला गया जिले की कुमार राइस मिल से जुड़ा है। मिल मालिक धीरेंद्र कुमार सिंह पर बिहार राज्य खाद्य निगम के साथ हुए समझौते के तहत चावल की निर्धारित मात्रा वापस नहीं करने का आरोप था।
इस संबंध में निगम की ओर से वर्ष 2013 में आमस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद मिल मालिक के भाई दीपक कुमार सिंह ने शिकायत दर्ज कराई कि 9 दिसंबर 2013 को तत्कालीन जिला प्रबंधक हरेंद्र नाथ दुबे समेत अन्य आरोपित मिल परिसर पहुंचे, ताला तोड़कर चावल ले गए तथा मारपीट और दुर्व्यवहार किया।
शिकायत पर शेरघाटी के अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी ने 20 दिसंबर 2015 को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में संज्ञान लेते हुए आरोपितों को अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया था।
हाई कोर्ट ने रिकार्ड पर उपलब्ध तथ्यों का परीक्षण करते हुए पाया कि हरेंद्र नाथ दुबे सक्षम प्राधिकारी के निर्देश पर गठित उस सरकारी टीम के सदस्य थे, जिसने मिल परिसर में रखे धान-चावल का सत्यापन, सूची तैयार करने और जब्ती की कार्रवाई की थी। अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की प्रशासनिक जांच में भी आरोपों की पुष्टि नहीं हुई थी।
