1 बच्ची, 2 'पिता': कस्टडी विवाद में पटना हाई कोर्ट सख्त, अब DNA टेस्ट से होगा असली बाप का फैसला
पटना हाई कोर्ट ने नाबालिग बच्ची की अभिरक्षा मामले में सख्त रुख अपनाते हुए उसे मधुबनी के बाल देखरेख गृह ...और पढ़ें

कस्टडी विवाद में पटना हाई कोर्ट सख्त, अब DNA टेस्ट से होगा असली बाप का फैसला (AI Generated Image)
HighLights
नाबालिग बच्ची को मधुबनी बाल देखरेख गृह में रखने का आदेश।
बच्ची और दोनों दावेदारों का डीएनए परीक्षण कराने का निर्देश।
अदालत ने पितृत्व के दावे पर गंभीर संदेह व्यक्त किया।
विधि संवाददाता, पटना। नाबालिग बच्ची की अभिरक्षा को लेकर दायर अर्जी पर पटना हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए बच्ची को मधुबनी स्थित बाल देखरेख गृह में रखने का आदेश दिया है।
साथ ही बच्ची और उस पर दावा करने वाले दोनों व्यक्तियों का डीएनए परीक्षण कराने का निर्देश दिया है। न्यायाधीश राजीव रंजन प्रसाद और न्यायाधीश सुनील दत्त मिश्रा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।
मामले में एक व्यक्ति ने पहले बच्ची को अपनी बेटी बताया। हालांकि, अभिलेख पर मौजूद सामग्री को देखते हुए अदालत ने उसके दावे पर गंभीर संदेह जताया।
डीएनए जांच की बात सामने आने पर उसने बाद में अपना रुख बदलते हुए कहा कि मृतका पूजा कुमारी से उसका वर्ष 2014 में विवाह हुआ था, लेकिन चार-पांच महीने बाद उसकी शादी दूसरे व्यक्ति से हो गई थी और वह स्वयं भी बच्ची के पितृत्व को लेकर असमंजस में है।
दूसरे दावेदार ने बताया कि उसका विवाह पूजा कुमारी से 22 अप्रैल 2015 को हुआ था और बच्ची का जन्म 8 फरवरी 2016 को हुआ। जन्म प्रमाणपत्र में भी बच्ची को दोनों की संतान बताया गया है। उसने बच्ची के नाम सुकन्या समृद्धि योजना में हर वर्ष 1.50 लाख रुपये जमा करने और खाते में करीब 11 लाख रुपये होने का दस्तावेज भी पेश किया।
अदालत ने प्रथमदृष्टया पाया कि बच्ची को अपने पास रखने वाले व्यक्ति के वैध पति होने के दावे के समर्थन में कोई विवाह प्रमाणपत्र नहीं है।
हाई कोर्ट ने बच्ची को मधुबनी के चाइल्ड केयर होम में बाल कल्याण समिति की देखरेख में रखने का आदेश दिया। अदालत ने मधुबनी के जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को बच्ची एवं दोनों दावेदारों का डीएनए परीक्षण जल्द कराने और रिपोर्ट हाई कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई एक अक्टूबर को होगी।
