नवजात गायब मामले में पटना हाई कोर्ट का एक्शन, 3 साल की देरी पर फूटा गुस्सा; थानाध्यक्ष को SIT से हटाने का आदेश
पटना हाई कोर्ट ने नालंदा में नवजात के गायब होने के मामले में पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई ...और पढ़ें

पटना हाई कोर्ट
HighLights
पटना हाईकोर्ट ने नवजात गायब होने पर पुलिस को फटकारा।
प्राथमिकी दर्ज करने में दो महीने की देरी पर जताई चिंता।
थानाध्यक्ष को SIT से हटाने और सुरक्षा देने का आदेश।
विधि संवाददाता, पटना। नालंदा के एक अस्पताल से नवजात के गायब होने के मामले में पटना हाई कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे के गायब होने की सूचना के बाद प्राथमिकी दर्ज करने में दो महीने की देरी से उसकी तलाश का सबसे महत्वपूर्ण समय निकल जाता है।
न्यायालय ने मामले में पुलिस के साथ-साथ नालंदा जिला प्रशासन के रवैये को भी “संवेदनहीनता का ज्वलंत उदाहरण” बताया।
थानाध्यक्ष सम्राट दीपक को SIT से हटाने का निर्देश
न्यायालय ने बिहार थाना के थानाध्यक्ष सम्राट दीपक को विशेष जांच दल (SIT) से हटाकर दूसरी जगह भेजने का निर्देश दिया। कोर्ट ने नवजात के परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने को भी कहा है।
साथ ही धमकी देकर समझौता कराने या मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाने वालों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।
एक साल में 14,500 से ज्यादा बच्चों के लापता होने पर चिंता
न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ ने अविनाश कुमार की आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान जांच की प्रगति रिपोर्ट देखी।
कोर्ट ने बिहार में बच्चों के लापता होने के आंकड़ों पर भी गंभीर चिंता जताई। सुनवाई में बताया गया कि एक साल में 14,500 से अधिक बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट सामने आई है।
अस्पताल में भर्ती 36 बच्चों की हुई जांच
जांच में सामने आया कि 23 मार्च से 11 अप्रैल 2023 के बीच नवजीवन शिशु अस्पताल में कुल 36 बच्चे भर्ती हुए थे। इनमें से 34 बच्चों के परिवारों का सत्यापन किया जा चुका है।
एफएसएल रिपोर्ट मिलने के बाद अस्पताल का लाइसेंस रद करने की कार्रवाई भी की गई है। पुलिस को आशंका है कि नवजात बच्चों को उठाकर बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह की भूमिका हो सकती है और संदिग्ध दलालों की भी जांच चल रही है।
पिता ने लगाया दो महीने तक दौड़ाने का आरोप
सुनवाई के दौरान नवजात के पिता ने आरोप लगाया कि प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए उन्हें करीब दो महीने तक पुलिस के चक्कर लगाने पड़े।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डीएनए जांच के दौरान उन्हें मामले में 10 साल तक फंसाने की धमकी दी गई। हाईकोर्ट ने नालंदा एसपी को इन आरोपों की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने का निर्देश दिया।
‘लापता बच्चे के मामले में तुरंत संवेदनशीलता से हो कार्रवाई’
कोर्ट ने कहा कि लापता बच्चे के मामले में पुलिस को तत्काल और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए। प्राथमिकी दर्ज करने में देरी और शुरुआती जांच में लापरवाही से बच्चे की तलाश की संभावनाएं प्रभावित होती हैं।
न्यायालय ने बिहार पुलिस में थानों की कमान संवेदनशील अधिकारियों को देने और उनकी मानसिकता की जांच के बाद तैनाती पर भी जोर दिया।
6 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
पटना हाईकोर्ट ने मामले की जांच और पुलिस की कार्रवाई पर आगे भी निगरानी जारी रखने के संकेत दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी। उस दिन जांच की प्रगति और कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन की स्थिति सामने रखी जाएगी।
