बिहार सरकार को झटका: रिटायर्ड कर्मचारी को मिलेगा तीसरा MACP, हाई कोर्ट ने रद किया विभागीय आदेश
पटना हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी को तीसरे एमएसीपी का लाभ देने से इनकार करने वाले राज्य सरकार के आदेश को रद कर दिया है।
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रिटायर्ड कर्मचारी को मिलेगा तीसरा MACP, हाई कोर्ट ने रद किया विभागीय आदेश
HighLights
हाई कोर्ट ने तीसरे एमएसीपी से इनकार का आदेश रद्द किया।
विभागीय परीक्षा एमएसीपी के वित्तीय लाभ की शर्त नहीं।
राज्य सरकार को तीन माह में मौद्रिक लाभ देने का निर्देश।
विधि संवाददाता, पटना। पटना हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी को तीसरे वित्तीय उन्नयन (तीसरा एमएसीपी) का लाभ देने से इनकार करने वाले राज्य सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायाधीश कुमार मनीष की एकलपीठ ने कहा कि विभागीय लेखा परीक्षा पास करना एमएसीपी के वित्तीय लाभ के लिए पूर्व शर्त नहीं है।
अदालत ने संबंधित कर्मचारी को सभी परिणामी मौद्रिक लाभ देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। मामला रथिंद्र कुमार बोस बनाम बिहार सरकार एवं अन्य से जुड़ा है।
याचिकाकर्ता की नियुक्ति 12 फरवरी 1972 को बिहार सरकार के पीडब्ल्यूडी में जूनियर अकाउंट्स क्लर्क के पद पर हुई थी। बाद में उनकी सेवा एनएच विंग में चली गई। उन्हें दूसरा एसीपी/एमएसीपी 26 नवंबर 2009 से दिया गया था।
इसके बाद 31 जनवरी 2012 को वह सेवानिवृत्त हो गए। तीसरे एमएसीपी की मांग को लेकर उनके अभ्यावेदन पर कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
राज्य सरकार का तर्क था कि तीसरा एमएसीपी दूसरे एमएसीपी के 10 वर्ष बाद ही मिल सकता है। चूंकि दूसरा एमएसीपी 26 नवंबर 2009 से प्रभावी था, इसलिए तीसरा एमएसीपी 26 नवंबर 2019 से ही देय होता, जबकि याचिकाकर्ता इससे पहले सेवानिवृत्त हो चुके थे। सरकार ने यह भी कहा कि दूसरे एमएसीपी में देरी विभागीय परीक्षा पास नहीं करने के कारण हुई थी।
हाई कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि विभागीय लेखा परीक्षा पास करना वित्तीय उन्नयन की अनिवार्य शर्त नहीं है।
अदालत ने पूर्व के फैसलों और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि एसीपी/एमएसीपी का उद्देश्य लंबे समय तक पदोन्नति के अवसर नहीं मिलने से होने वाली सेवा-गत ठहराव की स्थिति को दूर करना है। यह केवल वित्तीय उन्नयन है, कार्यात्मक पदोन्नति नहीं।
अदालत ने माना कि दूसरे एमएसीपी को विभागीय परीक्षा से छूट मिलने की तारीख से प्रभावी मानना कानूनन गलत था। इसलिए 23 फरवरी 2018 का स्क्रीनिंग कमेटी का आदेश निरस्त कर दिया गया।
राज्य सरकार को याचिकाकर्ता को पहले एमएसीपी की तारीख से वास्तविक मौद्रिक लाभ सहित सभी परिणामी लाभ तीन महीने के भीतर देने का निर्देश दिया गया है। याचिका स्वीकार कर ली गई।
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