टेंडर घोटाले में ED से पटना हाई कोर्ट के 16 सवाल, पूछा- रिशुश्री को किस आधार पर बनाया आरोपी?
पटना हाईकोर्ट ने सरकारी टेंडरों में हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्यशैली पर सवाल उठाए ...और पढ़ें

पटना हाईकोर्ट
HighLights
पटना हाईकोर्ट ने ईडी की कार्यशैली पर उठाए सवाल।
अदालत ने आरोपी रिशुश्री मामले में ईडी से 16 सवाल पूछे।
ईडी को चार सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश।
विधि संवाददाता,पटना। बिहार में सरकारी टेंडरों में हेरफेर और मनी लान्ड्रिंग से जुड़े मामले में पटना हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। न्यायाधीश सत्यव्रत वर्मा की एकल पीठ ने आरोपी रिशुश्री की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए ईडी से 16 सवाल पूछे हैं। अदालत ने एजेंसी को चार सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
बिहार क्षेत्र के संयुक्त निदेशक को देना होगा हलफनामा
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि शपथ पत्र ईडी के बिहार क्षेत्र के संयुक्त निदेशक द्वारा ही दाखिल किया जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3:30 बजे होगी।
अदालत के सवालों का केंद्र यह है कि शुरुआती जांच में आरोपी नहीं रहे रिशुश्री के खिलाफ बाद में ऐसे कौन से साक्ष्य सामने आए, जिनके आधार पर कार्रवाई की गई।
टेंडर में कमीशन और मैनेजमेंट के आरोप
याचिकाकर्ता ऋषुश्री मेसर्स रिलाएबल इंफ्रा सर्विस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक हैं। उन पर पूर्व आईएएस अधिकारी संजीव हंस व अन्य के साथ मिलकर जल संसाधन विभाग के टेंडरों में 2 से 3.5 प्रतिशत तक कमीशन लेने और टेंडर मैनेज करने के आरोप हैं।
उनके अधिवक्ताओं ने अदालत में कहा कि उनसे जबरन बयानों पर हस्ताक्षर कराए गए और ईसीआईआर की प्रति भी उपलब्ध नहीं कराई गई।
ईडी से कोर्ट का अहम सवाल- पहले आरोपी क्यों नहीं बनाया?
अदालत ने पूछा कि जब शुरुआती एफआईआर में याचिकाकर्ता आरोपी नहीं था तो ईसीआईआर-4 की जांच के दौरान ऐसा क्या साक्ष्य मिला, जिसके आधार पर 16 जुलाई 2024 को उसके घर और कंपनी पर छापेमारी की गई।
कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि जुलाई से अक्टूबर 2024 के बीच दर्ज बयानों में याचिकाकर्ता ने जब्त मोबाइल और सेल डीड के संबंध में क्या बताया था।
2024 में नाम नहीं, 2025 में नया केस कैसे?
हाईकोर्ट ने पूछा कि 20 अगस्त 2024 को ईडी द्वारा जानकारी साझा किए जाने के बाद दर्ज स्पेशल विजिलेंस केस में रिशुश्री को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया।
20 सितंबर 2024 के ऐडेंडम में भी नाम शामिल नहीं होने पर कोर्ट ने सवाल किया कि उस समय एजेंसी के पास साक्ष्य नहीं था या विजिलेंस की कार्रवाई पर कोई आपत्ति दर्ज कराई गई थी।
टेंडर फिक्सिंग में दूसरे अधिकारियों की भी जांच हुई?
अदालत ने यह भी पूछा कि टेंडर फिक्सिंग में किन अज्ञात अधिकारियों ने मदद की और क्या ईडी ने उनकी भूमिका की जांच की।
कोर्ट ने यह जानना चाहा कि पीएमएलए की धारा 66 के तहत भेजी गई जानकारी में संजीव हंस के अलावा अन्य अधिकारियों के नाम थे या नहीं और यदि उन्हें एफआईआर में आरोपी नहीं बनाया गया तो क्या ईडी ने इस पर आपत्ति जताई थी।
अदालत द्वारा ईडी से पूछे गए प्रमुख सवाल
- जब याचिकाकर्ता शुरुआती एफआईआर में आरोपी नहीं था, तो ईसीआईआर -4 की जांच के दौरान ऐसे क्या साक्ष्य मिले कि 16 जुलाई 2024 को उसके घर और कंपनी पर छापेमारी की गई?
- जुलाई से अक्टूबर 2024 के बीच दर्ज बयानों में याचिकाकर्ता ने घर से जब्त मोबाइल और सेल डीड (बिक्री पत्रों) पर क्या खुलासा किया था?
- ईडी द्वारा 20 अगस्त 2024 को जानकारी साझा किए जाने के बाद दर्ज स्पेशल विजिलेंस केस (05/2024) में याचिकाकर्ता को आरोपी क्यों नहीं बनाया गया?
- दर्ज बयानों के बावजूद 20 सितंबर 2024 को ईडी द्वारा जारी ऐडेंडम में याचिकाकर्ता का नाम आरोपी के रूप में क्यों शामिल नहीं था?
- क्या 20 सितंबर 2024 तक ईडी के पास कोई साक्ष्य नहीं था, या ईडी ने विजिलेंस से याचिकाकर्ता को आरोपी न बनाने पर कोई आपत्ति दर्ज कराई थी?
- यदि याचिकाकर्ता के खिलाफ सबूत मौजूद थे, तो उसे ऐडेंडम में आरोपी क्यों नहीं बनाया गया?
- याचिकाकर्ता ने 21 सितंबर और 1 अक्टूबर 2024 के बयानों में क्या बताया, जिसके आधार पर 25 फरवरी 2025 को जानकारी साझा कर नया केस (एसयूवी 05/2025) दर्ज हुआ?
- टेंडर फिक्सिंग में किन अज्ञात अधिकारियों ने मदद की, क्या ईडी ने उनकी जांच की या इसमें सिर्फ पूर्व आईएएस संजीव हंस ही शामिल थे?
- क्या धारा 66 पीएमएलए के तहत भेजी गई जानकारी में संजीव हंस के अलावा अन्य अधिकारियों के नाम थे, और यदि उन्हें एफआईआर में छोड़ा गया तो क्या ईडी ने कोई आपत्ति जताई?
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