पटना के CA का 457 करोड़ का खेल: 6 कंपनियों और NRI के नाम पर विदेश भेजी रकम, EOU ने खोली जांच की फाइल
पटना के चार्टर्ड अकाउंटेंट गौरव गुंजन पर आधा दर्जन कंपनियों के नाम पर अवैध रूप से 457 करोड़ रुपये विदेश ...और पढ़ें

बिना दस्तावेज जांचे जारी किए 15CB सर्टिफिकेट
HighLights
सीए गौरव गुंजन पर 457 करोड़ रुपये विदेश भेजने का आरोप।
बिना जांच के फॉर्म 15सीबी प्रमाणित कर फर्जीवाड़ा किया।
आर्थिक अपराध इकाई ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की।
राज्य ब्यूरो, पटना। राजधानी के दानापुर के रहने वाले चार्टेड अकाउंटेंट (सीए) गौरव गुंजन पर अवैध तरीके से देश के अलग-अलग शहरों की आधा दर्जन कंपनियों के नाम पर करीब 457 करोड़ रुपये विदेश भेजने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
आयकर विभाग की जांच में यह मामला सामने आया है, जिसके बाद आयकर विभाग के असिस्टेंट डायरेक्टर (अनुसंधान) प्रिंस बाबू मिश्रा की शिकायत पर बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ईओयू के अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) प्रतेन्द्र भारती को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्राथमिकी के अनुसार, सीए गौरव ने जरूरी दस्तावेजों की बिना समुचित जांच किए विदेश भेजने के लिए जरूरी फार्म 15सीबी को प्रमाणित किया और सर्टिफिकेट जारी किए।
बिना दस्तावेज जांचे जारी किए 15CB सर्टिफिकेट
आयकर विभाग का दावा है कि इस तरीके से वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच करीब 457 करोड़ रुपये की राशि विदेश भेजी गई।
इसमें मुंबई, लखनऊ, बेंगलुरु और भुवनेश्वर की ऐसी कंपनियों के नाम पर पैसे विदेश भेजे गए हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि जिन संस्थाओं के लिए प्रमाणपत्र जारी किए गए, उनमें कई प्रथमदृष्टया फर्जी या शेल (छद्म) लग रहे हैं।
इसके अलावा इन कंपनियों की घोषित आय और भेजी गई राशि अनुपात से कहीं अधिक है। इसके बावजूद गौरव ने जालसाजी कर प्रमाणपत्र जारी किए।
इस मामले में सीए पर आयकर विभाग को गलत सूचना देकर फर्जी दस्तावेज जारी कर आपराधिक षड्यंत्र रचने धोखाधड़ी करने और देश के बाहर अवैध तरीके से रुपये भेजने का आरोप तय करते हुए प्राथमिकी दर्ज की गई है।
अगस्त में आयकर विभाग ने ली थी तलाशी
आयकर विभाग ने पिछले माह 18 अगस्त को गौरव गुंजन के ठिकानों पर तलाशी ली थी। जांच में सामने आया कि उन्होंने विदेश में धन भेजने के लिए जरूरी प्रमाणपत्र जारी किए।
विभाग के अनुसार, फार्म 15सीबी जारी करने से पहले सीए को भेजने वाले और विदेश में रकम पाने वाले पक्ष के बीच हुए समझौते, संबंधित दस्तावेज, टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट, खाते-किताब और रकम भेजने की प्रकृति की जांच करनी होती है।
आरोप है कि गौरव ने इन जरूरी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। इस दौरान सात कंपनियों के करीब 542.25 करोड़ की राशि विदेश भेजने के दस्तावेज मिले।
इसमें कुछ राशि का सत्यापन दूसरे सीए के द्वारा भी किया गया है। इस कारण करीब 457 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का मामला सीए गौरव के विरुद्ध दर्ज किया गया है। विभाग ने इसे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले वित्तीय धोखाधड़ी के मामले से जोड़ा है।
आयकर विभाग देश भर में चला रहा सत्यापन अभियान
आयकर विभाग विदेश भेजी जाने वाली राशि में गड़बड़ी की जांच के लिए देश भर में सत्यापन अभियान चला रहा है। जानकारी के अनुसार, अभी तक पटना के साथ मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, अहमदाबाद और चेन्नई जैसे कई शहरों में स्थित 394 इकाइयों और 36 पेशेवरों के विरुद्ध जांच की गई है।
इनमें 117 इकाइयां देश के सीमावर्ती राज्यों के जिलों में बताई गई हैं। जांच का मुख्य फोकस उन संस्थाओं और पेशेवरों पर है, जिनके माध्यम से बड़ी मात्रा में विदेशी रकम भेजे जाने के मामले सामने आया है।
क्या है फार्म 15सीबी
अगर भारत से किसी विदेशी कंपनी या व्यक्ति को एक वित्तीय वर्ष में पांच लाख रुपये से अधिक का भुगतान करना होता है, तो फार्म 15सीबी अनिवार्य होता है। यह फार्म सीए के द्वारा जारी किया गया प्रमाण-पत्र होता है, जिसे देखकर बैंक विदेशी भुगतान की स्वीकृति देते हैं।
इन कंपनियों के लिए जारी किया सर्टिफिकेट
| कंपनी का नाम | विदेश भेजी गई राशि |
| धर्मेश टेक्नोलाजी प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई | 9.68 करोड़ |
| जोकरप्लस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई | 195.26 करोड़ |
| इंश्योरअसिस्ट एंड टेक्नोलाजी प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलुरु | 193.52 करोड़ |
| फिल्म्स@50, मुंबई | 111.73 करोड़ |
| एवलोक्स इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड, भुवनेश्वर | 20.41 करोड़ |
| विकृताय टेक्नोयाजीज एंड मीडिया, लखनऊ | 11.33 करोड़ |
| संजीव कुमार सिंह, एनआरआइ | 31 लाख |
