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नौ साल में 69 प्रतिशत बढ़ा पटना का बिजली लोड, नवंबर में चालू होंगे 7 नए पावर सब स्‍टेशन; 15 का काम जारी

Published: Fri, 30 Oct 2026 08:43 PM (IST)

पटना में पिछले नौ वर्षों में बिजली की अधिकतम मांग में 69% की वृद्धि हुई है, जो 2026 तक 933.6 ...और पढ़ें

निर्माणाधीन दानापुर ब्लाॅक आफिस विद्युत उपकेंद्र। सौ. पेसू

निर्माणाधीन दानापुर ब्लाॅक आफिस विद्युत उपकेंद्र। सौ. पेसू 

जागरण संवाददाता, पटना। तेजी से शहरी विस्तार के साथ बिजली की मांग भी लगातार बढ़ रही है। राजधानी में नौ वर्षों में बिजली की अधिकतम मांग में 69 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

2017 में अधिकतम लोड 553 मेगावाट था, जो 2026 में बढ़कर 933.6 मेगावाट पहुंच गया। अगले साल अधिकतम लोड 1,000 मेगावाट से ऊपर जाने की संभावना है।

लगातार बढ़ रही बिजली की मांग को पूरा करने और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 15 नए विद्युत उपकेंद्र (पावर सब स्‍टेशन) का निर्माण हो रहा है।

जहां बढ़ रही मांग, उन क्षेत्रों में बन रहे पावर सब स्‍टेशन

प्रत्येक की क्षमता 20 MVA (मेगा वोल्ट एम्पियर) होगी। इससे बिजली व्यवस्था अधिक स्थिर, आधुनिक और लोड प्रबंधन में सक्षम बनेगी।

नए विद्युत उपकेंद्र का निर्माण उन क्षेत्रों में हो रहा, जहां विकास कार्य तेजी से हो रहे और बिजली की मांग लागातार बढ़ रही है। वर्तमान में पेसू क्षेत्र में 86 विद्युत उपकेंद्र से विद्युत आपूर्ति हो रही है, जिसकी कुल क्षमता 2405 एमवीए है।

पटना इलेक्ट्रिक सप्लाई यूनिट (पेसू) के महाप्रबंधक दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि विद्युत उपकेंद्र में ही 33 केवी को 11 केवी में बदला जाता है, जो बाद में वितरण ट्रांसफार्मर तक जाता है।

नए विद्युत उपकेंद्र चालू होने से जिन फीडरों और मौजूदा उपकेंद्रों पर अत्यधिक लोड रहता है, उनका भार कम हो जाएगा।

पहले दूर के विद्युत उपकेंद्र से जिन इलाकों को बिजली दी जाती थी, वहां अब पास में ही पीएसएस स्थापित होने से फीडर की लंबाई कम हो जाएगी।

विद्युत उपकेंद्र बढ़ने से फीडर छोटे होंगे, इससे तकनीकी खराबी की संभावना काफी कम होगी। यदि कभी खराबी आती भी है, तो बहाली में बहुत कम समय लगेगा।

लोड वाले क्षेत्रों में ही विद्युत उपकेंद्र होने से सिस्टम पर ओवरलोडिंग नहीं होगी और सप्लाई अधिक स्थिर रहेगी। विद्युत उपकेंद्र का निर्माण नौ माह में पूर्ण हो जाता है।

वर्तमान में निर्माणाधीन 15 विद्युत उपकेंद्र में से सात नवंबर माह में चालू कर दिए जाएंगे। इससे आगामी ठंड में उपभोक्ताओं को ट्रिपिंग और लो वोल्टेज की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी।

दानापुर-फुलवारी-खगौल क्षेत्र का तेजी हो रहा विकास 

दानापुर, फुलवारी और खगौल क्षेत्र में तेजी से हो रहे शहरी विस्तार के कारण बिजली की मांग बढ़ रही है। इन इलाकों में बड़ी संख्या में अपार्टमेंट और रिहायशी इमारतें बन रही हैं।

बढ़ते लोड को संभालने और निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए इन तीन क्षेत्रों में पांच नए विद्युत उपकेंद्र बनाए जा रहे हैं। इनमें दानापुर ब्लाॅक आफिस, नोहसा, डीपीएस मोड़, उसरी और भगवतीपुर विद्युत उपकेंद्र शामिल हैं।

इनके चालू होने से मौजूदा उपकेंद्रों और फीडरों पर लोड का दबाव कम होगा। साथ ही, उपभोक्ताओं को लो वोल्टेज और बार-बार बिजली ट्रिप होने की समस्या से राहत मिलेगी।

नवंबर में चालू होंगे ये सात विद्युत उपकेंद्र

  • भूतनाथ रोड
  • दानापुर ब्लाॅक आफिस
  • नोहसा
  • पहाड़ी न्यू
  • पटना घाट
  • एससीईआरटी कैंपस
  • डीपीएस मोड़

इन 15 विद्युत उपकेंद्र का हो रहा निर्माण

  1. भूतनाथ रोड
  2. पहाड़ी न्यू
  3. नोहसा
  4. दानापुर ब्लाक आफिस
  5. पटना घाट
  6. बैरिया
  7. एससीईआरटी कैंपस
  8. डीपीएस मोड़
  9. उसरी
  10. न्यू विद्युत भवन
  11. कनौजी शाहपुर
  12. भगवतीपुर
  13. श्रीराम स्कूल कंकड़बाग
  14. हसनपुरा
  15. हनुमान नगर


वर्ष – दर्ज अधिकतम लोड (मेगावाट में)

  • 2017 553
  • 2018 604
  • 2019 697
  • 2020 620
  • 2021 615
  • 2022 733
  • 2023 775
  • 2024 863
  • 2025 883
  • 2026 933.6

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