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साइबर ठगी के लिए गावों में कैंप लगाकर खुलवाए थे 500 बैंक खाते, पटना में बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश

Published: Sat, 26 Sep 2026 12:16 AM (IST)

साइबर ठगों ने सरकारी योजनाओं का लालच देकर गांवों में कैंप लगाकर 500 से अधिक बैंक खाते खुलवाए, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम के लेन-देन में किया जाता था।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. सरकारी योजनाओं का लालच देकर गांवों में साइबर ठगी के कैंप।

  2. ग्रामीणों के नाम पर 500 से अधिक बैंक खाते खुलवाए गए।

  3. पटना पुलिस ने एक महिला को गिरफ्तार कर गिरोह का पर्दाफाश किया।

जागरण संवाददाता, पटना। सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर गांवों में कैंप लगाया जाता था। सामने बैठती थीं ग्रामीण महिलाएं और पीछे से तैयार हो रहा था साइबर ठगी का पूरा नेटवर्क।

किसी को प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ दिलाने का भरोसा, किसी को मनरेगा जॉब कार्ड तो किसी को शौचालय निर्माण की राशि दिलाने का झांसा दिया जा रहा था। इसके बाद ग्रामीणों के नाम पर बैंक खाते और सिम कार्ड निकलवाए जाते थे।

पुलिस की जांच में सामने आया है कि इन खातों को बाद में साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल किया जाता था। साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई और साइबर थाना पटना की संयुक्त कार्रवाई में इस गिरोह का पर्दाफाश हुआ है।

बाढ़ के सलेमपुर निवासी सीता कुमारी को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में उसके द्वारा गिरोह के 500 से अधिक बैंक खाते खुलवाने की जानकारी देने के बाद पुलिस की जांच का दायरा बढ़ गया है।

गांव-गांव में कैंप, बैंक खाते का खेल

गिरोह के सदस्य पहले गांव में कैंप के लिए जगह तय करते थे। ग्रामीणों, खासकर महिलाओं को सरकारी योजना का लाभ दिलाने का लालच देकर बुलाया जाता था। कैंप में पीओएस एजेंट सिम निकालते थे।

इसके बाद बैंक मित्र ग्रामीणों को अलग-अलग बैंक शाखाओं में ले जाकर खाते खुलवाते थे। खाते खुलने के बाद उनका इस्तेमाल कौन कर रहा था और उनमें किस तरह की रकम आ रही थी, इसकी अब पुलिस जांच कर रही है।

पंडारक से बख्तियारपुर तक बिछा जाल

पुलिस को पंडारक के कोंदी गांव में सरकारी अनाज वितरण का झांसा देकर खाते खुलवाने की जानकारी मिली है। बख्तियारपुर के सुंदरपुर और सैदपुर में शौचालय निर्माण और मनरेगा जॉब कार्ड के नाम पर कैंप लगाने की बात भी सामने आई है।

खासकर महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीणों को शिविर में बुलाया जाता था। इसके बाद गिरोह में शामिल पीओएस एजेंट ग्रामीणों के नाम पर सिम निकालते थे।

बैंक मित्र उन्हें विभिन्न बैंकों की शाखाओं में ले जाकर खाते खुलवाते थे। जांच में सामने आया है कि गिरोह द्वारा केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक आफ इंडिया और इंडियन बैंक की विभिन्न शाखाओं में खाते खुलवाए जाते थे।

महिला पकड़ी गई तो खुलने लगी परतें

साइबर थाना पटना में 23 सितंबर को कांड दर्ज किया गया था। छापेमारी में सीता कुमारी पकड़ी गई। उससे पूछताछ में मिली जानकारी पर पुलिस ने नालंदा जिले में एक सरपंच और उसके सहयोगियों के घर पर छापा मारा।

पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपित फरार हो गए। तलाशी में 12 मोबाइल, 13 सिम, एक बायोमैट्रिक डिवाइस, दो पासबुक, दो एटीएम कार्ड, एक चेकबुक और कैलकुलेटर समेत अन्य सामग्री मिली।

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