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पटना: EMI बाउंस होने पर जबरन छीन ली थी बाइक, अब फाइनेंसर को देना होगा 20 हजार जुर्माना

Published: Thu, 22 Oct 2026 06:38 PM (IST)

पटना उपभोक्ता आयोग ने बिना कानूनी प्रक्रिया बाइक जब्त करने पर फाइनेंसर को दोषी ठहराया है। आयोग ने फाइनेंसर को ...और पढ़ें

बिना नोटिस बाइक जब्त करना पड़ा महंगा, फाइनेंसर को देना होगा 20 हजार जुर्माना (AI Generated Image)

बिना नोटिस बाइक जब्त करना पड़ा महंगा, फाइनेंसर को देना होगा 20 हजार जुर्माना (AI Generated Image)

HighLights

  1. फाइनेंसर ने बिना कानूनी प्रक्रिया बाइक जब्त की थी।

  2. उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में कमी माना।

  3. फाइनेंसर को बाइक लौटाने और 20 हजार रुपये देने का आदेश।

जागरण संवाददाता, पटना। ऋण की किस्तें चुकाने में चूक हुई तो फाइनेंसर ने बाइक जब्त कर ली, लेकिन वाहन जब्त करने से पहले जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। अब इस मामले में फाइनेंसर को बाइक लौटाने के साथ 20 हजार रुपये भी देने होंगे।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पटना ने इसे सेवा में कमी मानते हुए शिकायतकर्ता सौरभ राज के पक्ष में फैसला सुनाया है।

आयोग ने फाइनेंसर को बाइक की पूरी सर्विसिंग कराकर चालू हालत में लौटाने, मानसिक परेशानी के लिए 10 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।

यदि फाइनेंसर सर्विसिंग के बाद बाइक चालू हालत में लौटाने में विफल रहता है, तो उसे वाहन की लागत के मद में 50 हजार रुपये देने होंगे।

आदेश का निर्धारित अवधि में अनुपालन नहीं होने पर तीन माह बाद से वास्तविक भुगतान या वाहन की सुपुर्दगी तक देय राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी लागू होगा। यह फैसला आयोग के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्र और सदस्य रजनीश कुमार ने सुनाया।

सौरभ राज ने 31 जुलाई 2013 को बजाज पल्सर 130 सीसी बाइक खरीदी थी। इसके लिए उन्होंने फाइनेंसर से 65 हजार रुपये का ऋण लिया था। इसे 3,245 रुपये की 20 समान मासिक किस्तों में चुकाना था।

किस्तों के भुगतान में चूक होने पर 18 अगस्त 2014 को फाइनेंसर ने संबंधित लोगों के माध्यम से बाइक जब्त कर ली। शिकायतकर्ता का आरोप था कि बाइक जब्त करने से पहले जरूरी नोटिस नहीं दिया गया और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि वाहन जब्त करने से पहले बकाया राशि की मांग का नोटिस, ऋण की शेष राशि की एकमुश्त अदायगी के लिए लोन रिकाल नोटिस और वाहन जब्त करने के आशय से संबंधित नोटिस की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। फाइनेंसर वाहन जब्त करने के आशय से जारी नोटिस प्रस्तुत नहीं कर सका।

आयोग ने इस कमी को सेवा में कमी मानते हुए शिकायत स्वीकार कर ली। आयोग ने आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से 120 दिनों के भीतर बाइक की पूरी सर्विसिंग कराकर उसे चालू हालत में शिकायतकर्ता को लौटाने का निर्देश दिया है। साथ ही 10 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमे का खर्च देने को कहा है।

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