पटना से मिडिल ईस्ट जाना हुआ मुश्किल, उड़ानें कम होने से यात्रियों के विकल्पों पर मंडराया संकट
मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर पटना एयरपोर्ट के विमान परिचालन पर पड़ा है। जून से सितंबर 2026 के ...और पढ़ें

पटना से मिडिल ईस्ट जाना हुआ मुश्किल, उड़ानें कम होने से यात्रियों के विकल्पों पर मंडराया संकट
HighLights
मिडिल ईस्ट जंग ने पटना एयरपोर्ट विमान परिचालन को प्रभावित किया।
जून-सितंबर में औसत उड़ानें 40 से घटकर 32 जोड़ी हुईं।
कनेक्टिंग फ्लाइट यात्रियों को यात्रा में अब हो रही परेशानी।
जागरण संवाददाता, पटना। मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर पटना एयरपोर्ट के विमान परिचालन पर भी दिखने लगा है।
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए प्रमुख कनेक्टिंग हब पर निर्भर रहने वाले यात्रियों की परेशानी के बीच पटना से विमानों की आवाजाही में भी गिरावट दर्ज की गई है।
सामान्य दिनों में पटना एयरपोर्ट से औसतन 40 जोड़ी विमानों का परिचालन होता था, लेकिन जून से सितंबर 2026 के दौरान यह घटकर 32 जोड़ी रह गया।
कुछ दिनों में तो विमानों की संख्या महज 28 जोड़ी तक सिमट गई। यानी सामान्य परिचालन की तुलना में औसतन आठ जोड़ी उड़ानें कम हो गईं।
कनेक्टिंग फ्लाइट से मिडिल ईस्ट पहुंचते हैं यात्री
पटना से मिडिल ईस्ट के विभिन्न देशों में जाने वाले यात्रियों को आम तौर पर दिल्ली, मुंबई या हैदराबाद से कनेक्टिंग फ्लाइट लेनी पड़ती है।
पटना से इन शहरों के लिए उड़ानें कम होने या समय-सारिणी में बदलाव का असर आगे की यात्रा पर भी पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट के समय का तालमेल बैठाने में परेशानी हो सकती है।
हालांकि, पटना से विमानों की संख्या में कमी और मिडिल ईस्ट की जंग के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए एयरलाइनवार परिचालन और उड़ान रद होने के आंकड़ों की जरूरत होगी।
यात्रियों के विकल्प पर पड़ सकता है असर
पटना एयरपोर्ट से उड़ानों की संख्या घटने का असर यात्रियों के विकल्पों पर पड़ सकता है। खासकर उन यात्रियों को परेशानी हो सकती है, जिन्हें दिल्ली, मुंबई या हैदराबाद से दूसरी उड़ान पकड़कर मिडिल ईस्ट जाना है।
कनेक्टिंग फ्लाइट के बीच पर्याप्त समय नहीं होने पर आगे की यात्रा का कार्यक्रम भी प्रभावित हो सकता है।
जून से सितंबर के बीच औसतन 40 जोड़ी से घटकर 32 जोड़ी विमानों का परिचालन होना पटना एयरपोर्ट की हवाई कनेक्टिविटी में आई कमी की ओर संकेत करता है।
हालांकि, इस गिरावट के पीछे मिडिल ईस्ट की स्थिति के अलावा मौसमी बदलाव, एयरलाइनों की परिचालन रणनीति और मांग में उतार-चढ़ाव जैसे कारकों की भूमिका की पुष्टि भी जरूरी है।
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