इलाज के लिए धूप-बारिश झेलने

को विवश मौसमी रोगों के मरीज

पटना । कभी तेज धूप तो थोड़ी देर बाद तेज ठंडी हवाएं। फिर भी पसीना है कि सूखने का नाम नहीं लेता। दूसरी ओर 25 से 35 डिग्री सेल्सियस का अनुकूल तापमान और नमी के कारण सक्रिय बैक्टीरिया-वायरस बड़ी संख्या में लोगों को बीमार कर रहे हैं। पीएमसीएच से लेकर न्यू गार्डिनर इंडोक्राइन सुपरस्पेशियलिटी हास्पिटल तक मौसमी रोगों सर्दी-खांसी, बुखार, टायफाइड, पेट दर्द, दस्त से पीड़ित लोगों की लंबी कतार लगी है। पीएमसीएच में चर्म रोग और न्यूरो विभाग की तरह न्यू गार्डिनर में भी बाहर तक कतार लग रही है। मौसमी रोगों से परेशान लोग इलाज के लिए घंटों धूप में खड़े रहकर इंतजार करने को विवश हैं। कई बुजुर्ग रोगियों को ठंड में बिठाकर उनके स्वजन चैंबर तक कतार लगा रहे हैं।

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एक तो जगह कम, उस पर छत गिरने का खतरा :

न्यू गार्डिनर में हर दिन ओपीडी में करीब 500 और इमरजेंसी में 150 के आसपास मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। ग्राउंड पर सामान्य रोगों और प्रथम तल पर शुगर-थायराइड और हार्मोन संबंधी अन्य रोगों की दो-दो ओपीडी चलती हैं। नीचे करीब 15 रोगियों के लिए कुर्सिंयां लगी हैं लेकिन हाल में कुर्सी के ऊपर छत का भारी टुकड़ा गिरने के बाद से आसपास के मरीज वहां बैठने से परहेज करते हैं। चैंबर के बाहर भीड़ न लगे इसलिए सुरक्षाकर्मी कतार लगवाते हैं जो कई बार मुख्य द्वार तक पहुंच जाती है। दोपहर 12.30 बजे तक बाहर कतार रहती ही है। कई मरीजों का कहना है कि दो बार छत का प्लास्टर कुर्सियों पर गिर चुकी है, इससे बेहतर है कि बाहर खड़े रहें। बताते चलें कि बारिश होने पर भवन के अधिकतर कमरों में पानी टपकता है।

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अपर मुख्य सचिव ने भी जताई थी नए भवन की जरूरत

करीब डेढ़ माह पूर्व अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने न्यू गार्डिनर का निरीक्षण किया था। जर्जर हालत देखकर नए भवन के चार वर्ष से लंबित प्रस्ताव की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही थी। हालांकि, अबतक इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई है। नया निर्माण प्रस्तावित होने के कारण मरम्मत कार्य भी नहीं कराया जा रहा है।

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ओपीडी में अधिकतर मरीज सुबह 10 से 12 बजे के बीच ही आते हैं। इस कारण भीड़ हो जाती है। डाक्टर चैंबर के दरवाजे पर भीड़ लगाने के बजाय लोगों से कुर्सियों में बैठने या कतारबद्ध होने को कहा जाता है।

- डा. मनोज कुमार सिन्हा, निदेशक न्यू गार्डिनर रोड अस्पताल

Edited By: Jagran