विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Pappu Yadav: जमानत के बाद सियासी भूचाल; किस मंत्री का नाम लेने वाले हैं सांसद पप्पू यादव?

Published: Fri, 13 Feb 2026 09:03 PM (IST)

पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव शुक्रवार को बेउर जेल से जमानत पर रिहा हो गए। उन्होंने अपनी हत्या की ...और पढ़ें

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, पटना। पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को शुक्रवार शाम बड़ी राहत मिली। तीन मामलों में जमानत मिलने के बाद वे बेउर जेल से बाहर आए। उनकी गिरफ्तारी 7 फरवरी को हुई थी।

जेल से रिहा होने के बाद मीडिया से बातचीत में सांसद ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मेरी हत्या का प्रयास किया गया, और इसमें दिल्ली, बिहार तथा पूर्णिया के एक नेता की गहरी साजिश शामिल है।

पप्पू यादव ने पटना के एसएसपी, सिटी एसपी और एक इंस्पेक्टर पर भी उन्हें फंसाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पहले भी “लॉरेंस मामले” में उन्हें अपमानित कराने की कोशिश की गई थी।

खेमका और रूपेश हत्याकांड पर बड़ा दावा

सांसद ने दावा किया कि खेमका हत्याकांड में वे एक मंत्री का नाम उजागर करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उस मामले में हुआ एनकाउंटर गलत था। इसके साथ ही रूपेश हत्याकांड में वे जल्द ही रिट याचिका दायर करेंगे।

छात्रा के परिजनों से मिले

पप्पू यादव ने फुलवारीशरीफ पहुंचकर उस छात्रा के परिजनों से मुलाकात की, जिसकी संदिग्ध परिस्थितियों में तीन मंजिला इमारत से गिरने से मौत हो गई थी। उन्होंने परिवार को न्याय की लड़ाई लड़ने का भरोसा दिलाया।

अदालत से तीनों मामलों में जमानत

इससे पहले एमपी-एमएलए के विशेष न्यायाधीश प्रवीण कुमार मालवीय की अदालत ने सांसद को तीनों मामलों में जमानत दी। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता विजय आनंद और अजय कुमार ने अलग-अलग जमानत याचिकाएं दाखिल की थीं।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद प्रत्येक मामले में ₹10,000 के निजी मुचलके और उतनी ही राशि के दो जमानतदारों की शर्त पर रिहाई का आदेश दिया।

कौन-कौन से मामले

अधिवक्ता के अनुसार, तीन मामलों में से दो पुराने थे—

  • कोतवाली थाना कांड संख्या 279/2017: सरकारी कार्य में बाधा

  • कोतवाली थाना कांड संख्या 1113/2019: प्रतिबंधित क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन

  • बुद्धा कॉलोनी थाना कांड संख्या 72/2026: सरकारी कार्य में बाधा

बताया गया कि एक पुराने मुकदमे गर्दनीबाग थाना कांड संख्या 552/1995 में जारी कुर्की-जब्ती आदेश और वारंट के आधार पर 7 फरवरी को गिरफ्तारी हुई थी, जिसमें पहले ही जमानत मिल चुकी है।