यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 11, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
गोली खाकर गिरते गए, ऊंचा कर दिया तिरंगे का मान
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 11 अगस्त 1942 का दिन पटना और बिहार के लिए खास है

प्रभात रंजन, पटना। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 11 अगस्त 1942 का दिन पटना और बिहार के लिए बेहद खास है। ब्रिटिश राज में इसी दिन पटना के सचिवालय पर तिरंगा फहराने जा रहे सात छात्र पुलिस की गोली का शिकार बने थे। बिहार विधानमंडल भवन के सामने इन सात शहीदों की प्रतिमाएं आजादी के संघर्ष में बिहार के बलिदान की कहानी बयान करती हैं।
नौ अगस्त 1942 को पूरे देश के साथ आंदोलन की चिगारी पटना में भी भड़क उठी। घर-घर आजादी के गीत गाये जाने लगे। कॉलेजों में छात्र-शिक्षक सभी आजादी का पाठ करने लगे थे। 11 अगस्त की सुबह शहर आजादी के रंग में रंगा नजर आ रहा था। अशोक राजपथ होते हुए आंदोलनकारियों का जत्था बांकीपुर पहुंचा, जहां एक सभा हुई। इसके बाद आंदोलनकारी सचिवालय की ओर बढ़ने लगे। सचिवालय पहुंचते ही आंदोलनकारियों पर सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज कर दिया। जत्थे में शामिल छात्र इससे विचलित हुए बगैर आगे बढ़ते रहे। इनके जत्थे ने एक तिरंगा थाम रखा था। इरादा तिरंगे को सचिवालय पर फहराने का था। पटना के जिलाधिकारी मिस्टर आर्चर ने छात्रों को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन छात्र अपने इरादे पर अडिग थे। मिलर हाई स्कूल में नौवीं के छात्र देवीपद चौधरी जिनकी उम्र महज 14 साल थी, जत्थे में सबसे आगे चल रहे थे। वह सिलहट के जमालपुर गांव के रहने वाले थे। झंडा लिये देवीपद को आगे बढ़ते देख सैनिकों ने उनके सीने में गोली मार दी। तिरंगे जमीन पर गिरता, इससे पहले पुनपुन हाई स्कूल के छात्र रायगोविद सिंह ने थाम लिया। उन्हें भी गोली लगी और वीरगति को प्राप्त हो गए। एक-एक कर राममोहन राय सेमिनरी के छात्र रामानंद सिंह, पटना हाई स्कूल गर्दनीबाग के छात्र राजेंद्र सिंह, बीएन कॉलेज के छात्र जगपति कुमार, पटना कॉलेजिएट के छात्र सतीश प्रसाद झा ने तिरंगा थामा और अंग्रेजों की गोली खाकर वीरगति को प्राप्त हुए। जगपति को तो एक साथ तीन गोलियां लगीं। सबसे आखिर में तिरंगे को थामा राममोहन राय सेमिनरी के 15 वर्षीय छात्र उमाकांत ने। छह साथियों की शहादत के बाद भी वह निडरता के साथ आगे बढ़े। गोली लगी और उमाकांत गिर पड़े, लेकिन तिरंगे को सचिवालय पर लगाकर अपना लक्ष्य पूरा किया।
