पटना [काजल]। आज ग्लोबलाइजेशन के दौर में मोबाइल के जरिए पूरी दुनिया हमारी मुट्ठी में है। आप चाहें तो दूर बैठे रिश्तेदार से वीडियो चैटिंग कर सकते हैं। जानकारी चाहिए तो गूगल है ना। लेकिन, हर आविष्कार का साइड इफेक्ट भी देखा जाता है। मोबाइल जहां बातें करने का माध्यम बना, वहीं इसने तरह-तरह की विकृतियों को भी जन्म दिया। नैतिकता को ताक पर रख अश्‍लील वीडियो बनाना और उसे वायरल करना इन्‍ही साइड इफेक्‍ट्स में एक है। अब तो दुष्‍कर्म व छेड़खानी जैसे अपराध के वीडियो भी वायरल किए जा रहे हैं।

बिहार में यह कानून-व्‍यवस्‍था का गंभीर मसला बन चुका है। बिहार के विभिन्‍न इलाकों में इधर कुछ दिनों के अंदर लड़कियों से छेड़खानी और दुष्कर्म के वायरल वीडियो ने उनकी सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। इसने अपराधियों के कानून के प्रति खत्‍म होते डर को भी प्रमाणित किया है।


बिहार में जहनाबाद का वीडियो वायरल होने पर हड़कंप
पिछले दिनों जहानाबाद के ग्रामीण इलाके में एक बच्ची के वायरल अश्लील वीडियो ने आधुनिक समाज और पुलिस प्रशासन की नींव हिलाकर रख दी। वीडियो में साफ दिख रहा था कि लड़की अपनी इज्जत की दुहाई दे रही थी और छह से सात लड़के उसके कपड़े फाड़ रहे थे। उसके पूरे बदन को जगह-जगह से नोंच रहे थे। 
लड़की रहम की भीख मांग रही थी और लड़के जोर-जोर से हंस रहे थे । उनमें से एक घटना का वीडियो भी बना रहा था। उन्‍होंने उस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसे लाखों लोगों ने देखा। वीडियो में अपराधियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कोई कोशिश नहीं की। इससे कानून के प्रति समाप्‍त होते डर का भी प्रमाण मिला।

जब जहानाबाद पुलिस ने इस वीडियो को देखा तो खलबली तो मचनी ही थी। पुलिस की थू-थू के बीच आरोपियों की तलाश शुरू हुई। एसआइटी का गठन कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार किए गए 11 आरोपितों में से आठ नाबालिग निकले। मामला हल कर लेने का श्रेय लेने में पुलिस यह भूलती दिखी कि वीडियो वायरल हो चुका था और लड़की की इज्‍जत साइबर संसार में भी तार-तार हो चुकी थी। हालांकि, इस मामले में आइजी नैयर हसनैन खान ने कहा है कि दोषियों को इतनी कड़ी सजा दी जाएगी कि कोई आगे से इस तरह की हरकत करने के बारे में सोचेगा भी नहीं।

गया में दो लड़कियों से छेड़खानी और दुष्कर्म का वीडियो हुआ वायरल
जहानाबाद की घटना से लगी आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि इसके कुछ ही दिनों बाद गया के वजीरपुर में दो लड़कियों के साथ छेड़खानी, मारपीट और दुष्कर्म  के दो वीडियो सामने आ गए।
पहले वीडियो में लड़की गुहार लगाती रही और दबंग उसके कपड़े खींचते रहे। इस वीडियो में लड़की अपने दोस्त के साथ नजर आ रही है। सुनसान जगह पर गांव के कुछ दबंग किस्म के युवक लड़की व उसके दोस्त को घेर लेते हैं। पहले वे लड़की के साथ वाले युवक की बुरी तरह से पिटाई करते हैं। इस दौरान लड़की छोड़ देने की गुहार लगाती है। फिर, वे लड़की को घेर कर उसके साथ छेड़खानी शुरू कर देते हैं। उसके कपड़ों को उतारने के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम देते हैं। इस बीच लड़की बार-बार छोड़ देने की दुहाई देती है।
दूसरे वीडियो में कुछ युवकों ने एक लड़की को पकड़ रखा है। वह भईया-भईया कहकर छोड़ देने की गुहार लगा रही है, पर कोई सुनने को तैयार नहीं है। एक अधेड़ व्यक्ति लड़की के साथ पकड़े गए युवक को बेरहमी से पीटता है। उसे जमीन पर गिराकर सिर पर लात मारता है। उसे बेसुध होने तक पीटा जाता है। उसके बाद लड़की के साथ मिलकर छेड़खानी की जाती है।

दोनों वीडियो वायरल होने के बाद फिर पुलिस विभाग में बेचैनी बढ़ी। गया के एसएसपी राजीव मिश्रा ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर पीड़ित लड़कियों और अपराधियों की पहचान कर ली गयी। इन मामलों में भी गिरफ्तार‍ियां हो गईं, लेकिन वीडियो तो वायरल हो चुके थे।
मसौढ़ी में छेड़खानी का वीडियो हुआ वायरल
जहानाबाद और गया की घटनाओं के बाद छेड़खानी का एक और वीडियो वायरल हुआ। यह घटना बिहार की राजधानी पटना के मसौढ़ी में हुई। वहां एक युवती को घंटों  बंधक बना कर रखा गया, उसके साथ छेड़खानी की गई तथा इसका वीडियो बना कर वायरल कर दिया गया।
इस वीडियो में युवती एक शख्स के साथ है और कुछ लोग दोनों का रास्ता रोककर अश्लील हरकत करते हैं। वहां खड़े लोग यह भी कह रहे है कि वे लोग पढ़ाई की जगह पर बाइक से घूम रहे थे। इस दौरान युवती लगातार उनसे छोड़ने के लिए कहती है, लेकिन छेड़खानी का सिलसिला लगातार जारी रहता है। आसपास के लोग तमाशाबीन बने दिखे।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद भी पुलिस ने मामले की तहकीकात की और आरोपितों को गिरफ्तार किया, लेकिन लड़की की इज्जत तार-तार हो चुकी थी। 
पूर्णिया में घर में घुसकर किया दुष्कर्म, वीडियो वायरल
पूर्णिया सदर थाना क्षेत्र के एक घर में लड़की को अकेली पाकर तीन युवकों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया तथा उसका वीडियो बना वायरल कर दिया। पीडि़त लड़की के अनुसार वह घर में अकेली थी। इसी दौरान तीन युवक विशाल, सचिन व अर्जुन घर में घुस गए। तीनों उसके साथ छेड़छाड़ करने लगे। विरोध करने पर मारपीट कर दुष्कर्म किया। युवकों ने मोबाइल से दुष्कर्म का वीडियो भी बना लिया।
इस घटना की भी प्राथमिकी दर्ज हुई, आरोपितों की गिरफ्तारी भी हुई। लेकिन, वायरल हो चुके वीडियो का क्‍या?
मुजफ्फरपुर में दुष्कर्म का वीडियो बना किया ब्लैकमेल
ऐसी ही एक घटना मुजफ्फरपुर जिले के नगर थाना क्षेत्र में भी हुई। एक विवाहिता से दुष्कर्म कर उसका वीडियो व तस्वीर लेकर उन्‍हें वायरल करने की धमकी दी गई। एसएसपी कार्यालय पहुंची पीड़िता ने बताया कि उसके भाई का दोस्त गौतम उसके घर आता-जाता था। इसी क्रम में लगभग तीन साल पूर्व घर में अकेली देख उसने दुष्कर्म कर उसका वीडियो बना लिया। इसके बाद वह इसे वायरल करने की धमकी देकर यौन शोषण करने लगा।
पीडि़ता के अनुसार आरोपित ने वीडियो दिखाकर उसका तीन साल तक यौन शोषण किया। इतना ही नहीं, लाखों के गहने भी ऐंठ लिए। अब फिर वह वीडियो वायरल करने तथा पुलिस में शिकायत करने पर तेजाब से चेहरा जला देने की धमकी दे रहा है।
क्या कहते हैं आंकड़ें 
दरअसल, स्मार्टफोन से वीडियो बना उसे शेयर करना काफी आसान हो गया है। आंकड़ों की मानें तो आज देश के कुल मोबाइल फोन धारकों में 62 फीसद स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं। देश में प्रति 100 लोगों में करीब 93 के पास मोबाइल फोन है। टेलिकॉम रेगुलेटरी ऑथोरिटी के मुताबिक देश में आबादी के हिसाब से माबाइल फोन इस्तेमाल करने वालों की सर्वाधिक संख्या दिल्ली में है, जबकि बिहार में सबसे कम। लेकिन, मोबाइल से अश्‍लील वीडियो वायरल करने के मामले बिहार में ही तेजी से बढ़े हैं।


क्या कहता है कानून
बिहार में एसटीएफ के एसपी नीलेश कुमार के मुताबिक़ आइटी एक्ट की धारा 67A के तहत ऐसे वीडियो बनाना और फैलाना या फैलाने में सहायता करना अपराध है। इतना ही नहीं, अगर मोबाइल फोन में ऐसा वीडियो सेव भी हो तो यह अपराध है। इनमें पुलिस आइटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर सकती है। लेकिन, अक्सर ऐसे मामले वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस तक पहुंचते हैं।
एसपी नीलेेश कुमार के मुताबिक ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर पांच साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक जुर्माना का प्रावधान है। पीडि़त नाबालिग हाे तो सजा और बढ़ सकती है।

साइबर अपराध के आंकड़े
एनसीआरबी के आंकडों की बात करें तो पिछले तीन सालों में साइबर अपराध का ग्राफ काफी बढ़ा है। 2014 में साइबर अपराध के 9622 मामले सामने आए थे। 2015 में ऐसे 11,592 मामले सामने आए। 2016 में ये बढ़कर 12317 हो गए थे। इन आंकड़ो से ये अंदाज़ा लगा पाना मुश्किल नहीं कि इंटरनेट हमारे लिए किस हद तक घातक हो सकता है। वीडियो एक बार वायरल हो जाए तो उसे रोक पाना भी मुश्किल होता है। कई मौकों पर आइटी मंत्रालय और गृह मंत्रालय से मदद भी लेनी पड़ती है।
वीडियो के सोर्स का पता लगाना मुश्किल
एसपी नीलेश ने बताया कि ऐसे अपराध में पुलिस को सबसे पहले वीडियो के सोर्स का पता लगाना होता है। ऐसे मामलों में पुलिस मौके पर पहुंच कर फोन को जब्त करती है। डिवाइस जब्त करने के बात उसकी डिजिटल व फोरेंसिक जांच होती है। इसके लिए अलग से लैब होते हैं।
अगर वीडियो सोशल साइट पर है तब फेसबुक और गूगल आदि से बात करने की ज़रूरत पड़ती है। लेकिन, अगर वीडियो मोबाइल पर बना होता है, तो मुश्किल बढ़ जाती है, क्योंकि मोबाइल पीटूपी प्लेटफॉर्म होता है, जिससे एक से दूसरे तक वीडियो पहुंच जाता है।


गूगल या फेसबुक या किसी अन्‍य सोशल मीडिया साइट पर वीडियो अपलोड हो जाए तो उनसे भी जानकारी मांगी जाती है। अगर वीडियो वाट्सएप पर होता है तो मेटा-डेटा अपने आप डिलिट हो जाता है। इसलिए, इस तरह के वीडियो की जांच में कई चुनौतियां होती हैं। वाट्सएप में एंड टू एंड एनक्रिप्शन होता है, जिसकी वजह से जब मैसेज एक मोबाइल से दूसरे मोबाइल पर जाता है तो भेजने के बाद उसपर ताला लग जाता है। उसे बीच में कोई पढ़ नहीं सकता। जिसके लिए मैसेज होता है, जब उसके मोबाइल पर पहुंच जाता है। तभी उस मैसेज का ताला खुलता है। वाट्सएप के मुताबिक उस एनक्रिप्शन की चाबी खुद उनके पास नहीं होती। इसलिए डेटा कहां से कहां पहुंचा, ये पता करना मुश्किल है।

दूसरी बड़ी समस्या है पुलिस वालों का अनट्रेंड होना। हालांकि, अब राज्य में पुलिस को इसके लिए ट्रेनिंग दी जा रही है। 

Posted By: Kajal Kumari

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