यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 05, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
नूरजहां ने अपनी बुद्धिमानी से दुश्मनों को दी मात
जिंदगी में चाहे कितनी भी बड़ी समस्या क्यों ना आ जाये मनुष्य अगर ठंडे दिमाग और बुद्धिमानी से सोचे तो उसका हल जरूर निकलता है

पटना। जिंदगी में चाहे कितनी भी बड़ी समस्या क्यों ना आ जाये मनुष्य अगर ठंडे दिमाग और बुद्धिमानी से काम ले तो बड़ी से बड़ी समस्या भी चुटकी में हल हो जाती है। कुछ ऐसे ही दृश्य बुधवार की शाम कालिदास रंगालय के मंच पर देखने को मिले। मौका था कला जागरण और मगध कलाकार द्वारा कालिदास रंगालय में आयोजित 11वां डॉ. चतुर्भज स्मृति नाट्य महोत्सव के समापन के मौके पर डॉ. चतुर्भुज लिखित नाटक नूरजहां का पुण्यार्क कला निकेतन, पंडारक की ओर से मंचन का। नाटक में दिखाने की कोशिश की गई कि नूरजहां ने मुसीबत के समय अपनी बुद्धिमानी से काम लिया और अपनी समस्या का समाधान किया। नाटक का निर्देशन विजय आनंद ने किया। कलाकारों ने अपने शानदार कलाकारी से सबका दिल जीत लिया। ये थी नाटक की कहानी : मुगल सल्तनत के बादशाह के दिलो-दिमाग पर हिदुस्तान की सियासत पर पकड़ रखने वाली नूरजहां रहती है। उसके संबंध खुर्रम खां (शाहजहां) से अच्छे नहीं थे। क्योंकि नूरजहां को एहसास था कि शाहजहां के हाथों बादशाहत आते ही उसका हिदुस्तान के शासन से नियंत्रण प्रभावहीन हो जाएगा। इस बात का अंदाजा खुर्रम को भी था। इसलिए खुर्रम ने नूरजहां के शासन से प्रभाव को कम करने के लिए विद्रोह का रास्ता अख्तियार किया, जिसे नूरजहां ने कूटनीतिक चाल से शाहजादा परवेज और महावत खां द्वारा सफलतापूर्वक कुचलवा डाला। इस मौके पर जिंदगी एक रंगमंच काव्य पाठ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इससे पहले कार्यक्रम का उद्घाटन सुमन कुमार और अशोक प्रियदर्शी ने डॉ. चतुर्भुज के जीवन पर प्रकाश डाला। थॉट्स इंक के संस्थापक अभिषेक शंकर ने कहा कि हमारा लक्ष्य राज्य में पठन-पाठन की संस्कृति को सुदृढ़ करना है। इस मौके पर दर्जनों कवियों ने समाज, देश और जिंदगी के विभिन्न पहलुओं को अपनी रचना के माध्यम से प्रकट किया।
