पटना। एक निजी टीवी चैनल के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुलासा किया कि पटना में नरेंद्र मोदी का भोज रद्द करने का उनपर लगाया जाने वाला आरोप निराधार है। दरअसल यह काम सुशील मोदी (सुमो) ने किया था। उन्होंने तो भोज की पूरी तैयारी कर ली थी।

उन्होंने कहा कि इस बार का चुनाव विकास के मुद्दे पर ही लड़ा जाएगा। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव पर तंज कसते नीतीश ने कहा कि शायद उन्हें लगता है कि वे 'यूनिवर्सिटी ऑफ सेक्यूलरिज्म' के वाइस चांसलर हैं और हमलोग उनसे सेक्यूलरिज्म का सर्टिफिकेट लेने के लिए अर्जी लगाए हुए हैं।

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नीतीश कुमार ने पहली बार यह खुलासा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भोज सुशील मोदी के चलते रद्द हुआ था। मोदी की थाली उन्होंने नहीं, बल्कि सुशील मोदी ने छीनी थी।

नीतीश ने बताया, सुशील मोदी ही नरेंद्र मोदी के आगमन के कार्यक्रम का को-ऑर्डिनेशन कर रहे थे। पंडाल बन चुका था। डेकोरेशन का काम भी हो चुका था। नरेंद्र मोदी के भोज की पूरी तैयारी हो चुकी थी। इसी बीच सुशील मोदी ने कहा कि नरेंद्र मोदी भोज में नहीं आ पाएंगे।

नीतीश ने बताया कि उन्होंने सुशील मोदी के कहने पर ही भोज को रद्द कर दिया था। लेकिन, अब वे प्रचारित कर रहे हैं कि नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी की थाली छीन ली। अगर नरेंद्र मोदी का भोज रद्द करने का इतना ही दुख था तो फिर भाजपा ने एलायंस क्यों नहीं तोड़ लिया? नीतीश ने कहा, वे तो इस्तीफा देकर अकेले चुनाव मैदान में जाने के लिए तैयार थे।सुशील मोदी से अकेले पूछ लीजिए, रोज जो बयानबाजी करते हैं क्या वे उससे सहमत हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, लोगों को अहसास है कि काम हुआ है। हमारा रास्ता न्याय के साथ विकास का है। हर क्षेत्र में विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि विकास पर बहस हो। लेकिन, विकास के मॉडल व विकास के रास्ते पर कोई चर्चा नहीं करता। लोग इसे भटकाकर जंगलराज पार्ट 2 पर ले जाते हैं।

नीतीश ने कहा, किसी भी क्षेत्र को लीजिए, हर जगह विकास हुआ है। किसने विकास किया है और कौन कर सकता है, इसका पूरा विवरण है। लेकिन, आज की चर्चा भटक गई है, विकास पर चर्चा ही नहीं हो रही है। विकास के मायने क्या हैं, इस पर चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, लगता है कि एनडीए या बीजेपी में मुख्यमंत्री पद के लायक कोई नहीं है। बीजेपी देश के प्रधानमंत्री के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है।

उन्होंने कहा, विरोधी विकास पर चर्चा न करके जंगलराज पार्ट 2 पर बात कर रहे हैं। लालू के खिलाफ रहे, लेकिन कभी इस शब्द का प्रयोग नहीं किया। आज की तारीख में जंगलराज वाली बात अप्रासंगिक हो चुकी है।

कहा, अब लोगों के मन में डर नहीं है। शाम में महिलाएं बाजार में निकलने के लिए डर नहीं रही हैं। अपराध का दर देश में क्या है और बिहार में क्या है ,हम इसपर भी चर्चा के लिए तैयार हैं।

बिहार आज काफी आगे बढ़ चुका है। आज लोगों के मन में अपराध से डर खत्म हो चुका है। इसलिए जंगलराज पर चर्चा करना अप्रासंगिक है। यहां कानून का राज है और कायम रहेगा। इससे कभी समझौता नहीं कर सकते। महागठबंधन ने उन्हें पहले से ही मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। उनके रहते ऐसा नहीं हो सकता। विरोधियों के पास कुछ कहने के लिए नहीं है, इसलिए जंगलराज के नाम पर आवाज उठा रहे हैं।

2005 से आज तक के प्रयत्नों के फल के कारण आज यहां सुशासन का राज है। छह माह से देख रहा हूं, अब तक आरजेडी के किसी नेता ने किसी अपराधी को बचाने के लिए मुझसे नहीं कहा। चेहरा दिखाकर लोगों के बीच विरोध का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

लालू के 15 साल के राज में जंगलराज था, इसे मानने या न मानने वाली क्या बात है।

हमने त्यागपत्र देकर अपने सहयोगी जीतन राम मांझी को सीएम बना दिया। लोग कह रहे थे कि वे भाजपा के साथ मिल गए। भाजपा नेताओं का बयान था कि जबतक मांझी रहेंगे बिहार में खरमास (ऐसा महीना जिसमें शुभ कार्य नहीं होते, हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार) खत्म नहीं होगा, आज उन्हीं मांझी को साथ लेकर घूम रहे हैं।

1999 से एनडीए चल रहा है। उस समय कुछ बुनियादी बातें थी। उससे भटकाव दिखा तो हमारे लिए संभव नहीं था। भाजपा से अलग होने का फैसला राजनीतिक लाभ के लिए नहीं था। जो राजनीतिक आधार था, अगर हम देख रहे हैं कि वो आधार खिसक रहा है तो अलग होना हमारा हक है।
अरुण जेटली जी समन्वय के कार्य में रहते थे। राजनाथ सिंह उस समय बीजेपी के प्रेसिडेंट थे। ऐसी कौन सी बात है कि वे कहते हैं धोखा दिया। बताएं कौन सा धोखा दिया। 2010 में अगर इतने ही आहत थे तो फिर साथ में चुनाव क्यों लड़े थे।

प्रधानमंत्री को ऐसे पद पर बैठकर ऐसी बात नहीं करनी चाहिए। नरेंद्र मोदी को सुशील मोदी की हर बात पता है। सुशील मोदी से इसीलिए मुझे खतरा लगता रहता है। जब थाली छीनी गई थी तो 2014 के चुनाव में इसे मुद्दा क्यों नहीं बनाया।

सुशील मोदी ने नरेंद्र मोदी का भोज रद करके पूरे जदयू को बड़ा घाटा लगवाया। सुशील मोदी से जदयू का जो खर्च हुआ था उसकी भरपाई करवा दी जाए।

हमने इनको सुझाव दिया था गठबंधन की जगह एक दल हो जाए। उस पार्टी के अध्यक्ष के रूप में मुलायम सिंह के नाम का ऐलान हुआ, लेकिन पार्टी नहीं बन सकी। सपा के लोगों ने ही इसमें पैर पीछे खींच लिए थे। जब पार्टी नहीं बनीं तो अध्यक्ष कैसे?

मुलायम को जो वातावरण बना था उससे उलट नहीं जाना चाहिए था। बिहार के ऊपर पूरे देश की निगाह है, यूपी की भी है। यूपी के लोगों को भी सपा का यह कदम ठीक नहीं लगा होगा।

जब हमें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया तो उस वक्त मैं मुलायम सिंह के उस कार्यक्रम में मौजूद नहीं था। जनता दरबार के बाद मीडिया से बातचीत में मुझे सीएम उम्मीदवार की बात पता चली।

मुलायम सिंह यूनिवर्सिटी अॉफ सेकुलरिज्म के चांसलर हैं क्या और हम लोग वहां के रिसर्चर। कोई किसी को सेकुलर का सर्टिफिकेट कैसे दे सकता है, लोग नहीं जानते हैं क्या ये बात। (नीतीश कुमार सेकुलर नहीं है, मुलायम के उस बयान के जवाब में)

हम तो मंच पर बैठे थे, नरेंद्र मोदी मेरे पास आए और हाथ खींचकर जबरन फोटो खींचाई थी। हम अपने काम के दम पर वोट मांगने आए हैं। बीजेपी के पास कैंडिडेट्स की कमी है इसीलिए अपने सर्वोच्च नेता को मैदान में उतार दिया है। हम काम के दम पर वोट मांग रहे हैं दूसरी ओर जुबान चलाकर वोट मांगा जा रहा है।

15-20 लाख रुपये गरीबों को मुफ्त में देने की बात कही थी। किसानों को लागत का 50 फीसद बढ़ाकर समर्थन मूल्य देने की बात की थी, यूथ को रोजगार देने की बात कही थी। इनमें से कितने वादें पूरे हुए। आप (नरेंद्र मोदी) अभी तक कुछ नहीं कर सके तो आगे क्या कर सकेंगे। वे सिवाय घोषणा के कुछ नहीं कर सकते।

जनधन योजना के कितने खाते आज सक्रिय है, बता सकते हैं। जनधन कार्यक्रम तो पुराना है, बस नाम नया दे दिया गया। कितने लोगों को 5000 का ओवरड्राफ्ट मिला। खाता खुलने का लाभ कितने लोगों को मिला ये बताएं। आठ हजार करोड़ रुपये गरीब का रुपया जमा करवाकर पैसा किसे दे दिया।

16 महीने में नारे गढ़ने के सिवाय कुछ नहीं हो रहा है। भाजपा के अंदर उत्साह का महौल है, देश में उत्साह नहीं है। भाजपा के लोग अकेले में मिलते हैं तो वे बताते हैं वहां भी उत्साह नहीं है। प्रधानमंत्री, गवर्नर की जातीय पहचान प्रदर्शित की गई, यह कैसी बात है। जातीय राजनीति का आरोप दूसरों पर लगाते हैं और खुद इस तरह की बात करते हैं।

बीजेपी के लोग जाति की राजनीति कर रहे हैं। कल आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कह दिया तो बात सामने आ गई। पता चल गया कि लोगों को बहलाने के लिए प्रधानमंत्री और गवर्नर की जाति बताई गई। आरएसएस जो कहेंगा उसे तो ये लोग मान ही जाएंगे। शिविर में बीजेपी के सभी नेता शामिल हुए या नहीं। पीएम की जाति बताओ और एससी, एसटी को जो विशेष अवसर मिला है उसे खत्म कर दो ये कैसा विकास है।

पीएम ने कहीं पॉलिटिकल शब्द का प्रयोग किया है क्या। डीएनए क्या गाली नहीं है? क्या किसी को गाली दी जा सकती है, हमने तो अपना विरोध ही दर्ज कराया। उनसे ये शब्द वापस लेने की गुजारिश की, लेकिन जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो हमने विरोध शुरू कर दिया।

लोग भूखे रह सकते हैं, लेकिन बेइज्जती नहीं बर्दाश्त कर सकते। उन्होंने मेरी नहीं पूरे बिहार की बेइज्जती की। पीएम को पता नहीं है कि गांव के लोगों ने डीएनए की बात को क्या समझ लिया। हम बिहारी है या नहीं इसका सर्टिफिकेट चाहिए? आजादी की लड़ाई में जिनके पुरखों का कोई योगदान नहीं है, क्या वे हमें डीएनए सही होने का सर्टिफिकेट देंगे।

भारतीय समाज में जाति व्यवस्था एक सच्चाई है। इसे नष्ट होना चाहिए। इसके समाप्त होने के बाद मुझे खुशी होगी। एनडीए जिनको टिकट दे रही है उनका सोशल प्रोफाइल जारी कर रही है, दूसरी पार्टी जारी नहीं करेगी। नरेंद्र मोदी को पहला ओबीसी प्रधानमंत्री बताया जा रहा है, इसका जवाब नहीं दिया जाएगा। बीजेपी के लोग लोगों को जातीय आधार पर बांट रहे हैं। जाति को प्रकट करना शुरू किया बीजेपी ने लालू अब जवाब दे रहे हैं तो उन पर जातिवाद का आरोप लगा रहे हैं।

Edited By: Amit Alok