पटना, राज्य ब्यूरो: Nitish said in Delhi No effect on revenue from liquor ban and applicable in the whole country: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने शराबबंदी अभियान (Liquorban Campaign) में बिहार को दूसरे प्रदेशों के लिए रोल मॉडल (Roll Model) बताया और इसे पूरे देश में लागू करने पर जोर दिया। दिल्ली में रविवार को आयोजित 'शराब मुक्त भारत' पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शराबबंदी से राजस्व संग्रह पर कोई असर नहीं पड़ता है। बिहार उदाहरण है कि शराबबंदी के बाद समाज में बड़ा बदलाव आया है। धार्मिक एवं वैज्ञानिक नजरिए से भी यह जरूरी है। सम्मेलन का आयोजन मिलित ओडिसा-निशा निवारण अभियान (मोना) द्वारा किया गया था, जिसमें नीतीश कुमार मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए थे। 

इस्‍कॉन मंदिर में की पूजा-अर्चना 

इसके साथ ही मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार दिल्‍ली स्थित इस्‍कॉन मंदिर भी गए। वहां उन्‍होंने पूजा-अर्चना की। उन्‍होंने बिहार समेत देश-दुनिया के लोगों की खुशहाली की कामना की। 

याद आए पूर्व पीएम मोरारजी देसाई

नीतीश ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि नशा मुक्ति के लिए गांधीजी ने जो संदेश दिया था, उसे देश ने उसी रूप में नहीं माना। बिहार ने गांधीजी के सपने को पूरा करने की कोशिश की है। मोरारजी देसाई जब प्रधानमंत्री बने थे तो उन्होंने भी शराबबंदी कानून लागू करने की कोशिश की थी, किंतु सफल नहीं हो सके थे। बाद में भी कई राज्यों ने प्रयास किया। आज भी कई राज्यों में लोग मद्य निषेध के पक्ष में हैं। 


शराबबंदी से सबसे ज्‍यादा फायदा गरीबों व महिलाओं को

नीतीश ने बिहार में शराबबंदी अभियान के बारे में शुरू से अबतक के प्रयासों और परिणामों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा फायदा गरीबों एवं महिलाओं को हुआ है। पूरे प्रदेश में शांति का माहौल है। पर्यटकों की संख्या भी बढ़ रही है। उन्‍होंने कहा कि अब देश के कोने-कोने से शराबबंदी की आवाज उठने लगी है। शराबबंदी नीति की जानकारी के लिए कई राज्यों से प्रतिनिधि बिहार आ चुके हैं। 2017 में कर्नाटक से, 2018 में छत्तीसगढ़ से एवं दिसंबर 2019 में राजस्थान से टीम आई और शराबबंदी के क्रियान्वयन की जमीनी सच्चाई से अवगत हुई। राजस्व के खतरे को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी से पांच हजार करोड़ की राजस्व हानि की भरपाई दूसरी सेवाओं से हो रही है। पांच के बदले दस हजार करोड़ लोगों की जेब में जा रहा है। कुछ लोग शराब पीने को अपने मौलिक अधिकारों से जोड़ते हैं। ऐसे तर्कों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि शराब पीना और उसका व्यवसाय मौलिक अधिकार नहीं है। 


नशे की लत छुड़ाने की व्यवस्था भी बिहार में

नीतीश ने कहा कि लोगों के सामाजिक स्तर सुधारने के लिए बिहार में न सिर्फ शराब पर पाबंदी लगाई गई है, बल्कि नशे की लत छुड़ाने की व्यवस्था भी की गई है। अभ्यस्त लोगों की सेहत का ख्याल रखते हुए जिलों में नशामुक्ति केंद्र खोले गए हैं, जहां डॉक्टर, नर्स एवं सलाहकार की भी तैनाती की गई है। प्रचार-प्रसार भी किया गया। लोगों ने भी इसे पूरा समर्थन दिया। मानव शृंखला का विश्व कीर्तिमान इसका उदाहरण है, जिसमें साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लेकर पूरी दुनिया को संदेश दिया। 


शराब के दुष्परिणामों से पूरी दुनिया चिंतित

उन्‍होंने यह‍ भी कहा कि शराब के दुष्परिणामों से पूरी दुनिया चिंतित है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में विस्तृत आंकड़े दिए गए हैं। समाज को शराब से निजात दिलाने के लिए अभियान चलाने पर जोर दिया गया है। 2016 में शराब से दुनिया में 30 लाख लोगों की मौत हुई है, जो कुल मृत्यु का 5.3 फीसद है। इसके सेवन से बूढ़े लोगों की तुलना में युवाओं की ज्यादा मौत हो रही है। 20 से 39 उम्र वर्ग के लोगों में 13.5 फीसद मृत्यु की वजह शराब है। शराब से करीब दो सौ तरह की बीमारियां होती हैं। 

बिहार की पहल को वक्ताओं ने सराहा

नीतीश ने कहा कि शराब मुक्त भारत के लिए वह आजीवन प्रयास करते रहेंगे। समाज सुधार की दिशा में नीतीश की पहल को वक्ताओं ने सराहा। आंदोलन को राष्ट्रीय स्वरूप देने के लिए नेतृत्व करने की अपील की। कार्यक्रम को राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, पूर्व विधायक, स्वतंत्रता सेनानी तथा मोना के अध्यक्ष पद्म चरण नायक, गांधीवादी कार्यकर्ता राधा भट्ट, बनी दास, स्वामी ब्रजेंद्र नारायण दास, अधिवक्ता अदिश अग्रवाल, आचार्य संतोषानंद, शराबबंदी आंदोलन की अध्यक्ष पूजा छाबड़ा ने भी संबोधित किया। 

Posted By: Rajesh Thakur

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