Bihar Politics: लोकसभा सांसद रहते मुख्यमंत्री बने थे नीतीश कुमार, अब राज्यसभा के रास्ते लेंगे विदाई
नीतीश कुमार जल्द ही बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और राज्यसभा जाएंगे। 21 साल पहले लोकसभा सांसद रहते ...और पढ़ें
HighLights
नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ राज्यसभा जाएंगे।
एनडीए ने उनके फैसले का पूरा सम्मान किया।
अरुण अशेष, पटना। करीब 21 साल पहले लोकसभा सदस्य की हैसियत से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार जल्द ही इस पद से विदा हो जाएंगे। संयोग यह कि यहां से उनकी अगली यात्रा राज्यसभा से शुरू होगी। नीतीश के मुताबिक, राज्यसभा में जाने की उनकी इच्छा थी।
यह वादा भी किया कि राज्य में बनने वाली नई सरकार को उनका सहयोग जारी रहेगा। विकसित बिहार बनाने का उनका संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा।
नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा था कि वे अगले पांच वर्षों का अपना कार्यकाल शायद ही पूरा कर पाएं, लेकिन इसे विराम कब देंगे, इसके बारे में कोई तिथि तय नहीं की गई थी। यह तिथि इतनी करीब होगी, इसका अनुमान नहीं था।
एनडीए ने किया नीतीश के फैसले का सम्मान
अब बताया जा रहा है कि राज्यसभा जाने का निर्णय उनका अपना था। एनडीए के घटक दलों ने इसका सम्मान किया। यह बात अलग है कि नीतीश के समर्थक उनकी इच्छा और सम्मान को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। वे जगह-जगह सड़क पर उतर गए हैं।
हालांकि, ऐसे मामलों में कार्यकर्ताओं का विरोध क्षणिक होता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि नई सरकार के गठन के साथ ही सबकुछ पुराने ढर्रे पर आ जाएगा। नामांकन के समय उपस्थित रह कर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सम्मान का प्रदर्शन किया। शाह ने नीतीश के योगदान की प्रशंसा भी की।
नीतीश को मिला 'विकास पुरुष' का नाम
बिहार की जनता ने नीतीश कुमार को विकास पुरुष का नाम दिया। 2005 और उसके बाद के विधानसभा के सभी चुनाव उनके नाम पर लड़े गए। 2015 में वे एनडीए के बदले महागठबंधन के साथ चले गए थे, उस समय भी विधानसभा चुनाव उनके नाम पर लड़ा गया।
बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है, यह नारा उसी चुनाव में लगा था। 2020 में एनडीए के साथ वे चुनाव लड़े, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भाजपा की तुलना में जदयू को अगर कम सीटें मिलती हैं, तब भी नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे। भाजपा ने यह वादा निभाया।
भाजपा को 74 और जदयू को 43 सीटें मिली थी, नीतीश ही मुख्यमंत्री बने। हालांकि, बीच में वह एकबार फिर महागठबंधन के साथ चले गए। 2024 में एनडीए में वापस आए। 2025 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने नारा दिया-2025 से 2030, फिर से नीतीश।
भाजपा ने एकबार फिर उनका सम्मान किया। भाजपा की तुलना में चार सीटें कम आने के बावजूद नीतीश को मुख्यमंत्री बनाया गया।
हां, भाजपा ने गृह विभाग अपने पास रख कर संकेत दे दिया था कि वह सत्ता में अपनी हिस्सेदारी हैसियत के अनुसार चाहती है, लेकिन यह आभास नहीं था कि नीतीश कुमार की राज्यसभा जाने की इच्छा इतनी जल्दी पूरी हो जाएगी।
सभी दलों का सहयोग मिला
बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार अकेले ऐसे राजनेता हैं, जिनसे किसी दल ने परहेज नहीं किया है। भाजपा से अलग होने के बाद जब कभी एनडीए में वापस लौटे, उनके सम्मान में कमी नहीं आई। इसी तरह उन्होंने उस राजद के साथ दो बार सरकार का गठन किया, जिसे परास्त कर वह सत्ता में आए थे।
राजद या महागठबंधन के साथ सरकार बनाने के दौरान उन्हें कांग्रेस और वाम दलों का भी समर्थन मिला। आज की तिथि में राज्य में ऐसा कोई दल नहीं है, जिसने समय-समय पर सरकार बनाने में नीतीश का समर्थन नहीं किया हो।
