बिहार ग्रामीण बैंक की वित्तीय सेहत सुधारने की कवायद, घाटे वाली शाखाओं को बंद करने और एनपीए घटाने की सलाह
नाबार्ड ने बिहार ग्रामीण बैंक सहित छह क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की वित्तीय स्थिति की गहन समीक्षा की है। बैंकों को ...और पढ़ें

बिहार ग्रामीण बैंक
HighLights
नाबार्ड ने बिहार ग्रामीण बैंक की वित्तीय स्थिति की समीक्षा की।
घाटे वाली शाखाएं बंद करने और एनपीए घटाने का सुझाव।
अपर्याप्त कर्मचारी और अकुशल तकनीक प्रमुख चुनौतियां।
राज्य ब्यूरो, पटना। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने बिहार ग्रामीण बैंक सहित छह क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की समीक्षा करते हुए उनकी वसूली, पूंजीगत मजबूती और परिचालन प्रदर्शन का गहन विश्लेषण किया है।
पूंजी की सुदृढ़ता और संकटग्रस्त ऋणों की वसूली से लेकर घाटे में चल रही शाखाओं को कम करने और डिजिटल क्षमताओं में सुधार का सुझाव दिया है। यद्यपि सुधारात्मक उपाय विभिन्न बैंकों में भिन्न-भिन्न हैं, लेकिन इनका सामान्य उद्देश्य उनकी वित्तीय स्थिति और परिचालन स्थिरता में सुधार करना है।
शाखाओं को कम करने पर विशेष जोर
बिहार ग्रामीण बैंक के लिए सुधार रणनीति में परिसंपत्ति गुणवत्ता, पूंजी सुदृढ़ता और घाटे में चल रही शाखाओं को कम करने पर विशेष जोर दिया गया है। इन उपायों में ऋण वसूली में सुधार, शाखा नेटवर्क को युक्तिसंगत बनाना और निगरानी को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग सम्मिलित हैं।
आल इंडिया ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव डीएन त्रिवेदी बता रहे कि अपर्याप्त कर्मचारी और अकुशल तकनीक दो बड़ी समस्याएं हैं। बैंकों को मित्रा समिति की अनुशंसाओं के अनुसार रिक्त पदों को भरना होगा।
अपर्याप्त कर्मचारियों से शाखाओं के दैनिक संचालन, सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन, जमीनी स्तर पर पहुंच और व्यावसायिक लक्ष्यों की प्राप्ति पर असर पड़ता है। बकाया खातों पर नजर रखने, फालो-अप शेड्यूल करने और वसूली की निगरानी के लिए एप-आधारित निगरानी प्रणाली के माध्यम से प्रौद्योगिकी भी एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां) को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
बिहार ग्रामीण बैंक की दो चुनौतियां
- अपर्याप्त कर्मचारी : कर्मचारियों की कमी से बैंक शाखाओं का सुचारू रूप से संचालन प्रभावित हो रहा है।
- अकुशल तकनीक : तकनीकी सीमाएं परिचालन दक्षता और बैंकिंग सेवाओं के प्रसार में बाधा डाल रही हैं।
दो उपाय
- ब्याज में प्रतिस्पर्द्धा : बैंक को प्रतिस्पर्द्धी ऋण दरें पेश करनी होंगी। क्रेडिट गुणवत्ता से समझौता किए बिना उच्च प्रतिफल वाले खुदरा ऋणों का विस्तार करना होगा।
- प्रभावी प्रचार-प्रसार : ग्राहकों को आकर्षित करने, अपने उत्पादों और योजनाओं को बढ़ावा देने और शुद्ध ब्याज मार्जिन में सुधार करने के लिए प्रचार-प्रसार करना करना होगा।
कुल व्यवसाय : 83,082 करोड़ रुपये का कुल व्यवसाय है। उसमें 50,377 करोड़ की जमा राशि और 32,705 करोड़ का ऋण है। इस वर्ष 505.90 करोड़ का शुद्ध लाभ हुआ है।
शाखा और सेवा : 3.50 करोड़ से अधिक ग्राहकों को सेवा दे रहा है। 2,104 शाखाओं और 26 क्षेत्रीय कार्यालयों के साथ बिहार का तीसरा सबसे बड़ा बैंक है। बाजार हिस्सेदारी 27% है।
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