पटना: डूबने के 5 दिन बाद भी नहीं मिला 24 वर्षीय युवक का शव, मां ने जितिया पर बेटे के पुतले का किया दाह-संस्कार
मनेर के खासपुर निवासी आशुतोष कुमार (24) के गंगा नदी में डूबने के पांच दिन बाद भी शव नहीं मिलने ...और पढ़ें

बेटे के पुतले का किया दाह-संस्कार (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
आशुतोष कुमार (24) पांच दिन पहले गंगा नदी में डूबा।
शव नहीं मिलने पर परिजनों ने पुतले का दाह-संस्कार किया।
जितिया व्रत रखने वाली मां ने बेटे के पुतले को विदाई दी।
संवाद सूत्र, मनेर। खासपुर निवासी अमरनाथ राय के पुत्र आशुतोष कुमार (24) के डूबने के पांच दिन बाद भी शव बरामद नहीं हो सका। बेटे के शव की तलाश में जुटे स्वजनों को जब कोई सफलता नहीं मिली तो शुक्रवार को कारुणिक माहौल में आशुतोष के पुतले का दाह-संस्कार किया गया। इस दौरान स्वजनों की आंखों से आंसू थम नहीं रहे थे।
सबसे मार्मिक दृश्य उस समय रहा, जब मां अपने बेटे के पुतले को अंतिम विदाई देते हुए दहाड़ मारकर रो पड़ी। स्वजनों ने बताया कि आशुतोष रविवार को चार दोस्तों के साथ गंगा नदी में स्नान के क्रम में छितनावां में डूब गया था।
शव नहीं मिलने से परिवार के लोग गहरे सदमे में
घटना के बाद से ही एसडीआरएफ और स्थानीय लोगों की मदद से उसकी तलाश की जा रही थी, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। शव नहीं मिलने से परिवार के लोग गहरे सदमे में हैं।

जिस बेटे की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए मां ने जिउतिया पर्व पर निर्जला व्रत रखती थी, शुक्रवार को उसी मां को अपने बेटे के पुतले का दाह-संस्कार करना पड़ा। पुतले की विदाई दिए जाने के दौरान मां की चीत्कार से वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।स्वजनों और ग्रामीणों के बीच मातम पसरा रहा।
क्या थी घटना
27 सितम्बर रविवार की दोपहर चार दोस्त आशुतोष, अरविंद, रंजन व प्रिंस गांव के ही सामने गंगा नदी में स्नान करने गए थे। स्नान करने के दौरान ही इनमें से तीन लोग डूबने लगे।आशुतोष अन्य दोस्तों को डूबता देखकर बचाना के लिए कूद पड़ा तीन लोगों को उसने तो बचा लिया लेकिन आशुतोष पानी गहरी एवं धार तेज के कारण नदी में लापता हो गया।जिसका आज तक कुछ अता पता नहीं चला।
मां को बेटे के लौटने की अभी भी है उम्मीद
6 दिनों से बेटे के लिए बदहवास माँ को अभी भी भी गंगा मईया उम्मीद है उनके बेटे से को उनसे मिलवा देगी।जवान बेटे के गम में खाना पीना 6 दिनों से छोड़ कर नदी के किनारे पर ही जमीं रहती है।
