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मोकामा में नए रेल पुल पर दौड़ी पहली ट्रेन, रात 1:40 बजे महानंदा एक्सप्रेस ने 90 की रफ्तार से पार की गंगा

Published: Mon, 05 Oct 2026 09:38 AM (IST)

मोकामा में गंगा नदी पर बने नए डबल लाइन रेल पुल पर सोमवार रात महानंदा एक्सप्रेस पहली ट्रेन के रूप ...और पढ़ें

उत्तर-पूर्व जाने वाली ट्रेनों को भी मिलेगा फायदा

उत्तर-पूर्व जाने वाली ट्रेनों को भी मिलेगा फायदा

HighLights

  1. मोकामा में गंगा पर नए डबल लाइन पुल पर पहली ट्रेन गुजरी।

  2. इस पुल से गंगा पार रेल परिचालन क्षमता में भारी वृद्धि हुई।

  3. 2400 करोड़ की परियोजना, राजेंद्र सेतु के समानांतर बना पुल।

जागरण संवाददाता, पटना। मोकामा में गंगा पर बने नए डबल लाइन रेल पुल से सोमवार की रात पहली ट्रेन गुजरी। रात 1:40 बजे महानंदा एक्सप्रेस ने नए पुल पर परिचालन शुरू किया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार ट्रेन करीब 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पुल पार कर गई। इस नए पुल पर ट्रेनों को अधिकतम 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की क्षमता है।

नए पुल के चालू होने के साथ ही मोकामा में गंगा पार करने के लिए रेल परिचालन की क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है। राजेंद्र सेतु के समानांतर बने इस पुल पर दो नई रेल लाइनें हैं।

राजेंद्र सेतु के साथ अब तीन रेल लाइनें

नया डबल लाइन पुल राजेंद्र सेतु के समानांतर पटना छोर की तरफ करीब 50 मीटर की दूरी पर बनाया गया है। खास बात यह है कि नए पुल पर परिचालन शुरू होने के बाद भी पुराने राजेंद्र सेतु पर ट्रेनें चलती रहेंगी।

इस तरह गंगा पार करने वाले इस रेलखंड पर अब कुल तीन रेल लाइनें उपलब्ध हो गई हैं। इससे यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के परिचालन में रेलवे को अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।

दो दिन के संरक्षा निरीक्षण के बाद मिली हरी झंडी

रेल संरक्षा आयुक्त, पूर्वी सर्किल कोलकाता गुरु प्रकाश ने शनिवार और रविवार को नवनिर्मित पुल समेत राजेंद्रपुल-हाथीदह ऊपर-रामपुर डुमरा रेलखंड और टाल स्टेशन का दो दिवसीय संरक्षा निरीक्षण किया था।

निरीक्षण पूरा होने के बाद पुल को परिचालन के लिए उपलब्ध कराया गया। पहली ट्रेन के गुजरने के साथ ही करीब 2400 करोड़ रुपये की इस महत्वपूर्ण परियोजना का परिचालन चरण शुरू हो गया।

2400 करोड़ की परियोजना, 15.5 किमी लंबाई

करीब 2400 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना की कुल लंबाई लगभग 15.5 किलोमीटर है। इसमें गंगा पर बना 1.9 किलोमीटर लंबा मुख्य रेल पुल भी शामिल है।

मुख्य पुल में नदी के ऊपर 17 स्टील स्पैन बनाए गए हैं। इसके अलावा 3.6 किलोमीटर लंबा रेल वायडक्ट, आठ लघु पुल, दो सड़क उपरि पुल और तीन रेल ओवर रेल का निर्माण किया गया है।

एक पुल की जगह अब गंगा पर तीन रेल लाइनें

नए पुल के चालू होने से मोकामा-राजेंद्र पुल रेलखंड पर ट्रेनों के परिचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता मिल गई है। पहले गंगा पार करने के लिए राजेंद्र सेतु की एक रेल लाइन पर निर्भरता थी।

अब दो नई लाइनें मिलने से ट्रेनों की क्रासिंग और संचालन के दौरान होने वाली बाधाएं कम होंगी। रेलवे के अनुसार, परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र में रेल यातायात की क्षमता अनुमानतः 2.5 गुना तक बढ़ सकती है।

उत्तर-पूर्व जाने वाली ट्रेनों को भी मिलेगा फायदा

नई रेल लाइन का लाभ उत्तर और दक्षिण बिहार के साथ-साथ उत्तर-पूर्वी राज्यों की ओर जाने वाली यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों को भी मिलेगा।

अतिरिक्त लाइनें उपलब्ध होने से ट्रेनों के संचालन को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकेगा। इससे इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर भविष्य में ट्रैफिक बढ़ने की स्थिति में भी रेलवे को अतिरिक्त क्षमता मिलेगी।

67 साल पुराने राजेंद्र सेतु पर भी चलेंगी ट्रेनें

गंगा पर बने पुराने राजेंद्र सेतु का शिलान्यास वर्ष 1952 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था। दो दिसंबर 1959 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसका उद्घाटन किया था।

एकल रेल लाइन वाला यह पुल करीब 67 वर्षों से इस क्षेत्र में रेल संपर्क की महत्वपूर्ण कड़ी रहा है। नया पुल बनने के बाद भी इसे रेल परिचालन से हटाया नहीं जाएगा। दोनों पुलों के इस्तेमाल से संचालन के विकल्प बढ़ेंगे।

अब औपचारिक उद्घाटन की तैयारी

नए पुल पर परिचालन शुरू होने के बाद रेलवे ने इसके औपचारिक उद्घाटन की तैयारी भी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पुल का उद्घाटन किए जाने की संभावना है।

हालांकि, उद्घाटन कार्यक्रम की आधिकारिक तिथि अभी घोषित नहीं हुई है। परिचालन शुरू होने के साथ ही मोकामा में गंगा पार रेल यातायात के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित नई क्षमता अब जमीन पर दिखाई देने लगी है।

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