मोकामा में चुनावी हिंसा से सुप्रीम कोर्ट तक: दुलारचंद हत्याकांड की पूरी कहानी, अनंत सिंह को क्यों करना होगा सरेंडर?
मोकामा में दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व विधायक अनंत सिंह की पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत ...और पढ़ें

दुलारचंद यादव की हत्या का मामला एक साल बाद फिर सुर्खियों में
HighLights
दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से झटका।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर लगाई रोक।
अनंत सिंह को 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का आदेश।
डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान मोकामा में हुई हिंसक झड़प और दुलारचंद यादव की हत्या का मामला एक साल बाद फिर सुर्खियों में है। इस हत्याकांड में नाम आने के बाद गिरफ्तार हुए मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी।
हालांकि, दुलारचंद यादव के पोते की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगा दी और अनंत सिंह को एक दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
30 अक्टूबर 2025 को हुई इस घटना ने न केवल मोकामा की राजनीति में हलचल मचाई, बल्कि चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए। आइए जानते हैं, आखिर उस दिन मोकामा में क्या हुआ था और मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा।
30 अक्टूबर 2025: चुनाव प्रचार के दौरान आमने-सामने आए समर्थक
30 अक्टूबर 2025 को मोकामा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार चल रहा था। जन सुराज प्रत्याशी प्रियदर्शी पीयूष के समर्थन में दुलारचंद यादव अपने समर्थकों के साथ प्रचार कर रहे थे।
इसी दौरान तारतर और बसावनचक इलाके के आसपास अनंत सिंह के समर्थकों और दुलारचंद यादव के पक्ष के लोगों के बीच विवाद हो गया।
शुरुआत कहासुनी से हुई, लेकिन देखते ही देखते मामला हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच मारपीट और पत्थरबाजी की खबरें सामने आईं। इसी दौरान दुलारचंद यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई।
प्राथमिकी में अनंत सिंह पर गोली चलाने का आरोप
दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार की शिकायत पर घोसवरी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। इसमें अनंत सिंह समेत कई लोगों को आरोपित बनाया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि विवाद के दौरान दुलारचंद यादव को गाड़ी से बाहर खींचा गया। इसके बाद अनंत सिंह ने उन पर गोली चलाई, जो उनके बाएं पैर के टखने के पास लगी। प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया गया कि अन्य लोगों ने उनके साथ मारपीट की और थार वाहन से कुचल दिया।
हालांकि, प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की पुष्टि और प्रत्येक आरोपित की भूमिका का निर्धारण जांच तथा अदालत की प्रक्रिया के अधीन है।
1 नवंबर की रात अनंत सिंह की गिरफ्तारी
घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी। मामले में नामजद होने के बाद अनंत सिंह को एक नवंबर 2025 की देर रात गिरफ्तार कर लिया गया। उनके साथ दो अन्य लोगों को भी पकड़ा गया।
पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और वीडियो फुटेज, गवाहों के बयान तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। बाद में मामले की जांच में सीआईडी को भी लगाया गया।
जेल में रहते हुए लड़ा चुनाव, फिर मिली जमानत
गिरफ्तारी के बाद अनंत सिंह न्यायिक हिरासत में रहे। इसके बावजूद उन्होंने मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।
करीब साढ़े चार महीने जेल में रहने के बाद 19 मार्च 2026 को पटना हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आ गए। हालांकि, दुलारचंद यादव के परिजन इस फैसले से संतुष्ट नहीं थे।
दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उनकी याचिका पर शीर्ष अदालत में सुनवाई हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत आदेश पर लगाई रोक
30 अक्टूबर 2026 को हत्याकांड के एक साल पूरे होने के दिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अहम आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगाते हुए अनंत सिंह को एक दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार पुलिस को चार महीने के भीतर जांच पूरी करने को भी कहा। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले को महज राजनीतिक विवाद के रूप में देखने पर सवाल उठाए और हत्या की गंभीरता को रेखांकित किया।
अनंत सिंह की ओर से बेटी की शादी का हवाला देकर सरेंडर के लिए और समय मांगा गया था, लेकिन अदालत ने तत्काल राहत नहीं दी।
अब अनंत सिंह को क्यों करना होगा सरेंडर?
सुप्रीम कोर्ट की ओर से पटना हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद अनंत सिंह को एक दिसंबर 2026 तक सरेंडर करना होगा। यह आदेश उन्हें फिर से न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की दिशा में अहम कदम है।
अब पुलिस को सुप्रीम कोर्ट की तय समय-सीमा के भीतर जांच पूरी करनी है। इसके बाद मामले में जुटाए गए साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।
एक साल बाद भी चर्चा में है मोकामा का यह हत्याकांड
30 अक्टूबर 2025 को चुनाव प्रचार के दौरान शुरू हुआ विवाद दुलारचंद यादव की मौत, अनंत सिंह की गिरफ्तारी, हाईकोर्ट से जमानत और अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश तक पहुंच चुका है। इस मामले में आरोपों और कानूनी दलीलों के बीच अंतिम फैसला अदालत को करना है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अनंत सिंह के सामने एक दिसंबर तक सरेंडर करने की समय-सीमा है। वहीं, पुलिस जांच पूरी होने और आगे की न्यायिक कार्रवाई पर इस चर्चित हत्याकांड की अगली दिशा निर्भर करेगी।
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