राजधानी होने की वजह से पटना में जमीन की कमी है लेकिन उद्योगों के विकास की राह में यह अवरोध है, यह कहना पूरी तरह से सही नहीं होगा। यहां लघु उद्योग, कृषि आधारित उद्योग, आइटी सेक्टर, सेवा क्षेत्र को तरजीह देकर पटना को इंडस्ट्रियल हब के तौर पर विकसित किया जा सकता है। दैनिक जागरण के 'माय सिटी-माय प्राइड' अभियान के तहत इकोनॉमी पिलर पर आयोजित परिचर्चा में ये बातें सामने आईं। शहर के प्रसिद्ध उद्यमियों, प्रमुख व्यावसायिक संगठनों के शीर्ष पदाधिकारियों, प्रतिनिधियों ने पटना में निवेश करने की इच्छा भी जाहिर की। कुछ मुश्किलों की चर्चा के साथ ही राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ओर से किये जा रहे सार्थक प्रयासों को उन्होंने संतोषजनक बताया। हालांकि, पटना के औद्योगिक विकास के लिए गंभीर प्रयास करने की जरूरत पर भी उन्होंने बल दिया। जानते हैं उद्यमियों का नजरिया...

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रिवहन व्यवस्था सुचारु करने की जरूरत
बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष एकेपी सिन्हा ने कहा कि पटना में तैयार उत्पादों और कच्चे माल की ढुलाई के लिए रेल और सड़क मार्ग को समृद्ध करने की जरूरत है। दीघा रेल पुल बन चुका है। इससे राहत मिली है। इसके एप्रोच रोड को ठीक करने और वन-वे की जगह दोतरफा परिवहन शुरू करने से बहुत हद तक निदान हो सकता है। रेल मार्ग से उत्तर व दक्षिण बिहार में माल ढुलाई की राह भी आसान बनानी होगी।

प्रोडक्शन यूनिट की जरूरत
बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के उपाध्यक्ष संजय भरतिया ने कहा कि पटना की आबादी बड़ी तो है ही, अब और तेजी से बढ़ रही है। इसलिए यहां उत्पादों की खपत बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन, इसका 10 फीसद भी उत्पादन नहीं होता है। यहां प्रोडक्शन यूनिटों के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। यहां इंफ्रास्ट्रक्चर में प्रगति हुई है। सड़कें बनीं हैं। बिजली भी पर्याप्त है। अब मैन्यूफैक्चर की दिशा में बढऩे की जरूरत है। प्रत्येक 100 किलोमीटर पर एयरपोर्ट की जरूरत भी है।

एग्रो इंडस्ट्रीज में बढ़े कदम
पटना में स्मॉल और एग्रो बेस्ड इंडस्ट्री की भरपूर गुंजाइश है। इस दिशा में काम भी हो रहा है। छोटी इकाइयों की कमी नहीं है। जरूरत है कि ये आगे कैसे बढ़ें। सरकार को इन चालू इकाइयों की मुश्किलों को आसान बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। दूसरी प्रमुख बात यह कि यहां टूरिज्म के क्षेत्र में भी कम संभावना नहीं हैं। इसके लिए होटल और सड़क में और सुधार करने की जरूरत है। ये मानना है सुबोध कुमार का जो बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व महासचिव रह चुके हैं.

एमएसएमई क्षेत्र में बहुत गुंजाइश
पाटलिपुत्र इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष बलराज कपूर का कहना है कि पटना में पर्याप्त मात्रा में पानी है। बिजली है। सड़कें भी हैं। युवा शक्ति भी है। फिर भी हम अभी उपभोक्ता बने हुए हैं। अब उत्पादकता की ओर बढऩा होगा। युवा शक्ति उद्यम की राह आगे बढ़ऩा चाहती है। प्रक्रियागत पेंच को आसान बनाना होगा। अगर हमारी नीति अच्छी है तो सफलता मिलनी चाहिए। यहां एमएसएमई यानी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं।

लघु उद्योगों का हो रहा विकास
बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के महामंत्री अमित मुखर्जी ने कहा कि पटना में लघु उद्योगों का विकास हो रहा है। कृषि आधारित उद्योग भी लग रहे हैं। इसके बावजूद बहुत कुछ करने की गुंजाइश भी है। दो प्रमुख विषय हैं। पहला जमीन का मुद्दा है, और दूसरा पूंजी की जरूरत है। लैंड बैंक बनाने की मांग उद्योग जगत बहुत दिनों से कर रहा है। इस पर पहल की जरूरत है। साथ ही बैंकों से नये उद्यमियों को आसानी से कर्ज दिलाने की दिशा में भी गंभीर कोशिश होगी।

अपनी कमजोरी को चुनौती के रूप में लें
बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पूर्व उपाध्यक्ष शशि मोहन ने कहा, "उद्योग की राह पर पटना आगे बढ़ा है। कुछ कमियां भी हैं। इसके लिए हमें सरकार को दोष नहीं देना चाहिए। अपनी कमजोरी को ही चुनौती के रूप में लेना होगा। मैं फ्रोजन व्यवसाय से जुड़ा हूं। एक उदाहरण लें- पटना के आसपास के इलाकों का हरा मटर पांच रुपये किलो की दर पर दूसरे प्रदेशों में जाता है, फिर वही मटर कुछ दिनों के बाद बिहार आकर 160 रुपये किलो बिकता है। संसाधन दुरुस्त करने की जरूरत है।"

लघु उद्योग में बढ़ रहे कदम
कोबरा सेंटिनल प्राइवेट लिमिटेड के एमडी सुजय सौरभ ने कहा कि लघु उद्योगों का पटना में तेजी से विकास हुआ है। यहां की महिलाओं ने नमकीन, पापड़, बड़ी, आचार सहित दर्जनों व्यंजनों को तैयार कर एक बड़ा बाजार तैयार किया है। बड़े ब्रांडेड प्रतिष्ठानों तक भी इनकी पहुंच बन चुकी है। सबकुछ के बावजूद अभी दक्षता की कमी है। स्किल्ड मैन पॉवर की ओर हमें बढऩा होगा। प्रशिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ानी होगी जिससे युवाओं में दक्षता आ सके।

लैंड, लेबर और कैपिटल की जरूरत
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, बिहार चैप्टर के अध्यक्ष सत्यजीत सिंह ने कहा, "उद्योगों के विकास के लिए तीन बातें प्रमुख हैं। लैंड, लेबर, और कैपिटल। अगर पटना को इंडस्ट्रियल हब बनाना है तो इन तीनों बातों को गंभीरता से लेना होगा। इच्छा शक्ति होगी तो राह अवश्य मिलेगी। मैं मखाना व्यवसायी हूं। बिहार की खाद्य प्रसंस्करण नीति में संशोधन की भी उम्मीद रखता हूं। इसमें 35 फीसद अनुदान की बात जोडऩे से नतीजा बेहतर हो सकता है।"

दवा फैक्ट्रियां देंगी रोजगार
रेवियन फार्मास्यूटिकल लिमिटेड के एमडी राकेश मिश्रा का कहना है कि बिहार में प्रतिवर्ष 30 हजार करोड़ रुपये की दवाएं बिकती हैं। दवाओं के लिए पटना प्रमुख बाजार है। दवा की फैक्ट्री कम जमीन में स्थापित हो जाती है। बिहार में 202 दवा फैक्ट्रियां भी हैं। बड़ा सवाल यह कि इनमें पांच कंपनियां भी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन सर्टिफाइड नहीं हैं। सरकार को इस विषय को गंभीरता से लेना चाहिए। दवा इकाइयां दस कट्ठे में स्थापित हो जाती हैं, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी करती हैं।

वेबसाइट को दुरुस्त करने की जरूरत
बिहार महिला उद्योग संघ की अध्यक्ष उषा झा का कहना है कि पटना में पूर्व की अपेक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े पैमाने पर सुधार हुआ है। इससे उद्यमियों को राहत मिली है। उद्योगों के लिए सरकार की नीतियां भी अच्छी हैं। ऑनलाइन सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। मुश्किल यह कि वेबसाइट खुलती नहीं है। इसमें सुधार हो तो हर राह आसान हो जाएगी। ड्राईपोर्ट की जरूरत महसूस की जा रही है। इस दिशा में आगे बढऩे की जरूरत है जिससे उद्यमियों की समस्याओं का समाधान हो सके।

आइटी क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं
बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की नेटवर्किंग कमेटी के चेयरमैन मनीष तिवारी ने कहा कि पटना में आइटी क्षेत्र में हम तेजी से आगे बढ़ सकते हैं। वर्तमान युग भी आइटी का ही है। सभी उद्यमियों, छात्रों, कामकाजी लोगों को आइटी सेवा की जरूरत पड़ रही है। बहुत बड़ा बाजार है। दूसरी बात यह कि सरकार के विभागों के बीच तालमेल अभी और बढ़ाने की जरूरत है। कुछ उद्यम कई विभागों से जुड़े हैं। एक विभाग से दूसरे विभाग की प्रक्रिया और सहज होनी चाहिए।

माइक्रो सेगमेंट का हो विकास
उद्यमी शंभूनाथ पांडेय ने कहा कि पटना में माइक्रो सेगमेंट की श्रेणी वाले उद्योगों के विकास के लिए सार्थक प्रयास करने की जरूरत है। माइक्रो यानी सूक्ष्म उद्योग से जुड़े कारोबारी अधिक हैं। ये बहुत छोटे उद्योग हैं, इनके विकास की भी संभावनाएं हैं। यही उद्योग लघु और बाद में मीडियम श्रेणी में आ जाएंगे। महिलाएं इस श्रेणी में काम कर रही हैं। ऐसे घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए अलग से नीति बनाने की जरूरत है।

पर्यटन स्थल बने पटना
मौर्य लोक शॉपकीपर कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेश कुमार डब्ल्यू ने कहा कि पटना में दूसरे प्रदेशों, विदेशों से आने वाले लोगों की संख्या बहुत बड़ी है। इस संख्या में वृद्धि भी हो रही है। जरूरत है कि पटना को हम पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करें। इस दिशा में काम भी हुआ है। बुद्ध सर्किट, जैन सर्किट, रामायण सर्किट की अवधारणा साकार हुई है। आम, लीची, केला की पैदावार पटना के आसपास के इलाकों में होती है। इन्हें प्रोसेस कर उत्पाद में तब्दील करने की जरूरत है।

पटना में हो रहा है निवेश
स्काई लाइन लिमिटेड के संजय राय ने कहा कि व्यापार के लिए कुछ मूलभूत सुविधाओं की जरूरत होती है। रोड, सड़क, बिजली, पानी, यातायात, लॉ एंड ऑर्डर, आदि क्षेत्रों में बहुत काम हुआ है। इससे राह आसान हुई है। जरूरत है कि इन क्षेत्रों पर सरकार की पैनी नजर भी बनी रहे, क्योंकि व्यवसायी खुद इसका इंतजाम नहीं कर सकते हैं। उद्यमी पटना में निवेश करने को भी तैयार हैं। प्लास्टिक और स्टील क्षेत्र में हाल के दिनों में निवेश बढ़ा है। यह और आगे जाएगा।

टेक्सटाइल को मिले तरजीह
रंजीत सिंह, महामंत्री, बिहार टेक्सटाइल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज टेक्सटाइल के क्षेत्र में पटना में यूनिट लग रही हैं। 50 के करीब यूनिटें चल रही हैं। छोटी इकाइयां ही इनमें अधिक हैं। जरूरत है कि इस सेगमेंट को सरकार और तरजीह दे। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा। साथ ही स्थानीय मैन्यूफैक्चर होने से लागत मूल्य घटेगा और लोगों को सस्ता कपड़ा मिल सकेगा। अभी यहां की जरूरत का 90 फीसद कपड़ा बाहर से आ रहा है। स्थानीय उत्पादन बढ़ाने की भरपूर गुंजाइश बनी हुई है। बाजार की कमी नहीं है।

सरकार की कोशिश हो रही सफल
गोल्डन डेयरी प्रोडक्ट्स प्रा. लि. के एमडी बासुदेव टहलानी ने कहा, " मैं डेयरी व्यापार से जुड़ा हूं। मुझे सरकार से पूरी तरह से मदद मिली है। सरकार के समर्थन से ही मेरा व्यवसाय फल-फूल रहा है। डेयरी क्षेत्र पर सरकार का फोकस भी है। बिहार में डेयरी से जुड़े उद्यम के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। इस दिशा में युवाओं को आगे आना चाहिए। आइसक्रीम का बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा है। पहले यह गर्मी का उत्पाद होता था, लेकिन अब हर मौसम में इसकी मांग बनी रहती है, इसलिए बाजार की कमी नहीं है।

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By Krishan Kumar