जागरण संवाददाता, पटना: दैनिक जागरण का अभियान 'माय सिटी माय प्राइड’ अब नतीजों की तरफ बढ़ रहा है। शहर को और बेहतर बनाने के लिए जो मुद्दे उठाए गए अब शहर के लोग ही उसके समाधान के लिए आगे आ रहे हैं। इसमें स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ-साथ सरकारी पदाधिकारियों का भी सहयोग मिल रहा है।

दैनिक जागरण कार्यालय में आयोजित राउंड टेबल कांफ्रेंस में विभिन्न संगठनों के जनप्रतिनिधियों ने कुछ ऐसे ही संकेत दिए। सभी ने एक स्वर में कहा कि शहर को सभी साथ मिलकर ही और बेहतर बना सकते हैं। जागरण ने जो भी मुद्दे सुझाए हैं, उसे दुरुस्त करने की दिशा में यथासंभव सार्थक पहल की जाएगी। आरटीसी में नगर निगम, रेड क्रॉस, आइएमए, पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ, बिहार पब्लिक स्कूल एंड वेलफेयर एसोसिएशन, साईं नेत्रालय, प्रहरी, मां प्रेमा फाउंडेशन आदि के प्रतिनिधि मौजूद थे।

गंदा पानी गंगा में नहीं होगा प्रवाहित
आरटीसी के तहत गंगा नदी को साफ रखने का मुद्दा उठा था। इसके लिए नमामि गंगे योजना के तहत बन रहे एसटीपी अगले साल तक बन जाएंगे। इसके बाद से गंगा में नाला का एक बूंद भी गंदा पानी नहीं गिरेगा। शहर की सभी सड़कों पर एलईडी लाइट लगाई जा रही है। अतिक्रमण मुक्त शहर के लिए अभियान चल रहा है। वेंडिंग जोन भी बनाया जा रहा है। निगम अपने स्तर से 100 करोड़ रुपये की मशीन खरीद रहा है, जिससे शहर की साफ-सफाई और बेहतर हो सकेगी।
विशाल आनंद, उप नगर आयुक्त

 

5000 युवा आपदा में रहेंगे मुस्तैद
रेडक्रॉस प्रत्येक जिले में यूथ क्लब बना रहा है। हर क्लब में 100 युवा होंगे जो आपदा के दौरान खुद के साथ-साथ लोगों की मदद करेंगे। सूबे में 5000 युवाओं को इस अभियान से जोडऩे का लक्ष्य रखा गया है। इन्हें बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग से भी जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है। शहर की सुरक्षा में ये प्रयास बड़ा कदम साबित होगा। रेड क्रॉस में दिसंबर तक आंख की सर्जरी प्रारंभ कर दी जाएगी। जांच के बाद मरीजों को 250 रुपये में चश्मा उपलब्ध कराया जा रहा है। 30 रुपये में मरीज एक माह तक कभी भी किसी भी विभाग में इलाज करा सकते हैं। स्कूल और कॉलेजों में छात्रों को फर्स्ट एड की ट्रेनिंग दी जा रही है।
नगीना शर्मा, रेड क्रॉस सोसाइटी

एलुमिनाई के सहयोग से लौटेगा पीयू का गौरव
पटना विश्वविद्यालय का गौरव उसके पूर्ववर्ती छात्रों के सहयोग से लौटाने का प्रयास किया जा रहा है। सूबे के विश्वविद्यालयों में एकेडमिक माहौल बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। इसे दुरुस्त करने के लिए छात्रसंघ प्रयासरत है। विद्यार्थियों की समस्या दूर करने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। पुसु की मांग पर पूर्ववर्ती छात्र सह केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने चार अत्याधुनिक शौचालय आवंटित किया है। एलुमिनाई सह राज्यसभा सदस्य अखिलेश प्रसाद सिंह ने साइंस कॉलेज ग्राउंड को क्रिकेट आकदमी बनाने के लिए सहमति दी है। हमलोगों की मांग पर मुख्यमंत्री ने दोबारा रिंग बस सेवा बहाल कर दी है।
दिव्यांशु भारद्वाज, अध्यक्ष, पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बनाया जा रहा माहौल
राजधानी में आधे से अधिक बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ाई करते हैं। इन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना हम सभी की जिम्मेवारी है। एसोसिएशन के माध्यम से अभियान चलाया जा रहा है। इसके साथ-साथ शिक्षा के अधिकार कानून का पालन सभी स्कूलों में अनिवार्य एसोसिएशन से जुड़े सभी स्कूलों में कर दिया गया है। दो दशक पहले बिहार-झारखंड में 10,000 निजी स्कूल थे, आज इनकी संख्या 65 हजार से आसपास है। जिसमें 40 हजार सिर्फ बिहार में हैं। लगभग 14 लाख शिक्षक और कर्मचारी निजी स्कूलों से जुड़े हैं। इनके अधिकार के लिए काम किए जा रहे हैं। पिछले 18 वर्षों से बेहतर करने शिक्षक, छात्र और अभिभावक को सम्मानित किया जा रहा है। विद्यार्थियों की सुरक्षा भी अहम मुद्दा है।
डॉ. डीके सिंह, अध्यक्ष, बिहार पब्लिक स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन।

बच्चे ही कर रहे एक-दूसरे को शिक्षित
पटना में स्लम में रहने वाले लोगों की आबादी भी लाख के आसपास है। इन्हें नजरअंदाज कर शहर को बेहतर बनाने का सपना पूरा नहीं हो सकता है। विभिन्न कॉलेजों में पढऩे वाले विद्यार्थियों के सहयोग से स्लम में रहने वाले बच्चों के लिए निशुल्क कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। संस्था एक दर्जन स्लम बस्ती में बच्चों को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध करा रही है। इसकी संख्या बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता के लिए आसपास के लोगों को भी जोड़ने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। बच्चों को अभिभावक स्कूल खुद भेजें, इसके लिए शिक्षा के महत्व से उन्हें रूबरू कराया जा रहा है।
बीरेंद्र शर्मा, अध्यक्ष, प्रहरी

सेफ सिटी के लिए मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग
छात्राओं को दुर्व्यवहार और यौन-शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए राजधानी के स्कूल और कॉलेजों में पिछले एक साल से नियमित अभियान चलाया जा रहा है। छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी जा रही है। इस अभियान से अभी तक में पटना के 13 कॉलेज व स्कूल जुड़ चुके हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद छात्राएं दूसरे को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित करती हैं। मुफ्त ट्रेनिंग होने के कारण काफी संख्या में छात्राएं अभियान से जुड़ रही हैं। महिलाओं को अब अभियान से जोड़ा जा रहा है। छात्राओं और महिलाओं के साथ दुव्र्यवहार की घटना रोकने के लिए आत्मनिर्भर बनाना अनिवार्य है।
अरुणिमा कुमारी, सदस्य, मां प्रेमा फाउंडेशन

आरटीई के लिए सरकार पर बनाएंगे दबाव
सूबे में शिक्षा का अधिकार कानून जमीन पर पूरी तरह से उतर नहीं पाया है। काफी कम संख्या में निजी स्कूल आरटीई के तहत गरीब बच्चों का नामांकन ले रहे हैं। गरीबों को प्रशासन की सुस्ती के कारण उनका बाजिब हक नहीं मिल रहा है। इसके लिए नियमित अभियान चलाया जा रहा है। लोगों की टोली बनाकर संबंधित अधिकारी और संस्थान पर दबाव बढ़ाया जा रहा है। शिक्षकों की कमी के कारण भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पा रहा है। बच्चे आधे समय बाद स्कूल से बाहर निकलकर सड़कों पर नजर आते हैं। शिक्षा में सुधार के लिए हम छोटे-छोटे योगदान देकर बड़े लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। सरकारी स्कूलों में लोगों की भागीदारी और गतिविधि बढऩे के बाद गुणवत्ता में स्वत: सुधार दिखेगा।
संजय कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता

सुदूर इलाकों में मुहैया करा रहे बेहतर शिक्षा
शहर के स्कूल और कॉलेजों के शिक्षा व्यवस्था पर सरकार और अन्य संस्थाओं का फोकस ज्यादा रहने के कारण बेहतर शिक्षा के लिए पटना पर अधिक दवाब है। हम पटना से दूर सुदूर इलाकों में बेहतर शिक्षा मुहैया कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। शिक्षा के लिए शिक्षकों के साथ-साथ अभिभावकों को भी जागरूक कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्र से राजधानी में बेहतर शिक्षा के लिए पहुंचने वाले छात्रों पर विशेष ध्यान देने की दरकार है। इसके साथ-साथ बच्चों को कक्षा खत्म होने से पहले प्राकृतिक आपदा में बचाव का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। घटनाओं को कैसे रोका जाए, इसके लिए उन्हें जागरूक किया जा रहा है।
जया सिंह, सदस्य, एजुकेशनल वेलफेयर सोसाइटी

 

By Gaurav Tiwari