पटना गजब का शहर है। इसमें विरासत का समावेश है तो बिहार राज्य की राजधानी होने से आधुनिकता का रंग भी बखूबी भरा हुआ है। पहले इसका नाम पाटलिपुत्र था। यह सम्राट अशोक के साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था। पटना उन गिने-चुने शहरों में है जो कि प्राचीन काल से आज तक अपनी आभा बिखेर रहा है। यहां हर नागरिक से आप राजनीत‍ि पर बतिया सकते हैं। यहां पर बोली जाने वाली भाषा भोजपुरी काफी प्यारी जुबान है। इस भाषा में शिष्टाचार की महक है तो अंदाज खांटी देसी है।
 
 
 
इस शहर का रिक्शा वाला भी 'जी' करके बात करता है लेकिन इस शहर का अंदाज बगावती है। अंग्रेजों के खिलाफ इस शहर ने जोरदार लड़ाई लड़ी थी। नील की खेती के लिए 1917 में चम्पारण आन्दोलन तथा 1942 का भारत छोड़ो आन्दोलन के समय पटना की भूमिका जबरदस्त रही।  
 
इस शहर को देखकर लगता है कि मां गंगा ने अपने आंचल में पटना को पाल रखा है। पटना से हाजीपुर को जोड़ने के लिए महात्मा गांधी सेतु बना है। जिसकी लंबाई 5575 मीटर है। ये दुनिया का सबसे लंबा सड़क पुल है। पटना में ही गंगा घाघरा, सोन और गंडक जैसी सहायक नदियों से मिलती है। इस शहर से मां गंगा का दुलार कुछ ज्यादा ही है। इसके एक घाट पर गांधी की अस्तियों का कुछ हिस्सा विसर्जन किया गया था जिसके कारण इसको गांधी घाट कहा जाता है।
 
यहां हर शनिवार और रविवार को मां गंगा की आरती होती है। यहीं पर गंगा विहार रेस्टोरेंट है जो कि नदी में तैरता हुआ घाटों और मुख्य जगहों के दर्शन करवाता है। अगर डाल्फिन की अठखेलियां देखना चाहते हैं तो सवार हो जाइए नाव में, क्योंकि यहां आपका इंतजार कर रही हैं गांगा डाल्फिन। इसके एक घाट को महेंद्रू घाट भी कहा जाता है। इसी स्थान से सम्राट अशोक ने अपने बेटे को धर्म का प्रचार करने के लिए रवाना किया था।  
 
धर्म की दृष्टि से यह नगर काफी महत्वपूर्ण है। बौद्ध और जैन तीर्थस्थल वैशाली, राजगीर या राजगृह, नालन्दा, बोधगया और पावापुरी  इस शहर के आस पास ही बसे हुए हैं। सिखों के लिए ये जगह काफी पावन और पवित्र है। सिखों के दसवें और अंतिम गुरु गोविंद सिंह का जन्म पटना में ही हुआ था। देश-विदेश के लाखों सिख श्रद्धालु पटना के हरमिंदर साहिब के दर्शन करने आते है और अपना मत्था टेकते हैं।  
 
पटना शहर का इतिहास गौरवपूर्ण है। पटना के नाम की उत्पत्ति को लेकर कई मत प्रचलित हैं। एक मत के अनुसार पटनदेवी (हिन्दू देवी) के नाम से प्रचलित हुआ। एक अन्य मत के अनुसार यह नाम संस्कृत के पत्तन से आया है जिसका अर्थ बन्दरगाह होता है। मौर्यकाल के यूनानी इतिहासकार मेगस्थनीज ने इस शहर को पालिबोथरा तथा चीनी यात्री फाहियान ने पालिनफू के नाम से संबोधित किया है। यह ऐतिहासिक नगर पिछली दो सहस्त्राब्दियों में कई नाम पा चुका है - पाटलिग्राम, पाटलिपुत्र, पुष्पपुर, कुसुमपुर, अजीमाबाद और पटना। ऐसा समझा जाता है कि वर्तमान नाम शेरशाह सूरी के समय से प्रचलित हुआ है।
 
वैसे तो उत्तर भारत में मनाया जाने वाला हर त्यौहार यहां बनाया जाता है। लेकिन छठ पर्व का आयोजन सबसे शानदार तरीके से किया जाता है। छठ पर्व में सूर्य देव की आराधना की जाती है। इस पर्व को महापर्व कहते हैं। छठ के दौरान पूरे पटना का माहौल भक्तिमय हो जाता है। सभी लोग कठिन उपासना करके छठी मैया को प्रसन्न करते हैं।  
 

खान-पान
 
खाने-पीने में भी पटना अव्वल है। लिट्टी चोखा की ख्याति देश में ही नहीं विदेशों में भी है। लिट्टी एवं बैंगन एवं टमाटर व आलू के साथ मिला कर बनाया गया चोखा बहुत ही प्रमुख है। यहां सत्तू को घोलकर पीते है, जो कि एक शानदार नाश्ता होता है। यहां के लोगों का मुख्य भोजन भात, दाल, तरकारी और अचार है। सरसों के तेल का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है। पूरे बिहार में चावल का उत्पादन अधिक होता है इसलिए लोग गेंहू के मुकाबले चावल का ज्यादा उपयोग करते हैं। पुआ, पिठ्ठा, तिलकुट, चिवड़ा आदि अन्य भोजन है जो कि लोग बहुत पसंद करते हैं।
 
प्राचीन नगरी होने के कारण यहां के कई होटल बहुत पुराने है। रेल्वे स्टेशन के पास पाल होटल है। यहां पर आपको ऐसा खाना मिलेगा जो कि आपकी आत्मा में उतर जाएगा। यहां की लौंगलता मिठाई काफी लजीज है, जो आपको एक बार खाने पर दूसरी बार खींचकर स्वतः ले आएगी। यहां पर एक मौर्या लोक शॉपिंग कांपलेक्स है। जहां पर तरह-तरह के जायके आपका इंतजार करते मिलेंगे। यहां पर मिलने वाला पान आपकी आत्मा को तृप्त कर देगा। तारांडल के मास स्थित चंपारण मीट हाउस में मिलने वाला मटका मटन का स्वाद आपको दूसरी दुनिया में पहुंचा देगा।  
 

दर्शनीय स्थल
 
तख्त श्रीहरमंदिरः पटना सिखों के 10वें और अंतिम गुरु गोविन्द सिंह की जन्मस्थली है। नवम गुरु श्री तेगबहादुर के पटना में रहने के दौरान गुरु गोविन्दसिंह ने अपने बचपन के कुछ वर्ष पटना सिटी में बिताए थे। बालक गोविन्दराय के बचपन का पंगुरा (पालना), लोहे के चार तीर, तलवार, पादुका तथा 'हुकुमनामा' यहां गुरुद्वारे में सुरक्षित है। यह स्थल सिखों के लिए अति पवित्र है।
 
महावीर मन्दिरः  संकटमोचन रामभक्त हनुमान मन्दिर पटना जंक्शन के ठीक बाहर बना है। न्यू मार्किट में बने मस्जिद के साथ खड़ा यह मन्दिर हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है।
 
गांधी मैदानः वर्तमान शहर के मध्यभाग में स्थित यह विशाल मैदान पटना का दिल है। जनसभाओं, सम्मेलनों तथा राजनीतिक रैलियों के अतिरिक्त यह मैदान पुस्तक मेला तथा दैनिक व्यायाम का भी केन्द्र है। इसके चारों ओर अति महत्वपूर्ण सरकारी इमारतें और प्रशासनिक तथा मनोरंजन केंद्र बने हैं।
 
गोलघर : 1770 ईस्वी में इस क्षेत्र में आए भयंकर अकाल के बाद अनाज भंडारण के लिए बनाया गया यह गोलाकार ईमारत अपनी खास आकृति के लिए प्रसिद्ध है। 1786 ईस्वी में जॉन गार्स्टिन द्वारा निर्माण के बाद से गोलघ‍र पटना शहर का प्रतीक चिह्न बन गया। दो तरफ बनी सीढि़यों से ऊपर जाकर पास ही बहनेवाली गंगा और इसके परिवेश का शानदार अवलोकन संभव है।
 
गांधी संग्रहालयः गोलघर के सामने बनी बांकीपुर बालिका उच्च विद्यालय के बगल में महात्मा गाधी की स्मृतियों से जुड़ी चीजों का नायाब संग्रह देखा जा सकता है। हाल में इसी परिसर में बनाया गया चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का अध्ययन केंद्र भी घूमा जा सकता है।
 
संजय गांधी जैविक उद्यानः  राज्यपाल के सरकारी निवास राजभवन के पीछे स्थित जैविक उद्यान शहर का फेफड़ा है। व्यायाम करने वालों और पिकनिक मनाने के लिए यह पसंदीदा स्थल है। 
 
 
 

By Gaurav Tiwari