बिहार की राजधानी पटना रहने और बसने के लिहाज से सबसे खराब शहरों में शुमार है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रलय की ओर से जारी ''ईज ऑफ लिविंग'' इंडेक्स की सूची में इस शहर को 109वें पायदान पर जगह मिली है। राजधानी होने के बावजूद पटना इस सूची में राज्य के दो शहरों बिहारशरीफ (108) और भागलपुर (107) से नीचे है। गवर्नेंस के मामले में पटना की रैकिंग 106 है, जबकि शिक्षा के मामले में यह अन्य शहरों के मुकाबले 104वें पायदान पर है।

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सुरक्षा के लिहाज से पटना की रैंकिंग बेहद खराब है और यह इस सूची में सबसे निचले 111वें पायदान पर मौजूद है। स्वास्थ्य सेवाओं के मामले पटना जहां 87वें पायदान पर काबिज है वहीं अर्थव्यवस्था और रोजगार के मामले में 108वें, बिजली आपूर्ति (90वें) और परिवहन सेवाओं के मामले में 47वें पायदान पर बना हुआ है।

जल आपूर्ति के मामले में पटना 98वें पायदान पर बना हुआ है जबकि सीवर प्रबंधन और कचरा प्रबंधन के मामले में इस शहर की रैंकिंग क्रमश: 86 और 98 हैं। प्रदूषण के घटते स्तर के लिहाज से पटना 111 शहरों की सूची में 85वें पायदान पर काबिज है। 111 शहरों की इस सूची को चार प्रमुख क्षेत्रों संस्थागत, सामाजिक, आर्थिक और बुनियादी सुविधाओं को आधार मानते हुए तैयार किया गया है, जिसमें 15 सुविधाओं को शामिल करते हुए रैंकिंग तय की गई है।

इन 15 सुविधाओं में गवर्नेंस, संस्कृति, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, आर्थिक हालत, रोजगार, कूड़ा प्रबंधन, सीवर प्रबंधन, पर्यावरण प्रदूषण का स्तर, आवासीय सुविधाएं, भूमि का उपयोग, बिजली आपूर्ति, परिवहन, पेयजल की आपूर्ति और नागरिकों के लिए पार्क अथवा खुली हवा वाले स्थल जैसे मानक शामिल हैं, जिसके आधार पर शहरों का आकलन किया गया है।

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By Nandlal Sharma