पटना, राज्य ब्यूरो। पटना हाईकोर्ट में एक रोचक मामला गुरुवार को सामने आया, जब एक विधवा की तरफ से दायर रिट याचिका को सुनते हुए पटना हाईकोर्ट ने एक रिटायर्ड रेल कर्मी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया की क्यों नही एक मृतक की जगह पर फर्जी तरीके से नौकरी करने कर आरोप में उसे मिलने वाले पेंशन वगैर के लाभ पर रोक लगाई जाए? न्यायाधीश अश्विनी कुमार सिंह ऐव न्यायाधीश प्रकाश चंद्र जैसवाल की खण्डपीठ ने सोना देवी की रिट याचिका को सुनते हुए उक्त आदेश दिया। 

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता दीपक सिन्हा ने कोर्ट को बताया कि सोना देवी के पति अनिरुद्ध यादव पूर्व रेलवे अंतर्गत मालदा डिवीजन में ट्रैकमैन का काम करते थे। सेवा काल के दौरान ही 1978 में  अनिरुद्ध की मौत हो गयी। अनिरुद्ध की जगह उसका भाई माधो यादव फर्जी तरीके से अपने भाई के पहचान पर रेलवे में उसी ट्रैकमैन के पद पर काम करता रहा जिसकी भनक याचिकाकर्ता को नही थी।

यही नहीं माधो 34 साल तक काम करते हुए  31 मार्च 2012 को रिटायर हो गया। याचिकाकर्ता को जब उसके मृत पति के नाम पर एक  पेंशन लाभ सम्बन्धित चिट्ठी मिली तब उसे सच्चाई का पता चला। अनिरुद्ध के फर्जी पहचान पर नौकरी कर रिटायर होने वाले माधो ने अपनी पेंशन पर दावा ठोकते हुए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट ) का दरवाजा खटखटाया। कैट ने  उसे राहत देते हुए  भारतीय रेल को पेंशन देने का निर्देश दिया। कैट के आदेश को चुनौती देते हुए असली अनिरुद्ध यादव की विधवा ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। 

Posted By: Rajesh Thakur

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