पटना, जेएनएन : जब कोरोना महामारी का दौर शुरू हुआ तो 22 मार्च को टाइल्स सेक्टर का शटर गिर गया था । मई तक यह बंदी जारी रही। तीन माह के बाद मई में दोबारा सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर, डिजिटल बदलाव के साथ कारोबार शुरू हुआ। व्यापार में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। ग्राहकों का भरपूर समर्थन मिलने लगा, जो अब भी जारी है। हालांकि, सप्लाई चेन में सुस्ती सहित अन्य कारणों से इस सेक्टर में ग्रोथ धीमा रहा। अब कुछ संतोषजनक कारोबार हो रहा है। 

किसी स्टॉफ की नहीं की छंटनी:

त्योहारों के बाद भवन निर्माण सेक्टर के गति पकडऩे की उम्मीद है। इसी के साथ हार्डवेयर, खास तौर से टाइल्स का कारोबार भी सुधर जाएगा। यह मानना है न्यू बाइपास पर मगध निर्माण एक्जारो टाइल्स के निदेशक आशुतोष कुमार का। उन्होंने अपने व्यापार के बारे में बताते हुए कहा कि यह अच्छा संयोग रहा कि हमारे किसी स्टॉफ या मेरे परिवार को कोरोना नहीं हुआ। इसी बीच हमने अपने सामाजिक दायित्व के तहत फूड पैकेट बांटा। उतने बुरे वक़्त में जब कई लोगों को बड़ी कंपनियों से निकाला जा रहा था तब भी हमने अपने स्टॉफ की छंटनी नहीं की और न ही वेतन में कोई कटौती की।

जून में उछला कारोबार, जुलाई के बाद से स्थिर : 

जून में शोरूम खुला। दोबारा कारोबार कई तरह के बदलाव के साथ शुरू हुआ। सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा गया। शोरूम को हर दिन सैनिटाइज करने की व्यवस्था की गई। हैंड सैनिटाइजर, मास्क, शारीरिक दूरी जैसे मानकों का पूरा ध्यान रखा गया। ग्राहकों को डिजिटल सेवा दी गई। ऑनलाइन पेमेंट, होम डिलीवरी, गूगल के जस्ट डॉयल का उपयोग किया गया। इन बदलावों से ग्राहकों का भरोसा बढ़ा। साथ ही वैसे ग्राहक जो भवन निर्माण करा रहे थे, और अचानक लॉकडाउन की वजह से फंस गए, उन्होंने जमकर खरीदारी की।  आशुतोष कुमार ने बताया कि हार्डवेयर सेक्टर को इससे बल मिला। टाइल्स कारोबार में जमकर उछाल आया। हालांकि इसके बाद फिर व्यापार मद्धिम गति से आगे बढऩे लगा। करीब 40 फीसद पर व्यापार स्थिर रहा। 

कई तरह की परेशानियां आई सामने : 

टाइल्स कारोबार में कोरोना में लॉकडाउन की वजह से कई तरह की परेशानी सामने आने लगी। इसी वजह से उछाल के बाद कारोबार की गति मद्धिम हो गई। आशुतोष कुमार ने आगे कहा कि पहली परेशानी तो यह कि सप्लाई चेन सुस्त हो गई। पहले जितना आर्डर दिया जाता था, पूरा मिल जाता था लेकिन अब मात्र 30 फीसद ही टाइल्स की आपूर्ति हो रही थी। टाइल्स हमलोग गुजरात के हिम्मत नगर और मोरबी से मंगाते हैं। यहां की फैक्ट्रियों को कई देशों से बड़ा ऑर्डर मिलने लगा। वजह यह थी कि कई देश चीन से टाइल्स मंगाने की जगह भारत को पसंद करने लगे। ऐसे में विदेशी ग्राहकों के बड़े आर्डर को गुजरात की कंपनियां पसंद करने लगीं। हमलोगों को मात्र 30 फीसद टाइल्स ही मिल पा रहा है। अभी भी परेशानी है। दूसरी ओर कोरोना की वजह से पटना सहित पूरे बिहार में निर्माण का काम प्रभावित हुआ। मजदूर शहर छोड़कर गांव चले गए। वापसी बहुत कम हुई। इससे भी निर्माण से जुड़े कारोबार की गति मद्धिम रही। 

नवंबर से पटरी पर आ जाएगा कारोबार : 

आशुतोष कुमार ने कहा कि उम्मीद है कि नवंबर के बाद कारोबार पटरी पर आ जाएगा। त्योहार और चुनाव का दौर तब तक थम जाएगा। साथ ही भवन निर्माण पर लोग ध्यान देंगे। रियल एस्टेट की कंपनियां भी अपना कारोबार शुरू करेंगी। गांव गए मजदूर त्योहारों के बाद वापसी करेंगे। सबकुछ सकारात्मक होगा। इससे हार्डवेयर, टाइल्स कारोबार के पटरी पर आ जाने की उम्मीद है। 

लक्ष्य एक, मेहनत किया जबरदस्त : 

आशुतोष कुमार कहते हैं, मेरा जन्म पटना में हुआ है। चंडीगढ़ से मैंने वर्ष 2010 में स्नातक किया। इसके बाद तीन साल टाइल्स से जुड़ी कंपनियों में जॉब किया। अनुभव लिया। फिर मन में यह बात आई कि बिहार आकर दूसरे प्रदेश के लोग व्यापार करते हैं तो मैं क्यों नहीं कर सकता। टाइल्स क्षेत्र का अनुभव था इसलिए बेउर मोड़ से पूरब न्यू बाइपास पर मुकेश कुमार और श्रवण कुमार के साथ मिलकर टाइल्स कारोबार शुरू किया। पूरे बिहार में यहां से टाइल्स की आपूर्ति करता हूं। रिटेल भी है। मगध निर्माण एक्जारो टाइल्स बिहार का जाना पहचाना नाम है। मेरा लक्ष्य एक था, मेहनत से कभी घबराया नहीं। उतार-चढ़ाव आया, चुनौतियां आईं लेकिन कारोबार बढ़ाता रहा। आगे इसी व्यापार को और आगे बढ़ाने की योजना है।

 

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