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मुजफ्फरपुर [जेएनएन]। प्यार को इस कदर गुनाह माना गया कि पंचायत ने प्रेमी युगल को गांव निकाला का फरमान सुना दिया। गांव से बाहर जाने से पहले उन्हें घर तक जाने की इजाजत नहीं मिली। यह तुगलकी फरमान खुद उस पंचायत के सरंपच ने सुनाया। वहीं इस फैसले में अन्य पंचों व लड़का- लड़की के परिजनों की भी सहमति थी। 

मामला बंदरा प्रखंड क्षेत्र के एक गांव का है। किशोरवय प्रेमी युगल के अलग-अलग जाति से होने के कारण समाज के ठेकदारों की नाराजगी अधिक बढ़ गई। भय से पहले तो दोनों दिल्ली भाग गए। बाद में परिजन उन्हें घर वापस ले आए, लेकिन अलग-अलग होने की शर्ते थोप दी।

 

परिजनों को संतुष्ट करने व दिखावे के लिए कुछ दिनों तक दोनों अलग- अलग रहे, लेकिन फिर से छुप-छुप कर मिलने-जुलने लगे। इस बात को लेकर शनिवार को गांव में पंचायत बैठी जिसमें समाज एवं जाति के आधार पर जुटे पंचों ने दोनों के परिजन को बुलाया। दोनों साथ-साथ जीने-मरने की जिद पर अड़े रहे।

 

दोनों के परिजन पंचों के फैसले के साथ थे। वे इस कदर गुस्से में थे कि उन्हें पहचानने व अपना मानने तक से इन्कार करते हुए नाते-रिश्ते तोडऩे की बात कही। इसके बाद प्रेमी युगल को गांव निकाला की सजा सुनाई गई। कहीं से कोई समर्थन मिलता नहीं देख दोनों ने गांव छोडऩे में ही अपनी भलाई समझी। गांव छोडऩे के बाद दोनों आखिर कहां गए, यह कोई बताने को तैयार नहीं है। 

 

इधर, इस संबंध में पीयर थानाध्यक्ष धर्मवीर भारती  ने बताया कि इस तरह के किसी मामले की जानकारी या शिकायत नहीं मिली है। यदि इस बात को लेकर पीडि़त लड़का या लड़की ओर से शिकायत मिलती है तो आवश्यक कानूनी कार्रवाई के साथ ही उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाएगी।

Posted By: Kajal Kumari

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