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Lok Sabha Election 2024: बुद्ध और महावीर की धरती, फिर भी चुनावी दौर से गायब हो गए पर्यटन स्थलों के विकास के मुद्दे

आजकल चुनावी दौर से पर्यटन स्थलों के विकास के मुद्दे पूरी तरह से गायब हो गए हैं। बिहार धार्मिक सांस्कृतिक ऐतिहासिक एवं भौगोलिक एवं पर्यावरण तथा जैवविविधता की दृष्टि से काफी संपन्न राज्य है। बिहार में इतनी बड़ी पर्यटन संपदा होने के बावजूद यहां पर पर्यटक आकर्षित नहीं हो रहे हैं। यहां के हर घाट को सजाया-संवारा जा सकता है जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

By Niraj Kumar Edited By: Mukul Kumar Tue, 16 Apr 2024 03:16 PM (IST)
प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर

नीरज कुमार, पटना। Lok Sabha Election 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर राज्य में सरगर्मी काफी बढ़ गई है। राजनीतिक दल अपने हिसाब से चुनाव प्रचार कर रही हैं। परंतु विकास के कई मुद्दे अभी भी अछूते हैं, जिनपर किसी पार्टी या प्रत्याशी का ध्यान नहीं जा रहा है।

वर्तमान परिदृश्य पर नजर दौड़ाएं तो बिहार का पर्यटन उद्योग ही चुनावी अभियान से गायब है। प्रदेश के पर्यटन स्थलों का विकास के मुद्दे गायब हैं, जबकि बिहार धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं भौगोलिक एवं पर्यावरण तथा जैवविविधता की दृष्टि से काफी संपन्न राज्य है।

यहां पर भगवान श्रीराम का आगमन हुआ है। यह धरती भगवान महावीर की जन्मभूमि रही है। यहीं पर महात्मा बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया है। सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह ने बिहार की राजधानी पाटलिपुत्र में जन्म लिया है। सूफी संतों का संदेश यहां पर कण-कण में गूंजता है।

इसके अलावा यहां पर वाल्मिकीनगर टाइगर रिजर्व, राजगीर की जंगल सफारी, कोकोलत का प्रसिद्ध जल प्रपात एवं राजगीर का गर्म कुंड प्रकृति के अनमोल धरोहर हैं।

बिहार में इतनी बड़ी पर्यटन संपदा होने के बावजूद यहां पर पर्यटक आकर्षित नहीं हो रहे हैं। देवनदी गंगा बिहार को दो भागों में विभाजित करती हैं, यहां के हर घाट को सजाया-संवारा जा सकता है, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

रामायण सर्किट बन सकता आकर्षण का केंद्र

रामायण सर्किट धार्मिक पर्यटकों को आकर्षित करने का एक सशक्त माध्यम बन सकता है। प्रदेश का बक्सर क्षेत्र धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण इलाका है। यहीं पर मां गंगा बिहार में प्रवेश करती है। प्राचीन काल में प्रभु श्रीराम का भी इस स्थल से संबंध रहा है। जनकपुर जाते समय प्रभु श्रीराम इसी स्थल से गुजरे थे।

बक्सर के समीप स्थित विंध्य पर्वतमाला की श्रेणियां पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं। सीतामढ़ी रामायण सर्किट का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।

कैमूर में स्थापित है देश का सबसे प्राचीन मंदिर

कैमूर की पहाड़ियों पर देश का सबसे प्राचीन मंदिर मां मुंडेश्वरी भवानी का मंदिर स्थापित है। इस प्राचीन मंदिर का विकास समय की मांग है। इस मंदिर को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विकसित किया जा सकता है। इस मंदिर के आसपास के क्षेत्रों को विकसित करना बहुत जरूरी है।

बिहार की राजधानी पटना से लगभग 170 किलोमीटर दूर यह मंदिर स्थिति है। यहां जाने वाला पर्यटन रात्रि विश्राम करना चाहता है लेकिन पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण उसे उसी दिन वहां से लौटना पड़ता है।

बौद्ध सर्किट विदेशी पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण

राज्य के बौद्ध सर्किट के तहत चयनित स्थलों का सही तरीके से विकास कर दिया जाए तो विदेशी पर्यटकों की संख्या राज्य में बढ़ाई जा सकती है।

राज्य में बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर, सुजाता कुटीर, केसरिया स्तूप, विश्व शांति स्तूप, वैशाली के अशोक स्तंभ बौद्ध सर्किट के महत्वपूर्ण स्थल है, जिनका विकास कर दुनिया के बौद्ध धर्म बहुल देशों के पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है।

जैन श्रद्धालुओं को आकर्षित करने की जरूरत

बिहार जैन श्रद्धालुओं के लिए काफी पवित्र स्थल माना जाता है। बिहार में ही जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर वासुपुज्य और 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म हुआ था। जैन श्रद्धालुओं के लिए पावापुरी, नालंदा, जमुई के लछुआर जैन मंदिर, वासोकुंड, कुंडलपुर, कमलदह जैन मंदिर के विकास की जरूरत है।

गुरु गोविंद सिंह की जन्मस्थली है पटना

सिख श्रद्धालुओं के लिए भी बिहार की धरती काफी पूजनीय है। सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह का जन्म पटना में हुआ था। यहां पर गुरु का बाग, हांडी साहिब, बाल लीला, कंगनघाट एवं प्रकाश पुंज सिख श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण स्थल हैं।

सूफी संतों ने भी फैलाया है यहां अपना संदेश

सूफी संतों के लिए भी बिहार की धरती महत्वपर्ण रही है। मनेरशरीफ, बिहारशरीफ के खानकाह सूफी संतों के लिए संदेश फैलाने के महत्वपूर्ण स्थल रहे हैं। इन स्थलों पर अभी भी काफी संख्या में श्रद्धालु सिर झुकाने आते हैं। मनेरशरीफ का दर्शन करने के लिए देशभर से श्रद्धालु आते हैं। इस स्थल को विकसित करना समय की मांग है।

बिहार में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए आधारभूत संरचना विकसित करना बहुत जरूरी है। यहां पर पर्यटक आते हैं लेकिन सुविधाओं के अभाव में रूक नहीं पाते हैं। राजधानी पटना को छोड़ दे तो राज्य में ठहरने के लिए अच्छे होटल का घोर अभाव है। पर्यटन स्थलों पर गंदगी की भरमार है। वहां पर साफ-सफाई बेहद जरूरी है। राजगीर जैसे अन्तर्राष्टीय स्थलों को विकसित करना बहुत जरूरी है। वहां पर काफी संख्या में शौचालय, पयेजल की सुविधा होनी चाहिए। लोगों के आने-जाने के लिए सुरक्षित एवं सुगम यातायात की सुविधा करना भी बहुत जरूरी है। - प्रभात कुमार, उपाध्यक्ष, बिहार ट्यूरिज्म एसोसिएशन, पटना

राज्य में छह वर्षों में आए पर्यटकों की संख्या (लाख में)

पर्यटकों के प्रकार देशी विदेशी
2022 253.3 0.86
2021 25.0 0.01
2020 56.4 3.0
2019 339.9 10.9
2018 336.2 10.9
2017 324.1 10.8

प्रकृति ने बिहार को काफी सजाया-संवारा है। परंतु उसका लाभ यहां के लोगों को नहीं मिल रहा है। इसके लिए सरकार एवं समाज को मिलकर काम करना होगा। राज्य के पर्यटन स्थलों का विकास केंद्रीय एवं राज्य दोनों स्तरों पर होना चाहिए। प्रदेश के कई पर्यटन स्थल हैं जिनका विकास राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर किया जा सकता है। गंगा की पावन धारा बिहार को सिंचित करती है। गंगा घाटों को सही तरीके से विकसित किया जाए तो राज्य में दक्षिण भारत से लेकर दुनियाभर के पर्यटन यहां आ सकते हैं। इको पर्यटन राज्य में काफी तेजी से उभर रहा है। उसको बढ़ावा देने के लिए अपने-अपने क्षेत्र के सांसदों को आगे आने की जरूरत है ताकि उससे सीधे-सीधे लोगों का रोजगार जुड़ा है। इससे प्रदेश से पलायन रोकने में बड़ी मदद मिलेगी। - सचिन शर्मा, कोषाध्यक्ष, बिहार ट्यूरिज्म एसोसिएशन,पटना

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