3 महीने तक छापामारी, अब मुकदमे की बारी; पटना में 110 प्रतिष्ठानों को फूड सेफ्टी विभाग का नोटिस
पटना में तीन माह की छापेमारी के बाद खाद्य संरक्षा विभाग 110 से अधिक प्रतिष्ठानों पर कानूनी कार्रवाई कर रहा ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर
HighLights
पटना में 110 से अधिक प्रतिष्ठानों पर छापेमारी।
घटिया खाद्य सामग्री नष्ट, अब कानूनी कार्रवाई।
प्रयोगशाला रिपोर्ट पर नोटिस, कोर्ट में मुकदमे।
जागरण संवाददाता, पटना। राजधानी समेत प्रदेश में तीन माह से चल रही छापेमारी में खाद्य संरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने वाले प्रतिष्ठानों की गड़बड़ी अब प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट में भी सामने आने लगी है।
110 से अधिक खाद्य प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई और 30 लाख रुपये से अधिक की घटिया खाद्य सामग्री नष्ट कराने के बाद विभाग ने अब कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अमानक नमूनों की रिपोर्ट के आधार पर सोमवार या मंगलवार से ऐसे कारोबारियों को नोटिस जारी किए जाएंगे। खाद्य कारोबारियों को रिपोर्ट के विरुद्ध अपील करने के लिए 30 दिन का समय मिलेगा।
वहीं, जिन लोगों को पहले नोटिस किया गया था, उनके खिलाफ सोमवार से कोर्ट में मुकदमे दर्ज कराए जाएंगे। रविवार को पटना में कार्यरत पांच टीमों ने नोटिस व मुकदमा करने की तैयारी पूरी कर ली है। मोटे जुर्माने से मिलावटखोरी में कमी आने की बात कही जा रही है।
खाद्य संरक्षा विभाग ने पटना के अभिहित पदाधिकारी सुदामा चौधरी व खाद्य संरक्षा पदाधिकारी डा. सुदिन कुमार सुमन के नेतृत्व में ताबड़तोड़ 110 से अधिक प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की है।
इनमें होटल-रेस्टोरेंट, मिठाई दुकानें, केक-बेकरी, आइसक्रीम निर्माता और आनलाइन खाद्य सामग्री की आपूर्ति करने वाले वेयरहाउस तक शामिल हैं। 30 लाख रुपये से अधिक की खाद्य सामग्री नष्ट कराई जा चुकी है।
इसके बावजूद लगातार गड़बड़ियां मिल रही थीं। इसके बाद अधिकारियों ने फूड सेफ्टी मानकों की अनदेखी करने वाले प्रतिष्ठानों पर सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है।
अब क्या होगा?
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत छापेमारी कर पहले लीगल नमूने लेकर खाद्य प्रयोगशाला में जांच कराई जाती है। इस रिपोर्ट के आधार पर खाद्य कारोबारी को नोटिस जारी कर अपील करने के लिए 30 दिन का समय दिया जाता है।
अपील करने पर उच्च एनएबीएल प्रयोगशाला में नमूना दोबारा जांच को भेजा जाता है। वहीं जो अपील नहीं करते उन पर जुर्माने, लाइसेंस निलंबित या रद करने की प्रक्रिया की जाती है। नामित अधिकारी जांच रिपोर्ट के आधार पर तय करता है कि मामला जुर्माने का है या कारावास वाले अपराध का।
गड़बड़ी/अपराध – अधिकतम जुर्माना (लाख में)
| अपराध | अधिकतम जुर्माना (लाख में) |
|---|---|
| घटिया या मानक से कम गुणवत्ता का खाद्य पदार्थ बेचना (धारा 51) | 5 |
| खरीदार की मांग के अनुरूप गुणवत्ता नहीं होना (धारा 50) | 5 |
| गलत लेबल या भ्रामक जानकारी देना (धारा 52) | 3 |
| खाद्य पदार्थ के बारे में भ्रामक विज्ञापन (धारा 53) | 10 |
| खाद्य पदार्थ में अवांछित चीज मिलना (धारा 54) | 1 |
| खाद्य सुरक्षा अधिकारी के निर्देश का पालन नहीं करना (धारा 55) | 2 |
| अस्वच्छ-गंदे माहौल में खाद्य निर्माण (धारा 56) | 1 |
| स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मिलावट सामग्री रखने या प्रयोग करने (धारा 57) | 10 |
| बिना अलग दंड वाले अन्य उल्लंघन (धारा 58) | 2 |
| बिना लाइसेंस खाद्य कारोबार करना (धारा 63) | 10 |
स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित होने पर जेल की सजा
| अपराध | अधिकतम कारावास | जुर्माना |
|---|---|---|
| कोई शारीरिक नुकसान नहीं हुआ | 3 माह जेल | 3 लाख |
| सामान्य रूप से बीमार पर जान को खतरा नहीं | 1 वर्ष | 3 लाख |
| गंभीर रूप से बीमार | 6 वर्ष | 5 लाख |
| खाद्य पदार्थ से मृत्यु | 7 वर्ष | 10 लाख |
नोट: बार-बार वही अपराध करने पर धारा 64 के तहत निर्धारित सजा के अधीन दोगुनी सजा का प्रावधान है।