पटना, राज्य ब्यूरो। बिहार में सभी राजनीतिक दलों की पसंद हुआ करते थे दागी और दबंग नेता,  लेकिन वक्त बदला, पसंद बदली और हालात बदले तो अब ये नेता अपनी पत्नियों के सहारे अपनी  राजनीतिक धाक जमाए रखना चाहते हैं।  

इसकी पहली कड़ी शुरू होती है महीनों से जेल में बंद निर्दलीय विधायक अनंत सिंह 2010 में जदयू टिकट पर चुनाव जीते थे। 2015 के चुनाव में निर्दलीय जीते। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को टिकट दे दिया। हालांकि वह हार गईं। सिवान के चर्चित दबंग अजय सिंह को जदयू ने लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं दिया। उनकी पत्नी कविता सिंह विधायक थीं। उन्हें सिवान से टिकट दे दिया गया। वह जीतीं।

उनके इस्तीफे के बाद जब विधानसभा की दारौंदा सीट पर उपचुनाव हुए तो जदयू ने अजय सिंह को अपना उम्मीदवार बना दिया। यह अलग बात है कि उपचुनाव में उनकी हार हो गई। छपरा के दबंग छवि के एक और विधायक मनोरंजन सिंह ऊर्फ धूमल सिंह इस समय जदयू में हैं।

दागियों से राजद नहीं तोडऩा चाहता नाता 

राजद के विधायक राजबल्लभ यादव पर नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म का आरोप प्रमाणित हुआ। सदस्यता गई। मगर, विधायक की हैसियत से राजबल्लभ जब तक जेल में रहे, राजद ने उन्हें पार्टी से अलग नहीं किया। आजन्म कारावास की सजा भुगत रहे पूर्व सांसद मो. शहाबुद्दीन अब भी राजद के सदस्य हैं। 

छोटी पार्टी लोजपा को हाल के दिनों में दबंगों के लिए सबसे सुरक्षित आश्रय स्थल माना जाता था। सूरजभान और रामा सिंह जैसे दबंग इसी दल से लोकसभा में पहुंचे थे। बाद में इन दोनों नेताओं को टिकट तो नहीं मिला लेकिन सूरजभान की पत्नी वीणा देवी मुंगेर से लोजपा के टिकट पर लोकसभा में पहुंच गईं।

2019 में सूरजभान के छोटे भाई नवादा से एमपी बन गए। वैसे, पहले की तुलना में लोकसभा या विधानसभा में राज्य के दबंग प्रतिनिधियों की पैठ कमजोर पड़ी है।

Posted By: Kajal Kumari

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